कविता चाय न आई हाय ! July 14, 2023 / July 14, 2023 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment प्रभुदयाल श्रीवास्तव न तो हमको भैंस चाहिए ,नहीं चाहिए गाय |कड़क ठण्ड है हमें पिला दो,बस एक कप भर चाय |चाय कड़क हो थोड़ी मीठी ,बस थोड़ा अदरक हो|दूध मिलाकर खुशियों के संग ,मिला हुआ गुड लक हो |हो जाती छू मंतर सुस्ती ,बढ़िया चाय,उपाय |जब भी बनती चाय घरों में ,मोहक गंध निकलती |लाख […] Read more »
कविता हम हिंदुस्तानी हैं July 14, 2023 / July 14, 2023 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment प्रभुदयाल श्रीवास्तव »बच्चो कहो प्रेम से हम,सब हिन्दुस्तानी हैं।भरत वंश के ध्वज वाहक,हम अमर कहानी हैं। वेद ऋचाओं वाली माँ,भारत के रहवासी।दिल में रखते प्यार और,आँखों में पानी है। दया धर्म का सदियों से,सबसे अपना नाता।संग साथ रहने में ही,सबको आसानी है। खून खराबा करना यह,है नहीं सोच अपनी।मदद ग़रीबों की करना,यह रीति पुरानी है। […] Read more »
कविता धुक्कम – पुक्कम रेल July 14, 2023 / July 14, 2023 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment रेल चली भई रेल चली,धुक्कम- पुक्कम रेल चली। टीना ,मीना ,चुन्नू ,मुन्नू,डिब्बे बनकर आएं।मोहन कक्कू इंजिन बनकर,सीटी तेज बजाएं।डीज़ल से फुल टैंक कराएँ,इंजन न हो फेल ,चली। गार्ड बनेंगे झल्लू भाई,हरी लाल ले झंडी।छुक -छुक -छुक रेल चलेगी,पटना ,कटक, भिवंडी।पैसिंजर बन कहीं चलेगी,कहीं -कहीं बन मेल चली। स्टेशन -,स्टेशन रुककर ,लेगी ढेर मुसाफिर।कई मुसाफिर उतर […] Read more »
कविता आओ फिर से एक नया मानवीय धर्म बनाएँ July 13, 2023 / July 13, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआओ फिर से एक नया मानवीय धर्म बनाएँ,सब मानव मात्र में मानवता का अलख जगाएँ! जिसमें हो भक्ति माँ पिता और गुरु के प्रति,जिसमें नहीं हो धर्म मजहब की फिरकापरस्ती! जिसमें हो अपना अंबर अपनी मातृभूमि धरती,जिसमें हो अपना आदर्श अपनी हो वतनपरस्ती! जिसमें हर जीव जंतुओं के लिए भावना न्यारी,जिसमें संतान को […] Read more »
कविता क्या है जिंदगी? July 10, 2023 / July 10, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment डॉली गढ़ियापोथिंग, कपकोटबागेश्वर, उत्तराखंडदो पल की हसीन ये जिंदगीजिसे लफ़्ज़ों में बयां ना कर सके कोई,पल में जीना, पल में मरना जिसे पता न हो,वह जिंदगी ही क्या जिसमें पानी और हवा न हो,जुदा-जुदा लगी ये जिंदगी मुझे,कब बचपन से बड़े हुए, पता ही नही मुझे,वह चांद की चांदनी रातें,जिसमें करते हम तारों की बातें,जिसमें […] Read more » क्या है जिंदगी
कविता सुनो, बरसात आयी रे ! July 10, 2023 / July 10, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment अंजली शर्मामुजफ्फरपुर, बिहार बरसात का मौसम आया,सबके मन को भाया,कुछ लोगों को छोड़ो भाई,मैं भी हूं एक प्रेयसी तुम्हारी।तुम्हें देखते मैं हुई बावरी,सुनो, बरसात आई रे,सबके मन को भायी रे।तुम गरीब, किसानों की हो उम्मीद,तुम फसलों के लिए प्यार की बूंदे,बूंदों की प्रेमिल फुहार से किसान का मन हर्षाती हो,सबके मन को भाती हो,सुनो बरसात […] Read more »
