विविधा उरी आतंकी हमला अलगाववादियों और पाकिस्तान की शह पर September 19, 2016 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment पिछले दो महीनों से अलगाववादियों के उग्र प्रदर्शनों से जूझ रहे जम्मू कश्मीर में बारामूला के उरी सेक्टर में 18 सितम्बर की सुबह तड़के सेना के इनफैंट्री बटालियन कैंप पर बड़ा आतंकी हमला होना हिंदुस्तान के लिए चिंता कि बात है। इस हमले में हमारे 17 बहादुर जवान शहीद हो गए और कई घायल हो […] Read more » Featured Uri Attack उरी आतंकी हमला उरी आतंकी हमला पाकिस्तान की शह पर
पर्यावरण विविधा संस्कृति मंत्रालय का स्वच्छ भारत अभियान: 16-30 सितंबर 2016 September 18, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 1 Comment on संस्कृति मंत्रालय का स्वच्छ भारत अभियान: 16-30 सितंबर 2016 डा. राधेश्याम द्विवेदी महात्मा गांधी ने अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था। उन्होंने “स्वच्छ भारत” का सपना देखा था जिसके लिए वह चाहते थे कि भारत के सभी नागरिक एक साथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए कार्य करें। महात्मा गांधी […] Read more » Featured स्वच्छ भारत अभियान
राजनीति व्यंग्य ऑपरेशन झाड़ूमार September 18, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment जीभ की लम्बाई, चौड़ाई या मोटाई के बारे में तो हमने अधिक बातें नहीं सुनीं, पर उसकी चंचलता के किस्से जरूर प्रसिद्ध हैं। कहते हैं एक बार दांतों ने हंसी-मजाक में जीभ को काट लिया। जीभ ने कुछ गुस्सा दिखाया; पर वह ठहरी कोमल और अकेली, जबकि दांत थे कठोर और पूरे बत्तीस। उसके गुस्से […] Read more » Featured ऑपरेशन झाड़ूमार
राजनीति मुलायम कुनबे के टूटने की बारी September 17, 2016 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव राजनीति और व्यापार में कुनबा किसी का रहा हो, वह एक दिन टूटता ही है। मुलायम सिंह कुनबे में फूटे असंतोष पर भले ही तत्काल विराम लग गया हो, लेकिन यह तय है कि इस कुनबे की चूलें भीतर से हिल चुकी हैं, जो कुनबे के लिए अब स्थाई खतरा बन गई हैं। […] Read more » Featured मुलायम कुनबे के टूटने की बारी
शख्सियत समाज राष्ट्रवादी विचारधारा के जनक अशोक सिंघल September 17, 2016 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment 17 सितम्बर विशेष:- मृत्युंजय दीक्षित राष्ट्रवादी विचारधारा के जनक व बहुसंख्यक हिंदू समाज में राममंदिर आंदोलन के माध्यम से जागरूकता उत्पन्न करने वाले विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक अशोक सिंधल ने बहुसंख्यक हिंदू समाज के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। यह अशोक जी के व्यक्तित्व व उनके ओजस्वीपूर्ण भाषणों का ही परिणाम था कि आज […] Read more » Featured अशोक सिंघल राष्ट्रवादी विचारधारा राष्ट्रवादी विचारधारा के जनक
विविधा स्वास्थ्य-योग वायरल फीवर बचाव ही उपचार September 17, 2016 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | Leave a Comment डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ इन दिनों देशभर में वायरल फीवर/बुखार का प्रकोप व्याप्त है। जिसके लक्षण सामान्यत: निम्न हैं :— रोग के सम्भावित लक्षण : थकान, मांसपेशियों या बदन में दर्द, गले में दर्द, सर दर्द, जोड़ो में दर्द, ग्रस्नी/गलकोष (pharynx) में सूजन, आँखो में लाली और जलन का अनुभव, तेज बुखार, सर्दी, खाँसी, दस्त […] Read more » Featured protection from viral fever वायरल फीवर
