आलोचना प्रदेश में प्रशासन पस्त लेकिन समाजवादी मस्त February 27, 2015 by मृत्युंजय दीक्षित | 1 Comment on प्रदेश में प्रशासन पस्त लेकिन समाजवादी मस्त मृत्युंजय दीक्षित एक ओर जहां आजकल प्रदेश का कामकाज बेहद सुस्त हो गया है हर विभाग में अफसरों की लापरवाही के परिणाम सामने आ रहे हैं तथा समाजवादी सरकार की लोकलुभावन योजनाएं एक के बाद एक फेल होती जा रही हैं उस समय सैफई में जिस प्रकार से सपा मुखिया मुलायम के पोते तेज प्रताप […] Read more » प्रदेश में प्रशासन पस्त समाजवादी मस्त
आलोचना राहुल की छुट्टी या कर्तव्य से पलायन February 27, 2015 by सुरेश हिन्दुस्थानी | 2 Comments on राहुल की छुट्टी या कर्तव्य से पलायन सुरेश हिन्दुस्थानी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का हमेशा से ही राष्ट्रीय गतिविधियों से अलग रहने का स्वभाव रहा है। जब भी देश में कोई बड़ी घटना होती है, राहुल की तलाश की जाती है, लेकिन हमारे यह महाशय तलाश करने के बाद भी कहीं दिखाई नहीं देते हैं। बाद में कुछ सूत्र अवश्य इस बात […] Read more » कर्तव्य से पलायन राहुल की छुट्टी
आलोचना सैफई का समाजवाद : अंडर द कार्पेट February 23, 2015 / February 23, 2015 by अलकनंदा सिंह | 4 Comments on सैफई का समाजवाद : अंडर द कार्पेट देश की राजनीति में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद ऐसे कई नेता हुए जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख बदल दिया जिनमें से एक थे राममनोहर लोहिया। राजनीतिक अधिकारों के पक्षधर रहे डॉ. लोहिया ऐसी समाजवादी व्यवस्था चाहते थे जिसमें सभी की बराबर हिस्सेदारी रहे। लोहिया कहते थे कि सार्वजनिक धन […] Read more » सैफई का समाजवाद
आलोचना कांग्रेस से जो तलछट उफन -उफ़न कर भाजपा में जा रही है -वही उसके पतन का कारण बनेगी। February 3, 2015 by श्रीराम तिवारी | 5 Comments on कांग्रेस से जो तलछट उफन -उफ़न कर भाजपा में जा रही है -वही उसके पतन का कारण बनेगी। कांग्रेस एक गई गुजरी राजनैतिक पार्टी हो चुकी है। अधिकांस कांग्रेसी नेता नाकारा हो चुके हैं ,बदनाम तो वे पहले ही बुरी तरह से हो चुके हैं।चूँकि सत्ता चली गई तो डूबती नाव के मेंढकों की मानिंद उछल-कूंद भी करने लगे हैं । जब यूपीए का नेतत्व करते हुए कांग्रेस सत्ता में हुआ करती थी तब […] Read more »
आलोचना सेंसर,बाबा और सियासत January 28, 2015 / January 28, 2015 by जावेद अनीस | Leave a Comment जावेद अनीस धर्म, राजनीति और पैसे की तिकड़ी के खेल बड़ी तेजी से फलफूल रहा है, वैसे तो एक निराश, शोषित,परेशान और बिखरे समाज में बाबाओं का उभार कोई हैरानी की बात नहीं है लेकिन परेशानी तब पैदा होती है जब ये तथाकथित बाबा लोग बेलगाम हो जाते हैं और कुछ तो अपने आपको ईश्वर […] Read more » बाबा और सियासत सेंसर
आलोचना पहले अन्ना.. फिर केजरीवाल और अब किरण…!! January 27, 2015 / January 28, 2015 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment कहते हैं झूठी उम्मीदें जितनी जल्दी टूट जाए, अच्छी। लेकिन बात वही कि उम्मीद पर ही दुनिया भी टिकती है। पता नहीं यह हमारी आदत है या मजबूरी कि हम बार – बार निराश होते हैं, लेकिन नायकों की हमारी तलाश अनवरत लगातार जारी रहती है। चाहे क्षेत्र राजनीति का हो या किसी दूसरे क्षेत्रों […] Read more »
