कविता उठो द्रोपदी अब शस्त्र संभालो , October 16, 2020 / October 16, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment उठो द्रोपदी अब शस्त्र संभालो ,कलयुग में कृष्ण नहीं आयेगे |अपनी रक्षा स्वयं ही करनी ,कोई तुम्हे बचाने नहीं आयेगे || कब तक तुम आस रखोगी ?बिके हुये इन अखबारों से |किस से हेल्प मांग रही हो,दुशासन के दुष्ट दरबारों से ||स्वयं जो लज्जाहीन खड़े है ,वे क्या तुम्हारी लाज बचायेगे ?उठो द्रोपदी अब वस्त्र […] Read more » Wake up Draupadi उठो द्रोपदी अब शस्त्र संभालो
कविता तितली है खामोश ! October 16, 2020 / October 16, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment बदल रहे हर रोज ही, हैं मौसम के रूप !ठेठ सर्द में हो रही, गर्मी जैसी धूप !!सूनी बगिया देखकर, तितली है खामोश !जुगनूं की बारात से, गायब है अब जोश !!दें सुनाई अब कहाँ, कोयल की आवाज़ !बूढा पीपल सूखकर, ठूंठ खड़ा है आज !!जब से की बाजार ने, हरियाली से प्रीत !पंछी डूबे […] Read more » Butterfly is silent! तितली है खामोश
कविता भारत का दूसरा आक्रांता यूनानी सिकंदर October 15, 2020 / October 15, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment –विनय कुमार विनायकईसा पूर्व तीन सौ तीस का जब था जमाना,दरायवौष/डैरियस 3 का हुआ यूनान से सामनाअराबेला के युद्ध में यूनानी वीर सिकंदर नेसोलह वर्ष की उम्र में अरस्तू से ज्ञान प्राप्तकरईरानी हखमीवंशी डैरियस तृतीय को देके जख्मईरानी परसिपोलिस राजप्रासाद को करके भस्मआरम्भ किया विश्व विजय का अपना रस्म! सिकंदर को अंग्रेजों ने ‘अलेक्जेंडर द […] Read more » the second invader of India Unani Alexander यूनानी सिकंदर
कविता भारत का पहला आक्रांता ईरानी साइरस October 14, 2020 / October 14, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकभारत का पहला आक्रांताईरानी हखमीवंशी साइरस;कुरोश राजा था फारस का!तबतक इस्लाम का उदय नहीं हुआ थाईरानी था भारतीय आर्यों की भातृ शाखाअग्नि पूजक, जरथुष्ट्र का अनुयाईईसा पूर्व पांच सौ अंठावन सेईसा पूर्व पांच सौ तीस तक,साइरस/करुष/कुरोश ही था ईरान का शासकबना बाह्लीक और गांधार का प्रथम विजेताकरके किन्तु सीमा पार आ नहीं सका […] Read more » India first attacker Irani Cyrus आक्रांता ईरानी साइरस भारत का पहला आक्रांता
कविता कुछ कहता है सावन October 13, 2020 / October 13, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कुछ कहता है सावन,मेरे मन के आँगन मे,साजन से तेरा मिलन करा दूक्या दोगी मुझे निछावन मे. मैं एक ऐसा सावन हूँ,तेरे तन मे अग्नि लगाता हूँमैं ही तेरे साजन को बुलाकरतेरे तन की प्यास बुझाता हूँ सावन मे ही तुमको मैंकोयल की कूक सुनाता हूँबागो मे झूले डलवा करतुझे झूले पर झूलाता हूँ वर्षा […] Read more »
कविता अपने काँटों से लगे, और पराये फूल !! October 12, 2020 / October 12, 2020 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment प्रियंका सौरभ हाथ मिलाते गैर से, अपनों से बेजार।सौरभ रिश्ते हो गए, गिरगिट से मक्कार।। अपनों से जिनकी नहीं, बनती सौरभ बात !ढूंढ रहे वो आजकल, गैरों में औकात !! उनका क्या विश्वास अब, उनसे क्या हो बात !सौरभ अपने खून से, कर बैठे जो घात !! चूहा हल्दी गाँठ पर, फुदक रहा दिन-रात !आहट […] Read more » अपने काँटों से लगे और पराये फूल
