सांस्कृतिक राष्ट्रवाद

आग लगाने में ‘प्रवीण’ तोगडिय़ा

भारतीय राजनीति जिस समय राम मंदिर निर्माण पर मौन थी और मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते हिंदू विरोध की राजनीति को अपना मौलिक संस्कार माने बैठी थी -उस समय राम जन्मभूमि के मुददे को गर्माना और हिन्ंदू के भीतर आत्मस्वाभिमान पैदा करने के लिए उसे राजनीतिक रूप से चेतनित करना आवश्यक हो सकता है, परंतु हिन्दू को मुसलमान के विरूद्घ आक्रामक बनाकर वर्गीय संघर्ष को जन्म देना उचित नहीं हो सकता।

प्रबंधन कौशल के तीन वर्ष

अनेक अनोखे तर्क विमर्श में हैं जिनमें एक यह भी है कि अविवाहित और परिवार त्यागी व्यक्ति आखिर किस लिए भ्रष्टाचार करेंगे। अथवा देश में पहली बार हिन्दू धर्म की विजय पताका फहराने वाला सशक्त नेता सत्ता में है,उसका विरोध किया तो आजीवन बहुसंख्यक होने के बावजूद अल्पसंख्यक की भांति रहना होगा। नोट बंदी और डिजिटल इकॉनॉमी आम नागरिक के लिए भ्रष्टाचार के अवसर कम करने के उपाय हैं किंतु नॉन परफार्मिंग एसेट्स की रीस्ट्रक्चरिंग तो वह अनूठी सूझ है जो कॉर्पोरेट्स की सहूलियत के लिए गढ़ी गई है।

गाँधी और हिन्दुत्व-1

गाँधी का जन्म हिंदू धर्म में हुआ, उनके पुरे जीवन में अधिकतर सिधान्तों की उत्पति हिंदुत्व से हुआ. साधारण हिंदू कि तरह वे सारे धर्मों को समान रूप से मानते थे, और सारे प्रयासों जो उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए कोशिश किए जा रहे थे उसे अस्वीकार किया.

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अर्थ

शाब्दिक तौर पर राष्ट्रवाद एक आधुनिक ‘पद’ है। ऐसा माना जाता है कि आधुनिक राष्ट्र-राज्य की अवधारणा फ्रांस की क्रांति (1789) के बाद विकसित हुई। सामाजिक विकास या राजनैतिक सिध्दांत के तौर पर राष्ट्रवाद की संकल्पना…

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद

भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम समुन्नत संस्कृतियों में से एक है। इसकी सुदीर्घ परंपरा में अनेक मनीषी विद्वानों, मंत्र द्रष्टा ऋषियों तथा तत्ववेत्ता मुनियों के..