कविता धर्म और संस्कृति अलग-अलग चीज है May 24, 2021 / May 24, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकधर्म और संस्कृति अलग-अलग चीज है,दो व्यक्ति का धर्म परिस्थितिवश एक हो सकता है,लेकिन संस्कृति एक नही हो सकती है! हो सकता है कोई व्यक्तिवादी धर्म ग्रहण के पूर्वतुम्हें या तुम्हारे पूर्वजों को भयंकर यातना दी गई होतुम्हारी संस्कृति को बहुत दबाई-सताई गई हो! बहुत दबाए सताए जाने के बाद मजबूरी वश हीतुम्हारे […] Read more » Religion and culture are different धर्म और संस्कृति
कविता चन्द्रवंशी आर्य ययाति थे आर्य, द्रविड़,तुर्क,भोज,म्लेच्छ जाति के पिता May 24, 2021 / May 24, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआर्य, द्रविड़, तुर्क, भोज, म्लेच्छ के पिता थे,आत्रेय चन्द्रपुत्र बुध-इला के प्रपौत्र ययाति!बुध-इलापुत्र पुरुरवा से आयु, आयु से नहुष,इन्द्रपदाभिषिक्त नहुष पिता थे ययाति के! ययाति पति थे दानव गुरु शुक्राचार्य कन्यादेवयानी और दानव वृषपर्वापुत्री शर्मिष्ठा के,देवयानी ने शिकायत की ब्राह्मण पिता से,पति ययाति की शर्मिष्ठा में एकनिष्ठा की! शुक्र अन्य नाम काव्या उसना […] Read more » चन्द्रवंशी आर्य
कविता चलाचल-चलाचल जिंदगी के सफर में…. May 24, 2021 / May 24, 2021 by डॉ शंकर सुवन सिंह | Leave a Comment डॉ. शंकर सुवन सिंह जिंदगी घिरी,शैलाभों और चट्टानों से|ऐ जिंदगी फिर डरना क्या,आँधियों और तूफानों से||विचार शून्य हो,भाव भक्ति का हो|तो भगवान् हम सफर है,भक्त के सफर में||चलाचल-चलाचल जिंदगी के सफर में,हम सफर है तो सफर से क्या डरना||खंजर की क्या मजाल कि तेरे अरमानो को कुचल दे|.अरमान ही क्या करे कि तू खुद खंजर […] Read more » चलाचल-चलाचल जिंदगी के सफर में….
कविता आज मुर्दे भी बोल रहे हैं May 22, 2021 / May 22, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आज मुर्दे भी मुख खोल रहे हैं,अपने मन की पीड़ा खोल रहे हैं।हुआ है उनके साथ बहुत अन्याय,सबकी वे अब पोल खोल रहे हैं।। मिली नहीं अस्तपतालो में जगह,आक्सीजन के लिए भटक रहे थे।हो रही थी दवाओं की काला बाजारी,दवाओ के लिए हम तड़फ रहे थे।। मिला नहीं चार कंधो का सहारा,एम्बुलेंस की राह हम […] Read more »
कविता आर्य कोई जाति नहीं यह एक समाज रहा है May 22, 2021 / May 22, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआर्य कोई जाति नहींयह एक समाज रहा है प्रारंभ से हीं! जैसे कि आज भी दयानंद स्थापितआर्य जाति नहीं कोई, एक आर्य समाज रहा है! आर्य,द्रविड़,तुर्क,भोज,म्लेच्छ हैं संतति,आर्य चन्द्रवंशी क्षत्रिय पुरुरवा प्रपौत्र ययाति की! मूल आर्य समाज के संस्थापक,अदिति-कश्यप संतति आदित्य विवश्वान सूर्य के पुत्रवैवस्वत मनु और उनके बेटी-जमाता इला और बुध थे! […] Read more » arya is a society Arya is not a caste आर्य एक समाज रहा है
कविता जिंदगी May 22, 2021 / May 22, 2021 by डॉ शंकर सुवन सिंह | Leave a Comment डॉ. शंकर सुवन सिंह सुबह होती है रात होती है|हर दिन यूँ ही खुली किताब होती है|किताब के हर पन्ने पे,वही अध्याय होता है|हर अध्याय में,वही दैनिक दिनचर्या होती है|सुबह होती है,रात होती है|हर दिन यूँ ही खुली किताब होती है|वक़्त न जाने किस मोड़ पे,किताब की जगह कॉपी दे दे|सारे कर्मों का लेखा जोखा […] Read more » जिंदगी सुबह होती है रात होती है हर दिन यूँ ही खुली किताब होती है……
