आर. सिंह
आज कैकेई बहुत प्रसन्न थी.महाराज दशरथ ने उसे अपने साथ युद्ध में जाने की अनुमति दे दी थी.
कैकेई भी अजीब नारी थी.कैकेय नरेश की वह लाडली शैशवाश्था से अस्त्र शस्त्रों से खेलने की अभ्यस्त हो गयी थी. ऐसे भी राजा की लाडली सुपुत्री होने के कारण उसे .गृह कार्य ...
आज कैकेई बहुत प्रसन्न थी।महाराज दशरथ ने उसे अपने साथ युद्ध में जाने की अनुमति दे दी थी।
कैकेई भीअजीब नारी थी।कैकेय नरेश की वह लाडली शैशवस्था से अस्त्र शस्त्रों से खेलने की अभ्यस्त हो गयी थी। ऐसे भी राजा की लाडली सुपुत्री होने के कारण उसे ।गृह कार्य सीखने की ...
रामकृष्ण
प्रदेश लोक संगठन (ज़ेड) के उपाध्यक्ष सुदामा पांडे के संबंध में यह जगज़ाहिर था कि उनका सम्पूर्ण परिवार ही नेताओं का है. प्रदेश के आधे से अधिक नेता या तो उनके संबंधी थे, या चेले. स्वयं घर में बड़ा लड़का रमेश देश के एक बहुत बड़े नेता का राजनीतिक सचिव ...
आर. सिंह
वह अचानक ही यहाँ मिल गयी थी. मैं अपने मित्र के साथ छुट्टियाँ बिताने सियाटल आया हुआ था मेरा मित्र सपत्निक यहाँ रहता था . मुझे अमेरिका आये हुए अधिक दिन नहीं हुए थे. पर मैं अमेरिका आने का प्रयत्न तो बहुत दिनों से कर रहा था.मेरा अमेरिका आने ...
ये घोड़ों के टापों की आवाज ? ये हलचल सी और उसके साथ उठती हुई भयानक चीखें? ये गिरती हुई इमारत और उड़ती हुई धूल? ये सब आप क्या कह रहे हैं? मेरी समझ में तो कुछ भी नही आ रहा है?
शाम का धुंधलका अभी पूरी तरह फैला नहीं था, ...
राजीव गुप्ता
आज ऑफिस जाना कैंसिल....कितनी अच्छी बारिश हो रही है ....है न गीत ? नारायण ने अपनी पत्नी कम दोस्त ज्यादा , अर्धांग्नी गीत से बरामदे में लगे झूले पर झूलते हुए चाय की चुस्की के साथ पूछा ( सभी पात्र और नाम काल्पनिक हैं ) ! सही कह रहे हो....चलो आज मै भी छुट्टी मार लेती हूँ ...
अर्पित बंसल
दिन भर के अथक परिश्रम व बाबुओं की आवाज पर भागदौड करने के बाद जैसे ही ननकू ने अपनी साइकिल उठाई पीछे से आती एक आवाज ने उसके कदम रोक दिये !
"अरे ननकू जरा रुकना", कार्यालय के सबसे बड़े अधिकारी वर्मा जी उसे अपनी मृदु आवाज मे रुकने का ...
गंगानन्द झा
बहुत दिन हुए, दूर के एक देश से होकर कुछ वीर सैनिक अपने अपने घोडों पर सवार होकर चले जा रहे थे । उनकी राह एक घने जंगल से होकर थी, जहाँ उलझी लताएँ काफी घनी और मजबूत हुआ करती थी ; ये इस राह पर भटक गए लोगों ...
गंगानन्द झा
(सैयद अलावल, सतरहवी शताब्दी के बंगाल का महान कवि, की कविता,जिसकी नाव पुर्तगाली लुटेरो और तूफान का सामना करती हुई अराकान पँहुची थी।)
लाल और काली रात ; लाल और काली रात में एक हरी नाव हिलती, डोलती, तूफान में फॅंसी,चकित,डरी हुई अरकान के तट की ओर बढ़ रही थी।
लेकिन ...
इस इबारत की पहली कहानी
धृतराष्ट्र के ’कृष्ण’ घिर गए है, जनता पार्टी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने २१ सितम्बर २०११ को सुप्रीम कोर्ट में एक पत्र दिखाया जो २५ मार्च, २०११ को प्रणब दा के वित्त मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखा था . उसमे लिखा था कि अगर पूर्व वित्तमंत्री ...
देव को बचपन से हीं पुस्तकें पढने का बहुत शौक था.अब तो उसे यह भी याद नहीं है कि कौन कौन सी पुस्तकें पढी उसने उन दिनों.आज वह सोचता है कि न जाने कब और कैसे चाट पडी उन पुस्तकों की. पुस्तकों की चाट ने उसके जीवन में नाटकीयता का ...