कविता अगली पीढ़ी July 10, 2023 / July 10, 2023 by क्षितिज कवातरा | Leave a Comment कह दो अगली पीढ़ी सेएक वक्त ऐसा भी आया था जहां सोच कैसी हो फ़र्क नहींपरम धर्म बस माया था पैसे वाला भगवान हुआगरीब शैतान का जाया था हक की जो कोई बात करेउसे सूली पर चढ़ाया था जन्नत की यहां टिकट मिलेजहन्नम घर को बनाया था माँ के दूध से निकोटीनशराब सा रक्त पिता […] Read more » अगली पीढ़ी
कविता सावन का महीना है भरतार July 10, 2023 / July 10, 2023 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सावन का महीना है भरतार,तू मुझे झूला झुलाने आइयो,तू मुझे झूला झुलाने आइयो,मै करूंगी तेरा इंतज़ार।। हाथो की चूड़ियां लाना,पैरो के बिछवे लाना,मांग का सिंदूर लाना,क्रीम पाउडर भी लाना,मै करूंगी सोलह सिंगार,सावन का महीना है भरतार।। कानो के कुंडल लाना,माथे का टीका लाना,नाक की नाथ भी लाना,माथे की बिंदिया लाना,भूलना ना गले का हार।सावन का […] Read more »
कविता देखो देखो सावन है आया ! July 7, 2023 / July 7, 2023 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment झम-झम बरसे मेघ,तरूओं के भीगे तन, भीगे हरेक आज मनदेखो देखो सावन है आया ! चम-चम चमके बिजलियां,झूम रहे तन और झूम रही सारी वनस्पतियांदेखो देखो सावन है आया ! नव ऊर्जा का हो रहा संचार,मन प्रफुल्लित है, धुल रहे सारे विकारदेखो देखो सावन है आया ! झर-झर झूमते झरने,खुश हैं पशु, खुश हैं पंछी, […] Read more » देखो देखो सावन है आया
कविता भारत कोई नवीन राष्ट्र नहीं आदि सनातन से चला आ रहा July 5, 2023 / July 5, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक भारत कोई नवीन राष्ट्र नहीं आदि सनातन से चला आ रहा पारंपरिक सनातनी जैन बौद्ध वैदिक हिन्दू राष्ट्र है! प्रथम स्वायंभुव मनु के मन्वन्तर से वर्तमान सातवें वैवस्वत मनु के मन्वन्तर तक भारत ने अपनी सभ्यता संस्कृति और विरासती पहचान को कभी नहीं छोड़ी! सप्त द्वीप नौ खंड में भारतवर्ष था जम्बूद्वीप […] Read more »
कविता मैं खुद के लिए काफी हूं July 4, 2023 / July 4, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment प्रियंका साहूमुज़फ़्फ़रपुर, बिहारमैं खुद के लिए काफी हूं,नहीं चाहिए मुझे,किसी की दोस्ती,किसी का प्यार,नहीं चाहिए मुझे,किसी की हमदर्दी,किसी का साथ,मुझे तो बस चाहिए, एक पंख जो ले जाए,मुझे मेरे सपनों के संग,जिसे देख दुनिया रह जाए दंग मैं खुद के लिए काफी हूं, फर्क नहीं पड़ता मुझे,लोगों के तानों का,उनकी बातों का,मुझे फर्क पड़ता है,मेरे सुनहरे सपनों […] Read more » मैं खुद के लिए काफी हूं
कविता बूंद-बूंद पानी का July 4, 2023 / July 4, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment संजना गढ़ियापोथिंग, उत्तराखंड कभी बूंद-बूंद बनकर गिरता है पानी,कभी बर्फ बनकर गिरता है पानी,टप टप टप टप करता है पानी,झर झर झर झर बहता है पानी,सबकी प्यास बुझाता है पानी,पर्वतों से निकल कर,नदियों में बहता है पानी,अंत में सागर से मिल जाता है पानी,बारिश बनकर लौट आता है पानी,फिर बूंद बूंद बन कर गिर जाता […] Read more » बूंद-बूंद पानी का