समाजवादी पार्टी

यूपीः भंग होगा वक्फ बोर्ड, जांच होगी !

आज़म खान के लिये आने वाला समय काफी मुश्किलों से भरा साबित हो सकता है। एक तरफ जहा सत्ता उनसे छिटक कर बहुत दूर जा चुकी हैं तो दूसरी तरफ उनके ऊपर अपने पद का दुरुपयोग करते हुये रामपुर के जौहर अली विश्वविद्यालय परिसर में तमाम सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा करने के मामले गर्माने लगे हैं। रामपुर के ही पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अब्दुल सलाम ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रमाणों के साथ एक शिकायत भेजी हैं जिसमे उन्होंने पूर्व मंत्री आजम खान के ऊपर आरोप लगाया हैं कि आजम खान ने ग्राम सींगनखेड़ा, तहसील सदर, रामपुर के खाता संख्या 01214 की ग्राम सभा की 14.95 एकड़ जमीन 30 वर्षों के लिये जबरदस्ती पट्टे पर ले रखी हैं और इसके साथ ही उन्होंने वहाँ की चक रोड (जिसकी खाता संख्या 01232 की 2.13 एकड़ भूमि पर जो की इस विश्वविद्यालय को दी गयी थी उस पर भी आज़म खान ने अवैध तरीके से कब्ज़ा कर रखा हैं।

वोट-दिमाग’ में दूरियों से पराभव!

नेताजी की पत्नी साधना का कथन ‘‘प्रतीक को राजनीति में लाना होगा।’’
स्पष्ट संकेत है अखिलेश के समानान्तर खड़ा करना। उस पर भी मोदी प्रशंसक
अपर्णा का सत्ता परिवर्तन के एक पखवाड़े में सीएम योगी आदित्यनाथ से
‘विशिष्ट पीहर-विष्ट घराने से’’ नाता जोड़कर तीन बार अपने पतिदेव को साथ
लेकर मिलना बहुत कुछ संकेत देता है।

बिहार से यूपी तक पिछलग्गू बनती कांगे्रस

दरअसल, 2009 के बाद से कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिर रहा है। कांग्रेस के हाथ से राज्यों की सत्ता छिटक रही है। लिहाजा यूपी में सत्ता में होना कांग्रेस की राजनीतिक मजबूरी माना जा रहा है। कांग्रेस सत्ता में तो आना चाहती है। इसके अलावा एक मकसद बीजेपी को यूपी की सत्ता से दूर रखना भी है। कांगे्रस की दुर्दशा के कारणों पर नजर डाली जाये तो जटिल जातीय समीकरण वाले इस सूबे में कांग्रेस के पास अपना परंपरागत वोट बैंक नही बचा है। ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम अब कांग्रेस के वोटर नहीं रह गये हैं।

सपा का घमासान लोकतंत्र पर प्रहार

उत्तरप्रदेश में चल रहा समाजवादी पार्टी का घमासान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर करारा प्रहार कहा जा सकता है। राजनीतिक पार्टियां लोकतांत्रिक व्यवस्था का भले ही दम भरती हों, लेकिन इस प्रणाली का राजनीतिक दलों के नेता कितना पालन करते हैं, यह कई बार देखा जा चुका है। पूरी तरह से एक ही परिवार पर केन्द्रित समाजवादी पार्टी अलोकतांत्रिक रुप से आगे बढ़ती हुई दिखाई देने लगी है। समाजवादी पार्टी की खानदानी लड़ाई के चलते पिछले कई दिनों से समाचार पत्रों व विद्युतीय प्रचार तंत्र की मुख्य खबर बनी हुई है।