कविता नन्हीं जी April 21, 2017 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment आज हमारी नन्हीं जी ने, रोटी सुन्दर गोल बनाई। कई दिनों से सीख रही थी, रोटी गोल बनेगी कैसे। बन जाता आकार चीन सा, कभी बना रशिया के जैसे। बहुत दिनों के बाद अधूरी, साध आज पूरी हो पाई। हँसा गैस का चूल्हा,काला, गूँगा ,गोल तवा मुस्काया। पटा और बेलन ने उससे, हलो कहा और […] Read more » नन्हीं जी
कविता साहित्य पूरा हिमालय मेरा घर April 17, 2017 / April 17, 2017 by आशुतोष माधव | 1 Comment on पूरा हिमालय मेरा घर बाहें फैलाए मिलता है नगाधिराज अपने पूरे मन से अब हिमालय आपका है शतद्रु की दूधधारा और लाल दहकते बुरांश सब, आपके हैं Read more » मेरा घर हिमालय
कविता साहित्य कुलभूषण जाधव की फाँसी पर सवाल करती कविता April 17, 2017 / April 17, 2017 by हेमंत कुमावत 'हेमू ' | 4 Comments on कुलभूषण जाधव की फाँसी पर सवाल करती कविता ना मानेगा धूर्त पड़ौसी , शांति की वार्ताओं से अब हल नहीं निकलेगा , सिर्फ कड़ी निंदाओ से कुलभूषण की फाँसी पर ,क्यों मौन साधना साधे हो अफजल के चाचाओं ,क्या सिर्फ दुश्मन के प्यादे हो सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर , रतजागा सा कर डाला एक आतंकी की फांसी पर , रोये थे जो […] Read more » Featured कुलभूषण जाधव कुलभूषण जाधव को मौत की सजा
कविता साहित्य कोई मिल पल में चल देता ! April 16, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment कोई मिल पल में चल देता, कोई कुछ वर्ष संग देता; जाना सबको ही है होता, मिलन संस्कार वश होता ! विदा क्षण क्षण दिये चलना, अलविदा कभी कह देना; यही कर्त्तव्य रह जाता, मुस्करा भाव भव देना ! चले सब जाते अपनी धुन, झाँकते चलते दे चितवन; नज़र में रखे निज मंज़िल, कभी उर्मिल […] Read more » कोई मिल पल में चल देता !
कविता बच्चों का पन्ना साहित्य सुबह सुबह से ही रोजाना April 13, 2017 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment सुबह सुबह से ही रोजाना Read more » Featured सुबह सुबह से ही रोजाना
कविता साहित्य रामचरित April 4, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment अरुण तिवारी भजियो रामचरित मन धरियो तजियो, जग की तृष्णा तजियो। परहित सदा धर्म सम धरियो, मरियो, मर्यादा पर मरियो।। भजियो, रामचरित…. भाई संग सब स्वारथ तजियो संगिनी बन दुख-सुख सम रहियोे। मातु-पिता कुछ धीरज धरियो सुत सदा आज्ञा-पालन करियो।। भजियो रामचरित… सेवक सखा समझ मन भजियो शरणागत की रक्षा करियो। धोखा काहू संग मत […] Read more » रामचरित
कविता वरूण ने बिछाया श्वेत जाल April 2, 2017 by डॉ. मधुसूदन | 7 Comments on वरूण ने बिछाया श्वेत जाल डॉ. मधुसूदन बाहर था हिमपात निरंतर, उदास मन,बैठा था घरपर, पढी आप की काव्य पंक्तियाँ। उडा ले गयींं कहीं पंखों पर। अचरज अचरज अपलक अपलक पल में हिम भी रुई बन गया। और रुई का फूल हो गया। श्वेत पँखुडियाँ होती झर-झर॥ अब,श्वेत पँखुडियाँ झरती बाहर। शीतकाल,बसंत बन गया॥ “आ गया ऋतुराज बसन्त मधुऋतु लाई […] Read more » वरूण ने बिछाया श्वेत जाल
कविता साहित्य ऋतुराज बसन्त April 2, 2017 by शकुन्तला बहादुर | 4 Comments on ऋतुराज बसन्त शकुन्तला बहादुर आ गया ऋतुराज बसन्त। छा गया ऋतुराज बसन्त ।। * हरित घेंघरी पीत चुनरिया , पहिन प्रकृति ने ली अँगड़ाई नव- समृद्धि पा विनत हुए तरु, झूम उठी देखो अमराई । आज सुखद सुरभित सा क्यों ये मादक पवन बहा अति मन्द ।। आ गया …. * फूल उठी खेतों में सरसों महक […] Read more » ऋतुराज बसन्त
कविता साहित्य भगवा और हरा March 23, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment राष्ट्रीय ध्वज के शीर्ष में लगा, भगवा को आदर हमने दिया। विदेशी हमले से ही आकरके, हरा रंग यहां फहराती है ।। भारत का मूल स्वरूप चेतना, औ गरिमा को गिरा दिया। हरा को बढ़ाचढ़ा करके, सभ्यता संस्कार धुलवाती है ।।4।। Read more »
कविता साहित्य मोदी विश्व का नेता बन, योगी गुरु जगत कहायेगा।। March 23, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment यूपी में ना शासन था, सब हाथ पर हाथ धरे रहे। योगीजी के आते ही, सब द्रुत गति से बदल रहे।। वह वक्त एक दिन आयेगा, योगी मोदी बन जाएगा। मोदी विश्व का नेता बन, योगी गुरु जगत कहायेगा।। Read more » उत्तम प्रदेश मोदी विश्व का नेता योगी गुरु जगत
कविता आवा हो भइया होली मनाई March 14, 2017 / March 14, 2017 by शालिनी तिवारी | Leave a Comment अब तो गावन कै लड़िका भी पप्पू टीपू जानि गएन, 'यूपी को ये साथ पसन्द है' ऐह जुम्ला का वो नकार दहेन, Read more » आवा हो भइया होली मनाई
कविता साहित्य इन रंगन से अब का डरनो, अब तो आ गई होरी March 12, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment कुछ रंगन में भंग परी है, कुछ रंगन में हाला, कुछ रंगन में गोरी, कुछ रंग गड़बड़ झाला। वीरू-जय औ पप्पू-टीपू ले रंगन को प्याला, हाथी, झाडू़, सीटी, नारियल हर रंग शतरंज वाला। कौन रंग वोटर मन भावे, जो रंगरेज़, सोई जाने ईवीएम को तो कमीशन जाने, हम तो जाने रंग तिरंगो वाला। इन रंगन […] Read more » अब तो आ गई होरी इन रंगन से अब का डरनो