व्यंग्य जब बाढ़ में बहा गधा नटवरलाल हाऊस September 4, 2023 / September 4, 2023 | Leave a Comment नगर सेठ के पास एक नटवरलाल नाम का झवरू जवान जोशीला गधा था, जिसकी गेंडें जैसी मोटी खाल थी। नटवरलाल देश-प्रदेश के मेलों के अलावा अन्य जगहों पर लगने वाले मेलों में आकर्षक का केन्द्र होता और लोगों का मनोरंजन कर रोज तीन चार सौ शो करके प्रसिद्धि के सातवे आसमान पर था, जिसकी चर्चा […] Read more » When the donkey washed away in the flood Natwarlal House
कला-संस्कृति लेख समाज तिलक यज्ञोपवीत और शिखा का माहात्म्य September 1, 2023 / September 1, 2023 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव सनातन परम्परा में हिन्दू देवी-देवताओं के ललाट पर धारित विभिन्न स्वरूप के तिलक हमें अपनी ओर आकर्षित कर एक सुखद अनुभूति प्रदान कर स्वयं तिलक धारण करने की सद्प्रेरणा प्रदान करता है परिणामस्वरूप हम उनकी पूजा-अर्चना, आराधना केu7 समय तिलक धारण कर स्वयं को गौरवान्वित पाते है। तिलक की ही भॉति सिर […] Read more » Tilak Yajnopavit and the greatness of Shikha
कविता जीवन का अधूरापन August 25, 2023 / August 25, 2023 | Leave a Comment मुझे याद है प्रिय शादी के बाद तुमदूर-बहुत दूर थीमैं तुम्हारे वियोग मेंदो साल तकअकेला रहा हॅू।बड़ी शिद्दत केबाद तुम आयी थीतुम्हारे साथ रहतेतब दिशायें मुझेकाटती थी औरतुम अपनी धुन मेंमुझसे विलग थी।तुम्हारा पास होनाअक्सर मुझे बताताजैसे जमीन-आसमानगले मिलने को है।मैंने महसूस कियादिशायें दूर बहुत दूरअसीम तक पहुंच गई है।तुम मेरे साथ थीपर दूर इतनी […] Read more » जीवन का अधूरापन
कविता जपो पत्नी का ही नाम August 23, 2023 / August 23, 2023 | Leave a Comment परमपिता पर अगर हो, तुमको पूर्ण विश्वास परमेश्वरी पत्नी को मानिये, पूरी करती आस। नास्तिक बन बैठो रहो, न हो पत्नी पर विश्वास फल की आस न कीजिये, मिट जायेगा आवास।। प्राणप्रतिष्ठा पत्नी की करे, मंदिर हो जाये आवास भार पति का सदा हरे, पत्नी करे दुखों का नास।। अन्नपूर्णा बनकर घर में, अन्न धन्न […] Read more » जपो पत्नी का ही नाम
धर्म-अध्यात्म प्रसाद वितरण का महत्व और भावतत्व का विवेचन August 21, 2023 / August 21, 2023 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीवममतामयी माॅ वसुन्धरा जगत के सभी मनुष्यों, जल-थल के जीव-जन्तुओं, प्राणियों-वनस्पतियों सहित सभी के जीवन निर्वहन हेतु सबकी प्रकृति का भोज्य पदार्थ प्रदान कर जगत का पोषण करती आ रही है। माॅ वसुन्धरा की परम असीम अनुकम्पा के प्रति हमारा आग्रह निवेदित हो जाये और हम उस भोज्य पदार्थ को अनुग्रहभाव से ग्रहण […] Read more » Importance of Prasad distribution and interpretation of Bhavatattva
व्यंग्य आदमी के दिमाग में ताकाझॉकी August 21, 2023 / August 21, 2023 | Leave a Comment आदमी का दिमाग एक विशाल पुस्तकालय है, आजकल आदमी ने इस पुस्तकालय की पुस्तकों को देखना बंद कर दिया है। आदमी की इसी भूल के कारण इस पुस्तकालय अर्थात दिमाग में धूल जमना शुरू हो गयी, किन्तु मुझ जैसे कुछ लोग इस दिमाग के अन्दर झाँक कर किताबों में धूल नहीं लगने […] Read more »