राजनीति व्यंग्य साहित्य क्यों भई चाचा, हां भतीजा September 17, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on क्यों भई चाचा, हां भतीजा बचपन में स्कूल से भागकर एक फिल्म देखी थी ‘चाचा-भतीजा।’ उसमें एक गीत था, ‘‘बुरे काम का बुरा नतीजा, क्यों भई चाचा.., हां भतीजा।’’ फिल्म के साथ यह गाना भी उन दिनों खूब लोकप्रिय हुआ था। आजकल भी ये गाना उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में जूतों की ताल पर खूब बज रहा है। इस […] Read more » Akhilesh yadav Featured Shivpal Yadav चाचा भतीजा शिवपाल
शख्सियत समाज अग्र समाज के जन्मदाता, सेवा व समरसता के पुरोधा – महाराज अग्रसेन September 17, 2016 by विनोद बंसल | Leave a Comment विनोद बंसल वैश्य अग्रवाल परम्परा के पितृ पुरुष महाराज अग्रसेन कलयुग के प्रथम नरेश थे। महाराजा परिक्षित का राज्याभिषेक उनके पश्चात ही हुआ। ईशा से 3102 वर्ष पूर्व यानि आज से लगभग 5118 वर्ष पूर्व कुरुक्षेत्र में जब महा भारत का समर आरम्भ हुआ उस समय बालक अग्रसेन किशोरावस्था में थे। यानि उनका जन्म आज […] Read more » Featured अग्र समाज के जन्मदाता महाराज अग्रसेन समरसता के पुरोधा सेवा
समाज कब तक दाना मांझी बहरीन के शाह या कैमरे के लैन्सों की बाट जोहेंगे September 17, 2016 / September 17, 2016 by अशोक त्रिवेदी | Leave a Comment सामाजिकता कितनी उथली होती जा रही है। हमारा सामाजिक सरोकार कितना सीमित होता जा रहा है। यह असंवेदनशीलता की पराकाष्ठ नहीं तो क्या है। आज भी देश में कितने दाना मांझी व्यवस्था, गरीबी, तिरस्कार तथा असंवेदनशीलता की लाश अपने कन्धों पर उठाये घूम रहे होंगे, इस इन्तजार में कि कोई कैमरा उनके जीवन के इन […] Read more » Featured कैमरे के लैन्सों की बाट जोहेंगे दाना माझी बहरीन के शाह
विविधा मोदी का नहीं, गरीबों का जन्मदिन September 16, 2016 / September 17, 2016 by प्रभात झा | 1 Comment on मोदी का नहीं, गरीबों का जन्मदिन भारत में नरेन्द्र मोदी के पूर्व जितने प्रधानमंत्री हुए थे, उनका जन्म आजादी के पहले हुआ था। नरेन्द्र मोदी भारत की आजादी के बाद पैदा होने वाले पहले प्रधानमंत्री बने। वे नयी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं। आजादी के बाद जितने लोग पैदा हुए हैं, वे उन्हें सहज अपना प्रतिनिधि मानते हैं। देश में अब तक […] Read more » birthday of Narendra Modi Featured narendra modi birthday गरीबों का जन्मदिन नरेन्द्र मोदी मोदी का जन्मदिन
विविधा सिंधु नदी संधि: नेहरू ने पाक को सारा पानी लुटा दिया September 16, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 4 Comments on सिंधु नदी संधि: नेहरू ने पाक को सारा पानी लुटा दिया डा. राधेश्याम द्विवेदी इंटरनैशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन ऐंड डेवलपमेंट (अब विश्वबैंक) की मध्यस्थता में 19 सितंबर 1960 को कराची में ‘इंडस वॉटर ट्रीटी’ पर भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब ख़ान हस्ताक्षर किए। भारत पिछले 56 साल से सिधु वॉटर ट्रीटी यानी सिंधु जल संधि को ढो रहा है। आधुनिक […] Read more » Featured Sindhu Water treaty सिंधु जल संधि सिंधु जल संधि को निरस्त करने की प्रस्ताव
