कविता मैं तो तेरे पास हूँ November 3, 2023 / November 3, 2023 | Leave a Comment मैं तो तेरे पास हूँ अन्तर्मन के आंखे खोल वंदे मैं तो तेरे पास हूँ कर्म में धर्म में भक्ति में शक्ति में राग में रंग में हरदम बैठा मैं तेरे साथ हूँ । सरिता में सिंधु में धरा में गगन में अगन में पवन में करता मैं ही वास हूँ ॥ सृष्टि में वंदनीय […] Read more » I am with you
कविता निजत्व की ओर November 2, 2023 / November 2, 2023 | Leave a Comment मेरा नगर शाश्वत काल से अत्यन्त रमणीक और सुन्दर रहा है और उसका महाशून्य कार आकाश शाश्वत निर्मल असीम नीलिमा लिये रहा है। न जाने कहां से मॅडराते घने काले बादलों ने मेरे नगर के सौन्दर्य को निगल लिया है। मैं दूसरे नगर में गया हूँ तब मेरे नगर में ये बादल शुभ्र रहे थे […] Read more » निजत्व की ओर
कविता कहाँ गये पखेरू, वीरान पेड़ रोते November 2, 2023 / November 2, 2023 | Leave a Comment आज भी दरवाजा खोलते ही, मुझे अपने घर से नजर आता है नीम का पेड़, जो देवी की मडिया से सटकर खड़ा है। और कुछ दूरी पर एक विशाल इमली का पेड़ हुआ करता था जिसे चंद स्वार्थियों ने जड़ से काटकर जमीन पर कब्जा कर विशाल भवन खड़ा किया है। घर के पिछवाड़े की […] Read more » Where have the birds gone
कविता आ जाओ शरण धूनीश्वर की October 27, 2023 / October 27, 2023 | Leave a Comment ए दिल, तू पुकार धूनीधर को,तेरी टेर सुनेंगे कभी न कभी।वे दीनदयाल हरिहर हैदिन तेरे फिरेंगे कभी न कभी ।हे मोहन मधुर प्रभाधारी,जब देखें नजर परम प्यारी।बस धन्यं बने तू उसी क्षण में,तेरा दर्द हरेंगे कभी न कभी।दर पर नित फेरी लगाता जाअपना दुख दर्द सुनाता जा।जब मौज में आयेंगे मेरे प्रभु,तब पूछ ही लेंगे […] Read more »
कविता प्राणों का हम अर्द्ध चढ़ायें October 27, 2023 / October 27, 2023 | Leave a Comment भोर भये रेवा तीरे, पावस पवन श्रृंगार किये। धन्य हुई है मेरी नगरी, जन-मानस सत्कार किये।। हर दिन यहां पर प्रफुल्लित आये, पर्वो की सौगात लिये। रोज नहाये रेवा जल में, हम खुशियों सा मधुमास लिये।। जहं-तहं मन्दिर बने हुए हैं, रेवा तट का उल्लास लिये। नित मंत्र जपे ओैर माला फेरे, भीड़ भक्तों की […] Read more » प्राणों का हम अर्द्ध चढ़ायें
लेख शरदपूर्णिमा पर्व बने सार्वजनिक महोत्सव October 26, 2023 / October 26, 2023 | Leave a Comment शरद पूर्णिमा अर्थात महासरस्वती व कार्तिक अमावस्या अर्थात महाकाली के बीच की कड़ी हर मनुष्य को एक दूसरे से जोड़ने वाली कड़ी है। जैसे शरद का सौन्दर्य श्री का सौन्दर्य है, राधा का सौन्दर्य है, सीता का सौन्दर्य है, शारदा का सौन्दर्य है, वही अलौकिक सौन्दर्य नवदुर्गा की भूक्ति पूजा अर्चना का भी सौन्दर्य बन […] Read more »
व्यंग्य गपोड़शंख का करामाती जूता October 20, 2023 / October 20, 2023 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव थाने में दरोगा से मिलते ही गपोड़शंख फूटे की तरह फूटने लगा, हुजूर गजब हो गया मेरा एक जूता बिना मुझसे कहे कहीं भाग गया है! जूता भाग गया, क्या गजब ढाते हो, अभी तक लड़के लड़की भागते थे, जूता कैसे भागेगा, दरोगा ने डपट लगाई। गपोडशंख बोला-पता नही, हुजूर, पर ऐसा […] Read more »