व्यंग्य सूबे का मुखिया है मेरा साला ? August 16, 2023 / August 16, 2023 | Leave a Comment पत्रकार होने के नाते घटनाओं, चरित्रों और संकेतों के द्वारा व्यक्ति, समाज, व्यवस्था और राजनीति में विसंगतियों, विडम्बनाओं के बीच कुकुरमुत्तों की तरह उग आई मुखौटे बाजी की विकृत मानसिकता के मैं रोज ही दर्शन करता हॅू। राजनीति में चौकाने वाले नये प्रयोगों का युग चल रहा है । राजनीतिज्ञ कब जनता के मन के भावों […] Read more »
कविता आत्माराम कौन ? July 27, 2023 / July 27, 2023 | Leave a Comment खुद का मुख बखान करे, कैसी है खुद की करनी रीति-प्रीति से सनी हुई, भांति अनेक खुदी ने बरनी। खुद से ही सवाल है, खुद के ही जवाब खुद ने ही दे दिया, खुद परिचय लाजबाव। खुद ने पूछा कौन तुम, बताओ श्रीमान खुद ही ने खुद कहा, आत्माराम मेरा नाम।। नाम आत्माराम है, तो […] Read more »
व्यंग्य नारी है नर की खान ? June 7, 2023 / June 7, 2023 | Leave a Comment आत्माराम यादव पीवदुनियाभर के नरों को हाजिर-नाजिर मानकर मैं अपने दिमाग के कबूतरखाने में नारी ओर नर के पुरूषार्थ और प्रतिभा का लोहा मानते हुये प्रचलित कहावत ‘‘नारी निंदा न करों, नारी नर की खान‘‘, ‘‘नारी के बिना नर अधूरा है‘‘ आदि मान्यताओं के पीछे छिपे भावों का सच प्रगट करने जा रहा […] Read more » Is woman the mine of man?
व्यंग्य बरसात, नाले-नालियों और मेढ़कों की रिपोर्टिंग May 30, 2023 / May 30, 2023 | Leave a Comment व्यंग्य आत्माराम यादव पीवआकाश में चारों ओर से घने काले मेघ मॅडराते हुये रह-रहकर घमण्डी रिपोर्टरों की तरह गर्जाना कर कौंध रहे है और साॅय-साॅय करती हवा अपने थपेड़ों से बड़े पेड़ों को धराशायी करते हुये,गरीब कमजोर के घरों की छतों के साथ फुटवाल खेलती नजर आ रही है। एक खोजी-सनसनीखेज रिपोर्टर के नाते मुझे […] Read more » drains and frogs Reporting of rain
व्यंग्य कुत्ते हैं हम, इंसान नहीं ! May 21, 2023 / May 21, 2023 | Leave a Comment व्यंग्य आत्माराम यादव पीव बात पुरानी है, मैंने सुना एक विदेशी कुत्ता हवाईजहाज से भारत आया तो भारत के कुत्तों ने उसके सम्मान में अपनी-अपनी पूंछ हिलाकर स्वागत किया। भारत के कुत्ते हवाईजहाज से आये अपनी विरादरी के कुत्ते के ठाठ-बाठ देखकर अन्दर ही अन्दर ईष्र्या से भरे थे, पर भारतीय संस्कृति को खूब समझते […] Read more » not humans! We are dogs
कविता जीवन यात्रा May 20, 2023 / May 20, 2023 | Leave a Comment मैं एक दर्शक जीवन सपनों का सौपान । कहने को सच में जुटाया सारा सामान ॥ तिनकों से जोड़ा है कडवे झूठों को ओढ़ा है देते है सब सच होने का प्रमाण । टूटा है मेरा एक पल में सपना मैं भी रहा नही कभी खुद मैं अपना ॥ सागर में हरदम लहरे लेती हिलोरे […] Read more » जीवन यात्रा