Category: धर्म-अध्यात्म

धर्म-अध्यात्म

समय-समय पर आर्यसमाज के नियम पढ़ना व समझना तथा उन्हें जीवन उतारना आवश्यक’

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-मनमोहन कुमार आर्य, आर्यसमाज की स्थापना महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, सन् 1875 को मुम्बई में की थी। स्थापना का मुख्य उद्देश्य वेदों, वैदिक धर्म व संस्कृति का प्रचार व प्रसार करना था। आर्यसमाज के 10 नियम हैं जिन्हें आसानी से कुछ घंटे के परिश्रम से स्मरण किया जा सकता है। आर्यसमाज में […]

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गुरुकुल पौंधा-देहरादून में 21 नये ब्रह्मचारियों के उपनयन एवं वेदारम्भ संस्कार सोल्लास सम्पन्न”

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–मनमोहन कुमार आर्य,  आर्ष गुरुकुल पौंधा-देहरादून में आज दिनांक 25 अगस्त, 2018 को 21 नये प्रवेशार्थी ब्रह्मचारियों के उपनयन एवं वेदारम्भ संस्कार सोल्लास सम्पन्न हुए। आचार्य के प्रतिष्ठित पद पर आर्यजगत के वेदों के विख्यात विद्वान डॉ.  रघुवीर वेदालंकार उपस्थित थे। उन्होंने दोनों संस्कारों की उन सभी क्रियाओं को जो आचार्य और ब्रह्मचारियों के मध्य […]

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“सत्यार्थ-प्रकाश का हिन्दी में लिखा  जाना एक अत्यन्त महत्वपूर्ण घटना”

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मनमोहन कुमार आर्य, सत्यार्थप्रकाश कोई सामान्य ग्रन्थ न होकर वैदिक धर्मियों का धर्मग्रन्थ है जिसका आधार वेद और वेद की निर्भ्रान्त सत्य मान्यतायें एवं सिद्धान्त हैं। हम सत्यार्थप्रकाश को धर्म ग्रन्थ इस लिये कह रहे हैं कि सामान्य व्यक्ति वेदों का अध्ययन कर उससे वह लाभ नहीं उठा सकता जो सत्यार्थप्रकाश से प्राप्त होता है। […]

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