कविता मुर्दे सवाल करते हैं…! May 19, 2021 / May 19, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल मुर्दे सवाल करते हैं… ?वे कहते हैंबेमतलब बवाल करते हैंइंसानों हम तो मुर्दे हैंक्योंकि…हमारे जिस्म में साँसे हैं न आशेंलेकिन…इंसानों, तुम तो मुर्दे भी नहीं बन पाएक्योंकि…जिंदा होकर भी तुम मर गएमैंने तुमसे क्या माँगा था…?सिर्फ साँसे और अस्पतालतुम वह भी नहीं दे पाएहमने तो तुमसेसिर्फ चार कंधे मांगे…?तुम वह भी नहीं दे […] Read more » मुर्दे सवाल करते हैं
कविता गंगा मैया की पुकार May 19, 2021 / May 19, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अस्थियां प्रवाहित होती थी मुझमें,अब लाशे निरंतर बहती है मुझमें।और अब कितने पाप धोऊ सबके,ये गंगा मैया कह रही है हम सबको। जिस देश में पवित्र गंगा बहती है,अब पवित्र गंगा में लाशे बहती है।कैसा बुरा समय अब आ गया है,जब मुर्दों की बुरी गति होती है।। थक गई हूं मै पापियों के पाप धोते […] Read more » Call of Ganga maiya गंगा मैया की पुकार
कविता तब मिलेगी मुक्ति जातिवाद से May 19, 2021 / May 19, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआरक्षण शब्द घृणित हो चुका शब्द हरिजन सा,मगर छुपके छुपाके सबको चाहिएआरक्षण पिछड़े, आदिवासी, हरिजन के जैसा! अब आरक्षण मिला संपूर्ण भारत जन को,हरिजन-अंत्यज, पिछड़ेजन,अर्थहीन से समग्र ब्राह्मण जाति तक को! जब से आरक्षण ब्राह्मण को मिला,तब से उपाधि ‘हरिजन’ ‘राम’ जैसे आरक्षित शब्दघृणित नहीं और पूर्वाग्रह मुक्त सा भी लगने लगा! अब […] Read more » liberation from casteism Then you will get liberation from casteism तब मिलेगी मुक्ति जातिवाद से
कविता धन दौलत पर न कर इतना गुमान May 19, 2021 / May 19, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment धन दौलत पर न कर इतना गुमान,ये हाथ का मैल है धुल ही जाएगा।न कुछ लाया था न कुछ ले जायगा,यही पर सब कुछ ही रह जाएगा।। बनाये थे जो तूने महल दुम्हले,क्या तू इनको साथ ले जाएगा ?खड़े रहेंगे ये सभी यही पर बन्दे,साथ कुछ भी न तू ले जाएगा।। बांट देना अपने दोनों […] Read more » धन दौलत पर न कर इतना गुमान
कविता हे ईश्वर ऐसी ज्यादती मत करो May 18, 2021 / May 18, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे ईश्वर! ऐसी ज्यादती मत करो,अगर हमें मनुष्य में जन्म दिए हो,तो समूची जिंदगीभर जी लेने दो! अगर हमें मनुज का जीवन दिए हो,किस्त-किस्तदर में जिंदगी जीने को,पच्चीस वर्ष ब्रह्मचर्याश्रम पढ़ने दो! पचास वर्ष तक गृहस्थाश्रम जीने को,पचहत्तर वर्ष तक वानप्रस्थ आश्रम है,हमें मनुर्भव:बनने दो, शेष है संन्यास! वर्ष पचहत्तर के पूर्व,हमें नही […] Read more » हे ईश्वर ऐसी ज्यादती मत करो
कविता भारत का अतीत कभी मरा नहीं है May 18, 2021 / May 18, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहिन्दुत्व का स्वभाव सर्वदा से ऐसा,कि यह जितना ही परिवर्तित होता,उतना ही मूल के करीब आ जाता! चौबीस तीर्थंकरों और एक बुद्ध ने,हिन्दुत्व औ”सनातन वैदिक धर्म में,व्यापक सुधार लाए थे जोर-शोर से,किन्तु वैदिक धर्म जस का तस है! भारत का अतीत कभी मरा नहीं है,भारत का अतीत कल भी जीवित था,आज भी जीवित […] Read more »