समाज भगवान तो छोड़िये क्या इंसान भी कहलाने लायक है यह ! September 16, 2016 / September 17, 2016 by डॉ नीलम महेन्द्रा | Leave a Comment “एक अच्छा चिकित्सक बीमारी का इलाज करता है , एक महान चिकित्सक बीमार का –विलियम ओसलर ।“ मध्यप्रदेश का एक शहर ग्वालियर , स्थान जे ए अस्पताल , एक गर्भवती महिला ज्योति 90% जली हुई हालत में रात 12 बजे अस्पताल में लाईं गईं , उनके साथ उनकी माँ और भाई भी जली हुई हालत में थे ।ज्योति और उसकी माँ को बर्न यूनिट में भर्ती कर लिया गया लेकिन उसके भाई सुनील को लगभग दो घंटे तक बाहर ही बैठा कर रखा ।उसके बाद जब सुनील का इलाज शुरू किया गया तब तक काफी देर हो चुकी थी और उन्होंने दम तोड़ दिया। जब घरवालों ने इस घटना के लिए समय पर इलाज न करने का आरोप डाक्टरों पर लगाया तो यह ‘ धरती के भगवान ‘ नाराज हो गए और 90% जली हुई गर्भवती ज्योति को बर्न यूनिट से बाहर निकाल दिया और वह इस स्थिति में करीब 5 घंटे खुले मैदान में पड़ रही। जब एक स्थानीय नेता बीच में आए तो इनका इलाज शुरू हुआ। इससे पहले डाक्टरों का कहना था कि ‘ तू ज्यादा जल गई है …..जिंदा नहीं बचेगी …..तेरा बच्चा भी पेट में मर गया है….. ‘ ( सौजन्य दैनिक भास्कर) क्या यही वह सपनों का भारत है जिसके लिए भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव हँसते हुए फाँसी पर झूल गए थे ? क्या इसी प्रकार के भारत का स्वप्न राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी ने देखा था ? क्या यह भारत विश्व गुरु बन पायेगा ? जिस डाँक्टर को हम ईश्वर का दर्जा देते हैं , जो डाँक्टर अपनी डिग्री लेने से पूर्व मानवता की सेवा करने की शपथ लेते हैं , जिनके पास न सिर्फ मरीज अपितु उनके परिजन भी एक विश्वास एक आस लेकर आते हैं उनका इस प्रकार का अमानवीय व्यवहार किस श्रेणी में आता है ? क्यों आज चिकित्सा क्षेत्र सेवा न होकर व्यवसाय बन गया है ? आबादी के हिसाब से दुनिया के दूसरे बड़े देश भारत में न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाएं दयनीय स्थिति में हैं बल्कि जिन हाथों में देश के बीमार आम आदमी का स्वास्थ्य है उनकी स्थिति उससे भी अधिक चिंताजनक है । यह बात सही है कि कुछ डाँक्टरों के शर्मनाक व्यवहार के कारण सम्पूर्ण डाँक्टरी पेशे को कटघड़े में खड़ा नहीं किया जाना चाहिए किन्तु यह भी सत्य है कि मुट्ठीभर समर्पित डाँक्टरों के पीछे इन अनैतिक आचरण करने वाले डाँक्टरों को छिपाया भी नहीं जा सकता। बात अनैतिक एवं अमानवीय आचरण तक सीमित नहीं है । बात यह है कि आज मानवीय संवेदनाओं का किस हद तक ह्रास हो चुका है ! जिस डाँक्टर को मरीज की आखिरी सांस तक उसकी जीवन की जंग जीतने में मरीज का साथ देना चाहिए वही उसे मरने के लिए छोड़ देता है ! उसकी अन्तरात्मा उसे धिक्कारती नहीं है , किसी कार्यवाही का उसे डर नहीं है । एक इंसान की जान की कोई कीमत नहीं है ? क्यों आज़ादी के 70 वर्षों बाद भी आज भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का एक मजबूत ढांचा तैयार नहीं हो पाया ? क्यों आज तक हम एक विकासशील देश हैं ? क्यों हमारे देश का आम आदमी आज तक मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे रोगों से मर रहा है और वो भी देश की राजधानी में ! जब श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों ने इन पर विजय प्राप्त कर ली है तो भारत क्यों आज तक एक मच्छर के आगे घुटने टेकने पर विवश है ? अगर प्रति हजार लोगों पर अस्पतालों में बेड की उपलब्धता की बात करें तो ब्राजील जैसे विकासशील देश में यह आंकड़ा 2.3 है , श्रीलंका में 3.6 है ,चीन में 3.8 है जबकि भारत में यह 0.7 है।