लेख हिंदी दिवस हिंदी के बिना हिन्दुस्तान अधूरा है September 14, 2023 / September 14, 2023 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment (14 सितंबर 2023 हिंदी दिवस पर विशेष आलेख) हिन्दी हमेशा से हिन्दुस्तान की पहचान रही है। कहा जाये तो हिन्दुस्तान एक देश है और इसकी सांस है हिन्दी, बिना सांस (हिंदी) के हिन्दुस्तान में निवास करना और यहां की संस्कृति को बनाये रखना मुश्किल है। इसलिये हिन्दुस्तान देश में हिन्दी की अपनी महत्वता है, जिसे हिन्दुस्तान देश से कभी नहीं मिटाया जा सकता। हिंदी हमेशा से ज्ञान और भाव की भाषा रही है, तभी दुनिया में बुध्दिमत्ता के मामले में हिन्दुस्तानियों का डंका पिटता रहा है। हिंदी सदा दुनियां में पे्रम के भाव से बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी शब्द है हमारी आवाज का हमारे बोलने का जो कि हिन्दुस्तान में बोली जाती है। आज देश में जितनी भी क्षेत्रीय भाषाएँ हैं, उन सबकी जननी हिंदी है। और हिंदी को जन्म देने वाली भाषा का नाम संस्कृत है। जो कि आज देश में सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से हिंदी माध्यम के स्कूलों में एक विषय के रूप में पढाई जाती है। आज देश के लिए इससे बडी विडम्बना क्या हो सकती है कि जिस भाषा को हम अपनी राष्ट्रीय भाषा कहते हैं, आज उसका हाल भी संस्कृत की तरह हो गया है। जिस तरफ देखो उस तरफ अंग्रेजी से हिंदी और समस्त भारतीय भाषाओं को दबाया जा रहा है। चाहे आज देश में इंटरमीडिएट के बाद जितने भी व्यावसायिक पाठयक्रम हैं, सब अंग्रेजी में पढाये जाते हैं। अगर देश की शिक्षा ही देश की राष्ट्रीय भाषा में नहीं है तो हिंदी जिसे हम अपनी राष्ट्रीय भाषा मानते है। जिसे हम एक दूसरे का दुख दर्द बांटने की कडी मानते है। उसका प्रसार कैसे हो पायेगा। कहा जाये तो हिन्दी बिना हिन्दुस्तान अधूरा है। देश की एकता और अखण्डता को बनाये रखनें में हिन्दी का अहम योगदान है। आज हिन्दी सिनेमा विश्व में एक अहम स्थान रखता है। बाॅलीवुड की पहचान भी हिन्दी से ही है। हिन्दी की वजह से ही बाॅलीवुड में हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। हिन्दी भाषा सिर्फ वार्तालाप और संचार का ही माध्यम नहीं है बल्कि यह देश में रोजगार के सृजन का भी माध्यम है। आज हिन्दी सिनेमा से लेकर हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं, समाचार-पत्रों, और सोशल मीडिया पर हिन्दी का बोलबाला है, जो कि देश में लाखों रोजगार पैदा करते हैं। आज इंटरनेट पर भीप करोड़ों लोग हिंदी का अनुसरण करते हैं, इसलिए आज हिन्दुस्तान में सोशल मीडिया (फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, गूगल प्लस) भी अपना रूपांतरण हिंदी में कर चुका है और करोड़ों लोग फेसबुक तय ट्विटर में अपने विचार हिंदी में साझा करते हैं। आज विदेशी वेबसाइटें भी अपना हिंदी संस्करण हिन्दुस्तान में प्रारंभ कर रहीं है क्योंकि उनको पता है कि हिन्दुस्तान में अगर उनको टिकना है तो हिंदी को बढ़ावा देना ही होगा। महात्मा गांधी हिन्दी भाषी नहीं थे लेकिन वे जानते थे कि हिन्दी ही देश की संपर्क भाषा बनने के लिए सर्वथा उपयुक्त है। उन्हीं की प्रेरणा से राजगोपालाचारी ने दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा का गठन किया था। देशभर में हिन्दी पढ़ना गौरव की बात मानी जाती थी। महात्मा गांधी जी ने 1916 में क्रिश्चियन एसोसिएशन आफ मद्रास की एक सभा में स्पष्ट रूप से कहा था कि धर्मान्तरण राष्ट्रान्तरण है। उन्होंने हरिजन में लिखा था ‘‘यदि मैं तानाशाह होता तो अंग्रेजी की पुस्तकों को समुद्र में फेंक देता और अंग्रेजी के अध्यापकों को बर्खास्त कर देता।’’ सच तो यह है कि ज़्यादातर भारतीय अंग्रेज़ी के मोहपाश में बुरी तरह से जकड़े हुए हैं। आज स्वाधीन भारत में अंग्रेज़ी में निजी पारिवारिक पत्र व्यवहार बढ़ता जा रहा है काफ़ी कुछ सरकारी व लगभग पूरा ग़ैर सरकारी काम अंग्रेज़ी में ही होता है, दुकानों वगैरह के बोर्ड अंग्रेज़ी में होते हैं, होटलों रेस्टारेंटों इत्यादि के मेनू अंग्रेज़ी में ही होते हैं। ज़्यादातर नियम कानून या अन्य काम की बातें, किताबें इत्यादि अंग्रेज़ी में ही होते हैं, उपकरणों या यंत्रों को प्रयोग करने की विधि अंग्रेज़ी में लिखी होती है, भले ही उसका प्रयोग किसी अंग्रेज़ी के ज्ञान से वंचित व्यक्ति को करना हो। अंग्रेज़ी भारतीय मानसिकता पर पूरी तरह से हावी हो गई है। हिंदी (या कोई और भारतीय भाषा) के नाम पर छलावे या ढोंग के सिवाय कुछ नहीं होता है। माना कि आज के युग में अंग्रेज़ी का ज्ञान ज़रूरी है, क्योकि अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। कई सारे देश अपनी युवा पीढ़ी को अंग्रेज़ी सिखा रहे हैं जिसमे एक भारत देश भी है पर इसका अर्थ ये नहीं है कि उन देशों में वहाँ की भाषाओं को ताक पर रख दिया गया है और ऐसा भी नहीं है कि अंग्रेज़ी का ज्ञान हमको दुनिया के विकसित देशों की श्रेणी में ले आया है। सिवाय सूचना प्रौद्योगिकी के हम किसी और क्षेत्र में आगे नहीं हैं और सूचना प्रौद्योगिकी की इस अंधी दौड़ की वजह से बाकी के प्रौद्योगिक क्षेत्रों का क्या हाल हो रहा है वो किसी से छुपा नहीं है। सारे विद्यार्थी प्रोग्रामर ही बनना चाहते हैं, किसी और क्षेत्र में कोई जाना ही नहीं चाहता है। क्या इसी को चहुँमुखी विकास कहते हैं? दुनिया के लगभग सारे मुख्य विकसित व विकासशील देशों में वहाँ का काम उनकी भाषाओं में ही होता है। यहाँ तक कि कई सारी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अंग्रेज़ी के अलावा और भाषाओं के ज्ञान को महत्व देती हैं। केवल हमारे यहाँ ही हमारी भाषाओं में काम करने को छोटा समझा जाता है। हिंदी भारत का मान है, कहा जाये तो हिन्दी के बिना हिन्दुस्तान की कल्पना करना निरर्थक है। आज हमारे देश में अंग्रेजी माध्यम के स्कूल कुकुरमुत्ते की तरह उग रहे हैं। बचपन में हम सुना करते थे कि सोवियत रूस में नियुक्त राजदूत विजय लक्ष्मी पंडित जो कि प्रधानमंत्री नेहरू की सगी बहन थीं, ने रूस के राजा स्टालिन को अपना पहचानपत्र अंग्रेजी में भेजा। उन्होंने स्वीकार करने से इंकार कर दिया और पूछा कि क्या भारत की अपनी कोई भाषा है या नहीं। उन्होंने फिर हिन्दी में परिचय पत्र भेजा तब उन्होंने मिलना स्वीकार किया। अंग्रेजी व्यापार की भाषा है जरूर लेकिन वह ज्ञान की भाषा नहीं। सबसे अधिक ज्ञान-विज्ञान तो संस्कृत में है जिसे भाषा का दर्जा दिया जाना महज औपचारिकता भर रह गया है। आज जरूरत है हमारी सरकार को हिंदी का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करना चाहिए। जैसे कि चीन अपनी भाषा को प्रोत्साहन दे रहा है। वैसे ही भारत देश को अपनी भाषा को प्रोत्साहन देना होगा। और जितने भी देश में सरकारी कामकाज होते है वो सब हिंदी में होने चाहिए। और हिंदी में उच्च स्तरीय शिक्षा के पाठयक्रम को क्रियान्वित करने की जरूरत है। सभी जानते हैं कि अंग्रेजी एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। मैं अपने विचार से कहना चाहूँगा की अग्रेजी सभी को सीखना चाहिए लेकिन उसे अपने ऊपर हमें कभी हावी नहीं होने देना है, अगर अंग्रेजी हमारी ऊपर हावी हो गयी तो हम अपनी भाषा और संस्कृति सब को नष्ट कर देंगे। इसलिए आज से ही सभी को हिंदी