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म लेख वर्त-त्यौहार देवी साधना में त्रुटियॉ होती है अमंगलकारी October 18, 2023 / October 18, 2023 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव नवरात्रि में नवदुर्गा के विभिन्न स्वरूपों को 9 दिनों के लिए हरेक नगर, गाँव, मोहल्ले, कसवे आदि हजारो स्थानों पर प्राणप्रतिष्ठित करने का उत्साह दिखाई देता है, उसे हम सृष्टि का संचालन करने वाली जगन्माता के प्रति अपनी भक्ति का स्वरूप ओर माता के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शन के साथ अभिवांछित […] Read more »
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म वर्त-त्यौहार मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा और विसर्जन का उत्साह October 16, 2023 / October 16, 2023 | Leave a Comment नवरात्रि पर विशेष ‘ आत्माराम यादव पीव आज के युग में पूजा की प्राणवस्तु अर्थात आध्यात्म साधना तिरोहित होने लगी है और जिन देवी-देवताओं की सत्यप्रतिष्ठा, प्राणप्रतिष्ठा एवं आनन्दप्रतिष्ठा होना चाहिये हम सत्य और आनन्द की प्रतिष्ठा किये बिना सिर्फ मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा कर साधना करते है वह बाहरी […] Read more » durga pooja
कविता जाने क्यों मुझे देवता बनाते है? October 11, 2023 / October 11, 2023 | Leave a Comment जाने क्यों मुझे देवता बनाते है?मैं उन्हें कैसे समझाऊ कि मैं कोई देवता नहीं हॅू एक सीधा-साधा इंसान हॅू जो इंसानियत से जीना चाहता हॅू।पर वे मानते ही नहीं मुझे देवता की तरह पूजे आते हैं, जाने क्यों मुझ इंसान को देवता बताते है?ये दुनिया बड़ी जालिम है जो हम जैसों के पीछे पडी हैकभी ढंग के इंसान तो न बन पाये पर ये देवता बनाने पर अड़ी है।किन्तु मैं देवता नहीं बनना चाहता एक इंसान बनना चाहता हॅू ?इनके लिये किसी को भी देवता बनाना कितना सरल है ये हर सीधे सादे इंसान को पहले पत्थर जड बनाते हैं।उजाडकर दुनिया उसकी ये उसे नीरस बनाते है।जिन्हें ये देवता बनाते है अक्सर वह इनके करीब होता है इनका अपना तो कम उनके अपनों का सपना होता है।दूसरों के सपनों को चुराकर ये अपनी हकीकत बनाते है।प्रेम को जीने वालों को निजी स्वार्थ सिद्धि हेतु ही पीड़ा का ताज पहनाकर बेबसी की माला पहनाते है।उनकी आँखों से जुदाई के आँसू बहाकर उनके हृदय में गर्मी का सैलाव लाते है।दो प्रेम करने वाले इंसानों को ये पहले बिछुडवाते है।प्रेम की लाश ढोने वाले हर इंसान को ये देवता बनाते है। आत्माराम यादव पीव Read more » जाने क्यों मुझे देवता बनाते है?
कविता नयनों से बात October 6, 2023 / October 6, 2023 | Leave a Comment तेरे मेरे सारे शब्द अब पडते हैं अधूरे हम नयनों से बात करें शब्द हो पूरे। प्रेम भरे शब्दों को हम कह-कह के ऊबे नयनों में नयन ड़ाल आज हम डूबे। सांसों से सॉस चले सहेलियों के साथ चले छेडती है तुमको मेरे प्यार की ये बोलियॉ। थिरकती पवन चले तेरे आँचल को तंग करे […] Read more »
कविता एक छात्र की जिज्ञासा ? October 4, 2023 / October 3, 2023 | Leave a Comment हे आजाद भारत के माता पिताओं क्या है हम ? हमें तुम बताओ ? भेजा है जबसे स्कूल में आपने दबाते है किताबों के बोझ हमें आप में । किकर्तव्यमूढ़ पंक्तिबद्ध प्रार्थनाएँ हम गाते है अनभिज्ञ है हम, कभी समझ नहीं पाते है । स्कूलों में जब भी , हम अव्वल नंबर आते है आदर्श और उसूलों का, तब मेडल हम पाते है […] Read more » एक छात्र की जिज्ञासा ?