आलोचना इस समाजवाद को क्या नाम दूँ ? January 17, 2015 / January 17, 2015 by नीतेश राय | Leave a Comment समय के साथ – साथ भारत का विकास काफी तेजी के साथ हुआ है लेकिन उससे भी ज्यादा तेजी से राजनीतिक दलों के विचारधारा का विकास हुआ है । हो भी क्यों न भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिये जरुरी है कि भारत विकास का हर क्षेत्र में हो , चाहे वह वैचारिक […] Read more » समाजवाद
आलोचना आम आदमी की आप ? December 30, 2014 by रवि श्रीवास्तव | 11 Comments on आम आदमी की आप ? चुनाव, चुनाव, चुनाव । ऐसा लगता है, देश में चुनाव के अलावा कुछ बचा ही नही। कभी इस राज्य में तो कभी उस राज्य में। अभी हाल में दो राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त हुए हैं। अब नए साल में एक नई शुरूआत दिल्ली के विधानसभा चुनाव से होगी। हालांकि दिल्ली गत वर्ष चुनाव […] Read more » आम आदमी केजरीवाल की डिनर पार्टी
आलोचना अब तो केवल विश्व नेता बनने की तमन्ना ही मोदी जी के दिल में है October 1, 2014 by श्रीराम तिवारी | 3 Comments on अब तो केवल विश्व नेता बनने की तमन्ना ही मोदी जी के दिल में है न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महा सभा को सम्बोधित करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से जो हिमालयी चुकें हुई हैं -उनकी भरपाई उन्होंने ‘मेडिसन इस्कवॉयर ‘ के अपने अगले – सम्बोधन में दुरुस्त करने की पुरजोर कोशिश की है।लेकिन मेडिसन स्क्वॉयर के सम्बोधन में उनसे जो गंभीर भूल-चूक हुई है उसे वे कहाँ -कब […] Read more » विश्व नेता बनने की तमन्ना
आलोचना शोक संवेदना या बधाई संदेश December 30, 2013 / December 30, 2013 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment “अम्माजी के बारे में सुनकर बहुत दु:ख हुआ|शहर के बाहर था इसलिये आ नहीं पाया|”मैं श्याम भाई के निवास पर उनकी माताजी की मृत्यु पर शोक संवेदना प्रकट करने पहुंचा था| “किंतु उन्हें बहुत कष्ट था,आठ माह से पलंग पर पड़ी थीं”उन्होंने जबाब दिया| […] Read more » शोक संवेदना या बधाई संदेश
आलोचना कबीर-तुलसी के काव्यों में स्त्री-विरोध August 17, 2013 by सारदा बनर्जी | 3 Comments on कबीर-तुलसी के काव्यों में स्त्री-विरोध सारदा बैनर्जी भक्तिकालीन साहित्य में पाखंड-विरोध के समानांतर स्त्री-विरोध का स्वर भी स्पष्टतः मुखर हुआ है। खासकर कबीर जैसे प्रगतिशील और भक्त कवि ने अपने दोहों में स्त्री को दो रुपों में विभाजित कर उसका चरित्रांकन किया है। ये दो रुप हैं, ‘पातिव्रत्य’ रुप और ‘कामिनी’ रुप। कबीर ने नारी के कामिनी रुप की भरसक […] Read more »
आलोचना धूमिल की कविताओं में व्यक्त स्त्री-विरोधी दृष्टिकोण — सारदा बनर्जी June 27, 2013 by सारदा बनर्जी | 6 Comments on धूमिल की कविताओं में व्यक्त स्त्री-विरोधी दृष्टिकोण — सारदा बनर्जी धूमिल की कविताएं जनतंत्र को संबोधित करने वाली कविताएं हैं। ये कविताएं सीधे-सीधे देश के लोकतंत्र, संविधान, संसद और नेता की तीखी आलोचना में लिखी गई और उन्हें चुनौती देती कविताएं हैं। धूमिल देश की पूँजीवादी लोकतांत्रिक व्यवस्था से संतुष्ट नहीं थे, फलतः उन्होंने अपनी कविताओं में इस असंतुष्टि को बड़े आक्रोश के साथ व्यक्त […] Read more » धूमिल