आर. सिंह
"चा ऽ चा ऽ".यह आवाज कानों में पडते हीं मैं थोडा ठीठका.फिर सोचा यह आवाज यहाँ कहाँ से आ सकती है?यह तो मेरे गाँव,मेरे इलाके की आवाज थी और मैं तो गुजर रहा था,कोलकाता में चौरंगी से.
आवाज फिर कानों में टकराई,"चा ऽ चा ऽ".
वही खींची हुई आवाज."हम आप हीं ...
आर. सिंह
इस कहानी के तीन मुख्य पात्र हैं.डा.(मिस) मारग्रेट,श्रीमती शीला सिंह और गौतम सिंह.श्रीमती शीला सिंह गौतम सिंह की पत्नी नहीं थी.वह गौतम सिंह की साली थी,यानि उनके पत्नी की छोटी बहन.शीला सिंह का विवाह जनार्दन सिंह के साथ हुआ था,जो मेडिकल कालेज का अंतिम वर्ष का छात्र था.गौतम सिंह ...
आर. सिंह
मार्क्स ने कहा था, "चर्च का पुजारी जानता है कि ईश्वर नहीं है, और अगर है भी तो चर्च में तो कभी नहीं आयेगा."
मोहन ने यह पढा था और यह बात घर कर गयी थी उसके दिल में.
वह था भी कुछ असाधारण सा.बचपन से ही अत्यंत तीव्र बुद्धि वाला ...
महेश दत्त शर्मा
कुछ वर्ष पूर्व तक आजीविका के लिए मैं ऑटो चलाया करता था। मैं अकसर रात्रि की शिफ्ट में सड़क पर निकलता था। दिन में एक अखबार में काम करता था।
जनवरी की सर्द रातें थीं। दो बजे एक सवारी को एयरपोर्ट पर ड्रॉप करके मैं धौला कुआँ (दिल्ली) के ...
आर. सिंह
अमर थोड़ी देर पहले ऑफिस से लौटा था और चाय पीकर निकल पड़ा था यों ही सड़क नापने. चलते-चलते वह सोच भी रहा था कि क्या अजीब मूडी इंसान है वह भी. यह भी पता नहीं क्या करना है? कहाँ जाना है? पर सड़क नापे जा रहे हैं.
सीधी सादी ...
राजनारायण बोहरे
वे फिर आ गये हैं।
आज हर जगह यही सुनने को मिल रहा है। चारों घरों में यही चर्चा हैं। भीतर पहुंचते ही घर का कोई सदस्य फुसफुसाते हुये यह सूचना देता है और चुप हो जाता है। सूचना देने वाले के चेहरे पर दहशत के भाव झांकते हैं ...
आर. सिंह
राज ने आज फिर वह स्वप्न देखा. वही मासूम चेहरा, वही बड़ी-बड़ी आँखें और उन झील जैसी आँखों में गहरी उदासी. आज भी राज को लग रहा था कि वह लडकी उससे कुछ कहना चाहती थी, पर न जाने क्यों उसके होठ केवल फड़फड़ा कर रह जाते थे? उसके बाद ...
गंगानन्द झा
श्री विक्रमादित्य झा और प्रो. जीवनलाल मिश्र मिथिला के निम्न-मध्यवर्गीय पृष्ठभूमि से थे, अपने अपने परिवारों के पहली पीढ़ी तथा तथा अभी तक के एकमात्र सदस्य, जो परम्परागत पृष्ठभूमि से उभड़कर आधुनिकता के परिवेश में जगह बनाने के अवसर के लाभ ले रहे थे। श्री विक्रमादित्य झा ...
”गुलाबी सपनों का शहर जयपुर और इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगाते यहाँ के शॉपिंग मॉल्स,शाम गहराते ही जहाँ यूँ लगता है मानो इसकी भव्यता देखने को ही सूरज दुसरे छोर पर जा छुपा है.हाथ में हाथ डाले जोड़े ,अपनी गुफ्तगू में मशगूल तमाम युवक युवतियां ,खरीददारी करने आये लोगों ...
सुधी लेखकों से निवदेन है अपनी रचनाएं यूनिकोड (मंगल) फोंट में भेजें और साथ ही संबंधित तस्वीर भी हमें भेजेंगे तो उसे प्रकाशित करने में सुविधा होगी।
लेखों के त्वरित प्रकाशन के लिए हमें आप SMS के जरिए तत्काल सूचना दे सकते हैं : 09868964804 (sanjeev.sinha78@gmail.com)
लोकतांत्रिक विमर्शों का मंच
प्रवक्ता डॉट कॉम भारतीय परंपरा की जान 'शास्त्रार्थ' का आधुनिक स्वरूप है, जहां विभिन्न विचारधाराओं के लोग एक ही मंच पर बेहतर लोकतांत्रिक समाज के लिए विचार-विमर्श करते हैं।