सबसे अधिक त्रासदी यह है कि ग्रामीण आबादी को बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं के लिए न्यूनतम 8 कि . मी . की यात्रा करनी पड़ती है। भारत सकल राष्ट्रीय आय की दृष्टि से विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है लेकिन जब बात स्वास्थ्य सेवाओं की आती है इसका बुनियादी ढांचा कई विकासशील देशों से भी पीछे है।अमेरिका जहाँ अपने सकल घरेलू उत्पाद (जी डी पी ) का 17% स्वास्थ्य पर खर्च करता है वहीं भारत में यह आंकड़ा महज 1% है ।अगर अन्य विकासशील देशों से तुलना की जाये तो बांग्लादेश 1.6% श्रीलंका 1.8% और नेपाल 1.5% खर्च करता है तो हम स्वयं अपनी चिकित्सा सेवा की गुणवत्ता का अंदाजा लगा सकते हैं। भारत एक ऐसा देश है जिसने अपने सार्वजनिक स्वास्थ्य का तेजी से निजिकरण किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार प्रति 1000 आबादी पर एक डाक्टर होना चाहिए लेकिन भारत इस अनुपात को हासिल करने की दिशा में भी बहुत पीछे है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार सर्जरी , स्त्री रोग , और शिशु रोग जैसे चिकित्सा के बुनियादी क्षेत्रों में 50% डाक्टरों की कमी है। शायद इसीलिए केंद्र सरकार ने अगस्त 2015 में यह फैसला लिया था कि वह विदेशों में पढ़ाई करने वाले डाक्टरों को ‘ नो ओब्लिगेशन टू रिटर्न टू इंडिया ‘ अर्थात् एनओआरआई सर्टिफ़िकेट जारी नहीं करेगी जिससे वे हमेशा विदेशों में रह सकते थे। चिकित्सा और शिक्षा किसी भी देश की बुनियादी जरूरतें हैं और वह हमारे देश में सरकारी अस्पतालों एवं स्कूलों में मुफ्त भी हैं लेकिन दोनों की ही स्थिति दयनीय है। सरकारी अस्पतालों में डाक्टर मिलते नहीं हैं और मिल जांए तो भी ठीक से देखते नहीं हैं अगर आपको स्वयं को ठीक से दिखवाना है तो या तो किसी बड़े आदमी से पहचान निकलवाइए या फिर पैसा खर्च करके प्राइवेट में दिखवाइए । आज आए दिन अस्पतालों में कभी किडनी रैकेट तो कभी खून बेचने का रैकेट या फिर बच्चे चोरी करने का रैकेट अथवा भ्रूण लिंग परीक्षण और फिर कन्या भ्रूण हत्या इस प्रकार के कार्य किए जाते हैं। ऐसा नहीं है कि सरकार ने कानून नहीं बनाए फिर ऐसी क्या बात है कि न तो उनका पालन होता है और न ही कोई डर है। क्यों सरकारी अस्पतालों की हालत आज ऐसी है कि बीमारी की स्थिति में एक मध्यम वर्गीय परिवार सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के बजाय प्राइवेट अस्पताल का महंगा इलाज कराने के लिए मजबूर है । एक आम भारतीय की कमाई का एक मोटा हिस्सा स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होता है। आजादी के इतने सालों बाद भी हमारी सरकार अपने देश के हर नागरिक के स्वास्थ्य के प्रति असंवेदनशील है। जिस आम आदमी की आधी से भी अधिक कमाई और उसकी पूरी जिंदगी अपनी बुनियादी आवश्यकताओं के लिए संघर्ष करते निकल जाती हो उससे आप क्या अपेक्षा कर सकते हैं। जिन सुविधाओं और सुरक्षा के नाम पर उससे टैक्स वसूला जाता है उसका उपयोग न तो उसके जीवन स्तर को सुधारने के लिए हो रहा हो और न ही देश की उन्नति में , जिस आम आदमी की इस देश से बुनियादी अपेक्षाएँ पूरी न हो रही हों वह आम आदमी इस देश की अपेक्षाएँ कैसे पूरी कर पाएगा? अगर इस देश और इसके आम आदमी की दशा को सुधारना है तो राष्ट्रीय इन्श्योरेन्स मिशन को लागू करने की दिशा में कड़े और ठोस कदम उठाने होंगे। डाँ नीलम महेंद्र Read more » Featured irresponsible behaviour of doctors अनैतिक एवं अमानवीय आचरण कुछ डाँक्टरों के चिकित्सक शर्मनाक व्यवहार