कविता दानवगुरु भार्गव शुक्राचार्य कन्या : यदुकुलमाता देवयानी October 12, 2020 / October 12, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकहे देवयानी!तुम्हें किस संज्ञा से विभूषित करुंकौन सा संबोधन दूं?एक पूर्वजा माता!एक पूर्वज पिता की प्रेयसी-पत्नी!या नारी एक स्वेच्छाचारिणी!तुम प्रेयसी और पत्नी थीचन्द्रवंशी आर्य ययाति कीअस्तु तुम पूर्वजा माता होपर सिवा एक नारी,तुम किस भूमिका में सफल रही?ययाति की पत्नी होकर भीबन सकी एक पत्नी?यदु की माता होकर भीक्या बन सकी एक माता?अगर […] Read more » दानवगुरु भार्गव शुक्राचार्य कन्या यदुकुलमाता देवयानी
कविता मगध साम्राज्य पाटलीपुत्र के राजवंश October 11, 2020 / October 11, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमहाभारत कालीन बृहद्रथ पुत्र जरासंध केवंशजों की राजधानी गिरिव्रज थी मगध कीपांच सौ चौवालीस ई.पू.हर्यकवंशी भट्टी नेअपने पुत्र बिम्बिसार को गिरिव्रज की गद्दी दीगिरिव्रज को बिम्बिसार ने राजगृह का नाम दियाबिम्बिसार के पौत्र, अजातशत्रु के पुत्र उदायिन नेराजगृह से पाटलीपुत्र राजधानी को बदल दी थीअंतिम हर्यक नागदशक से शिशुनाग ने सत्ता ली! कहते […] Read more » Magadha Empire Pataliputra dynasty पाटलीपुत्र के राजवंश
कविता एक ही ईश्वर-रब-खुदा-भगवान राम है! October 11, 2020 / October 11, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकनुक़ता के हेर-फेर से जब खुदा जुदा हो जाता,ऐसे में एक ही ईश्वर-रब-खुदा-राम-भगवान है!राम कहो, रहमान कहो,आदम की संतान कहो! राम हीं हैं सत्य-सनातन आदि ईश्वर!राम को भजते महादेव अर्द्धनारीश्वर!राम अंशी हैं भगवान श्रीकृष्ण यदुवंशी! रामवंशी हैं बौद्ध धर्म के प्रवर्तक शाक्य मुनि!जैनियों के महावीर, सिखों के दस गुरु महान!राम सबके रोम-रोम में,भारत […] Read more » भगवान राम
कविता ज्येष्ठ पुत्र October 10, 2020 / October 10, 2020 by आलोक कौशिक | Leave a Comment पुत्र ज्येष्ठ है यदि तू अपने कुल कातो संघर्षों और विपत्तियों से मत डरचाहता है अनुज हो तेरा लक्ष्मण जैसापहले तू स्वयं राम-सा कर्म तो कर अपने पिता के वचन की लाज निभानेज्येष्ठ जटिल जीवन पथ अपनाते हैंहो प्राप्त विजय अनुजों को इसलिएसहर्ष वो स्वयं पराजित हो जाते हैं लाँघते नहीं मर्यादा कभी अपने कर्मों […] Read more » elder brother
कविता संस्कृत है संस्कृति की भाषा October 10, 2020 / October 10, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजब बोली जाती भाषा, होता सम्भाषण!जब लिपीवद्ध नही की जातीभाषा होती है बोली!भाषा होती है भाष्य, जब बांध दिया जाताव्याकरण की रुढ़ी मेंभाषा हो जाती रुढ़ और गूढ़ भी संस्कृत जैसीजिसे बोली नहीं जातीउद्धरण और उदाहरण हो जातीसमेटे रखती है संस्कृति को!संस्कृति को जानना हैतो बचाए रखना होगा संस्कृत को!मनोकामना है कुछतो बचाए […] Read more » Sanskrit is the language of culture संस्कृत है संस्कृति की भाषा
कविता मुझे तुम बहुत याद आये October 9, 2020 / October 9, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment ज़ब जब वर्षा ऋतु आईनभ मे काली घटा छाईदिन मे अँधेरी छा जायेमनवा मेरा बहुत घबरायेबिजली बहुत चमक रही थीमन मन मे मैं डर रही थीमुझे तुम बहुत याद आयेमुझे तुम बहुत याद आये ज़ब ज़ब श्रंगार करने को चलीअपने पिया की होने मैं चलीतुमने ही मुझे दिया सहाराऔर दर्पण को मैंने निहारामुझे तुम उसमे […] Read more »