के लिए कोशिश जारी कर देनी चाहिए। अगर हमने शुरुआत नहीं की तो हमारी राजभाषा एक दिन संस्कृत की तरह प्रतीकात्मक हो जायेगी। जिसके जिम्मेदार और कोई नहीं हम लोग होंगे। अंग्रेजी भाषा की मानसिकता आज हम पर, खासकर हमारी युवा पीढ़ी पर इतनी हावी हो चुकी है कि हमारी अपनी भाषाओं की अस्मिता और भविष्य संकट में है। इसके लिए हमें प्रयास करने होंगे। और इसके लिए जरूरत है कि हमें अंग्रेजी को अपने दिलो-दिमाग पर राज करने से रोकना होगा, तभी हिंदी आगे बढ़ेगी और राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त की यह घोषणा साकार होगी – “है भव्य भारत ही हमारी मातृभूमि हरी-भरी हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा और लिपि है नागरी।” Read more » हिंदी के बिना हिन्दुस्तान अधूरा है
लेख हिंदी दिवस वैश्विक परिपेक्ष्य में हिन्दी September 14, 2023 / September 14, 2023 by नीतेश राय | Leave a Comment हिन्दी भाषा का इतिहास साढ़े तीन हजार वर्षों पुराना है ,लेकिन आज जिस हिन्दी भाषा को हम लिखते बोलते है ये केवल 121 वर्ष पुरानीं है |हिन्दी एक ऐसी भाषा है जो हजारों वर्षों बाद विकसित हुई और समय के साथ बदलती गई |इसके साथ जो लोग अपने को नही बदल पाए ,वे आज भी […] Read more » Article on hindi diwas Hindi Diwas
लेख हिंदी दिवस विश्व बाज़ार में भारत की प्रतिनिधि ‘हिन्दी’ September 13, 2023 / September 13, 2023 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment · डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल‘ मानक बदल रहे हैं, इमारतों का क़द बढ़ रहा है, सीमाएँ विस्तारित हो रही हैं, आदमी चाँद पर जा रहा है, भारत चाँद के दक्षिण ध्रुव पर पहुँच रहा है, विश्व की प्रगति इतरा रही है, जनसंख्या बढ़ रही है, भाषाओं का फ़लक बदल रहा है, इन सबके बावजूद किसी भाषा के विस्तारित होते […] Read more » विश्व बाज़ार में भारत की प्रतिनिधि हिन्दी
लेख हिंदी दिवस हिन्दी है भारत के मस्तिष्क का तिलक September 13, 2023 / September 13, 2023 by ललित गर्ग | Leave a Comment हिंदी दिवस, 14 सितबंर, 2023 पर विशेष– ललित गर्ग-राजभाषा कही जाने वाली हिंदी भाषा अपने ही देश में घोर उपेक्षा की शिकार है, बावजूद आज दुनिया में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन गई है। विश्व भाषा बनने की ओर हिन्दी के बढ़ते कदम भारत के लिये एक बड़ी उपलब्धि है। यूएई के ‘हम […] Read more » Hindi Diwas14 सितबंर हिंदी दिवस
राजनीति लेख हिंदी दिवस दक्षिणी राज्यों में भी सदा से स्वीकार्य रही है हिंदी September 13, 2023 / September 13, 2023 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment प्रवीण गुगनानीहिंदी का देश की मातृभाषा के स्थान पर आरूढ़ होना कोई एकाएक नहीं हुआ था. स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान ही समस्त देशभक्तों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों व सामान्य समाज ने औपनिवेशिक आचरण से मुक्ति पानें हेतु अंग्रेजी से मुक्ति और हिंदी को भारतीय भाषाओं की माँ का स्थान देनें के भाव को भारतीय भाषा विधान […] Read more » Hindi has always been acceptable even in southern states
कला-संस्कृति लेख हिंदी दिवस हिंदी हमारी सनातन संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक है September 12, 2023 / September 12, 2023 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है। दरअसल भारत में हिंदी को आधिकारिक दर्जा मिलने की खुशी में यह दिवस मनाया जाता है। जानकारी देना चाहूंगा कि हिन्दी को भारत की संविधान सभा ने 14 सितम्बर, 1949 को राजभाषा के रूप में अंगीकार किया था, यही कारण है कि भारतवर्ष में […] Read more » communicator and representative of our eternal culture and traditions. Hindi is the true carrier हिंदी हमारी सनातन संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक
