बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

जब नींद नहीं आँखों में

बेवजह रात को जब भी मुझे नींद नहीं आती है करवटें बदल बदल कर रात गुज़र जाती है। चादर की हर सिलवट तब, कोई कहानी अपनी, यों ही कह जाती है। जब घर में आँगन होता था और नींद नहीं आती थी चँदा से बाते होती थीं, तारों को गिनने में वो रात गुज़र जाती थी। हल्की सी बयार का झोंका जब तन को छूकर जाता था, उसकी हल्की सी थपकी,…

नींद नैन में बस जाती है

  नींद हमे जब ना आती है चलती घड़ी रुक सी जाती है। कलम उठाकर लिखना चाहूँ भूली बीसरी याद आती है। कलम जब कभी रुक जाती है नींद कंहा फिर तब आती है। कोई कहानी मुकम्मल होकर जब काग़ज पे उतर आती है, नींद नैन में बस जाती है। शब्द कभी कहीं खो जाते हैं भाव रुलाने लग जाते हैं किसी पुराने गाने की लय पर कोई कविता जब बन जाती है। नींद हमें फिर आ जाती है।…

ज्वालामुखी

हर आदमी आज यहाँ, ज्वालामुखी बन चुका है। क्रोध कुंठा ईर्ष्या की आग भीतर ही भीतर सुलग रही है। कोई फटने को तैयार बैठा हैं, कोई आग को दबाये बैठा है, किसी के मन की भीतरी परत में, चिंगारियां लग चुकी हैं। कोई ज्वालामुखी सुप्त है, कोई कब फट पड़े कोई नहीं जानता। समाज की विद्रूपताओं का सामना करने वाले या उनको बदलने वाले अब नहीं रहे क्योंकि सब जल रहे हैं भीतर से और बाहर से. क्योंकि वो ज्वालामुखी बन चुके हैं। ज्वालामुखी का पूरा समूह फटता है ,…

हरसिंगार

हरसिंगार की  ख़ुशबू कितनी ही निराली हो चाहें रात खिले और सुबह झड़ गये बस इतनी ज़िन्दगानी है। जीवन छोटा सा हो या हो लम्बा, ये बात ज़रा बेमानी है, ख़ुशबू बिखेर कर चले गये या घुट घुट के जीलें चाहें जितना। जो देकर ही कुछ चले गये उनकी ही बनती कहानी है। प्राजक्ता कहलो या…

घोटाले…भक्ति वाले

भक्ति का सबसे बडा घोटाला अभी आँखो के सामने है एक व्यभिचारी की भक्ति में डूबी महिलायें लाठी लिये खड़ी हों पूरा शहर ठप्प पड़ा है, इस डर से कि इस कुकर्मी को  सज़ा मिले तो हिंसा हो उसके समर्थकों द्वारा।सरकारने इन्हे इक्ट्ठा होने ही क्यों दिया। सुच्चा डेरा के राम रहीम भी ग़लत कारणों के कारण समाचारों की सुर्ख़ियों…

जीवन की ताल

जीवन की हर ताल पे कोई , गीत नया होगा हँसते – गाते जी लेंगे जो , होगा सो होगा   नए राग में एक नयी धुन , हमने बनायी है उस धुन में जो शब्द भरे वो , सच्चा कवि होगा   भक्ति – भाव श्रृंगार हो चाहे , चाहे हो नवगीत साज़ नया , अंदाज़ नया हो , गीत,ग़ज़ल होगा   अलग रागिनी,अलग ताल हो,सुर लय की बंदिश गूँजेंगे  जब गीत सुरीले , रंग अलग होगा   वीणा बंसी और मृदंग की,संगत जब  होगी गीत सुरीला कानों मे,अमृत सा घु…