लेख हिंदी दिवस क्या उत्तर प्रदेश एवं बिहार हिन्दी भाषी राज्य नहीं हैं? September 1, 2023 / September 1, 2023 by प्रोफेसर महावीर सरन जैन | Leave a Comment हिन्दी के प्रेमियों से मेरा यह अनुरोध है कि इस लेख का अध्ययन करने की अनुकंपा करें जिससे जो ताकतें हिन्दी को उसके अपने ही घर में तोड़ने का षड़यंत्र कर रहीं हैं, वे बेनकाब हो सकें। हिन्दी के घर के क्या अर्थ है। यह जानना जरूरी है। संसार की प्रत्येक भाषा का भाषा-क्षेत्र होता […] Read more » Are Uttar Pradesh and Bihar not Hindi speaking states?
लेख हिंदी दिवस हिंदी की बातें : हिन्दी की यादें September 1, 2023 / September 1, 2023 by डॉ० शिबन कृष्ण रैणा | Leave a Comment डा० शिबन कृष्ण रैणा देश की भाषा हमारे यहां भाषा का बवाल इसलिए है क्योंकि जितने प्रांत हैं,लगभग उतनी ही भाषाएं हैं।(हिंदी प्रदेशों को छोड़ कर।)अब सवाल यह है कि संपूर्ण देश की एक भाषा कौनसी हो? चूँकि हिंदी को देश के अधिकांश लोग समझ-बोल लेते हैं,इसलिए जब भी देश के लिए एक-भाषा का प्रश्न […] Read more » Hindi Diwas
लेख हिंदी दिवस हिन्दी से हिंग्लिश का सफर June 22, 2023 / June 22, 2023 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment Read more » Journey from Hindi to Hinglish
लेख हिंदी दिवस अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस: मातृभाषा संस्कारों की वाहक February 21, 2023 / February 21, 2023 by डॉ. पवन सिंह मलिक | Leave a Comment डॉ. पवन सिंह पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने स्वयं के अनुभव के आधार पर कहा है कि ‘मैं अच्छा वैज्ञानिक इसलिए बना, क्योंकि मैंने गणित और विज्ञान की शिक्षा मातृभाषा में प्राप्त की’। और यह अटल सत्य भी है कि भाषा केवल संवाद की ही नहीं अपितु संस्कृति एवं संस्कारों की भी संवाहिका है। भारत एक बहुभाषी देश है। […] Read more » : Mother tongue is the bearer of culture International Mother Language Day
लेख हिंदी दिवस राष्ट्र की प्रगति में राष्ट्रीय भाषाओं की भूमिका January 10, 2023 / January 10, 2023 by डॉ. अमरनाथ | Leave a Comment · डॉ. अमरनाथ पिछले कुछ वर्षों से देश भर की अधिकाँश राज्य सरकारें अपने-अपने प्रान्तों की प्राथमिक शिक्षा को मातृभाषा के माध्यम से मुक्त कर अंग्रेजी माध्यम में बदलने की होड़ मचा रखी हैं. सबसे पहले उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 2017 में ही अपने प्रदेश के पाँच हजार प्राथमिक विद्यालयों से हिन्दी को […] Read more » Role of national languages in the progress of the nation
लेख हिंदी दिवस 2050 तक भारत में कोई अपनी भाषा नहीं बोलेगा। January 10, 2023 / January 10, 2023 by राहुल देव | Leave a Comment राहुल देव दिनांक 15 अप्रैल 2017 को गोरेगांव मुंबई में दीनदयाल समाज सेवा केंद्र द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के लिए उत्तर प्रदेश के तत्काल माननीय राज्यपाल मा. राम नाईक जी विशेष रूप से मुंबई पधारे थे। व्याख्यानमाला के प्रथम पुष्प के अंतर्गत वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक राहुल देव जी गरूग्राम […] Read more » By 2050 no one in India will speak their own language.