कविता जिंदगी May 22, 2021 / May 22, 2021 by डॉ शंकर सुवन सिंह | Leave a Comment डॉ. शंकर सुवन सिंह सुबह होती है रात होती है|हर दिन यूँ ही खुली किताब होती है|किताब के हर पन्ने पे,वही अध्याय होता है|हर अध्याय में,वही दैनिक दिनचर्या होती है|सुबह होती है,रात होती है|हर दिन यूँ ही खुली किताब होती है|वक़्त न जाने किस मोड़ पे,किताब की जगह कॉपी दे दे|सारे कर्मों का लेखा जोखा […] Read more » जिंदगी सुबह होती है रात होती है हर दिन यूँ ही खुली किताब होती है……
राजनीति लेख भारत के मार्क्सवादी इतिहासकारों के बौद्धिक घोटाले अर्थात इतिहास की हत्या, भाग – 3 May 20, 2021 / May 20, 2021 by श्रीनिवास आर्य | Leave a Comment हिंदू लोग, विशेषकर हिंदू बुद्धिजीवी वर्ग, अपने पर हो रहे चहुंमुखी बौद्धिक हमलों के विरुद्ध किसी ठोस वैचारिक अभियान चलाने या बौद्धिक हमलों का बौद्धिक प्रत्युत्तर देने में प्रायः निष्क्रिय रहा है. स्वयं के विरुद्ध किए गए किसी के मनगढंत दावे, विवरण या सफेद जूठ को देखकर भी उसे हल्के में लेकर इग्नोर कर देता […] Read more » इतिहास की हत्या मार्क्सवादी इतिहासकारों के बौद्धिक घोटाले सीताराम गोयल
लेख ईसाई मुस्लिम की सर्वश्रेष्ठता की लड़ाई में स्वास्तिक पर प्रतिबंध लगाने का विरोध किया जाना जरूरी May 20, 2021 / May 20, 2021 by आचार्य विष्णु श्रीहरि | Leave a Comment हिन्दुत्व की कसौटी पर आधुनिक इतिहास बईमान है, हर हिन्दुत्व की कसौटी को इतिहास में घृणा और हिंसा तथा सामाजिक लांक्षणा को प्रत्यारोपित किया गया है। इस सच को कोई अस्वीकार नहीं कर सकता है कि भूतकाल में जो भी इतिहास लिखे गये वह इतिहास आक्रमणकारी विजैताओं द्वारा लिखे गये, आक्रमणकारियों द्वारा लिखे गये, उन […] Read more » ईसाई मुस्लिम की सर्वश्रेष्ठता की लड़ाई स्वास्तिक पर प्रतिबंध लगाने का विरोध
टेलिविज़न मीडिया व्यंग्य तबियत से उछलते समाचार May 19, 2021 / May 19, 2021 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीवपहले प्रिन्ट मीड़िया होती थी जिसकी खबर दूसरे दिन अखबार में पढ़ने को मिलती थी, अब इलेक्टानिक मीड़िया हो गयी, घटना घटी, स्पाट पर पहुॅचे, कैमरे लगाये और शुरू हो गये, बक-बक करने। घटना के पल झपकते ही टी.व्ही.पर, मोबाईल से व्हाटसअप-फेसबुक पर एक समाचार अनेक एंगल से प्रस्तुत होता है, ताकि पेश […] Read more » तबियत से उछलते समाचार
राजनीति लेख भारत के मार्क्सवादी इतिहासकारों के बौद्धिक घोटाले अर्थात इतिहास की हत्या , भाग -2 May 19, 2021 / May 19, 2021 by श्रीनिवास आर्य | Leave a Comment रोमिला थापर vs. सीताराम गोयल: भारत के मार्क्सवादी इतिहासकार दो हथियारों (तकनिकों) से हंमेशा लैस रहते है: उनका पहला हथियार होता है अपने इतिहास लेखन पर प्रश्न उठाने वालों या असहमत होने वालों पर तुरंत “साम्प्रदायिक – communal” होने का लांछन लगा देना, ताकि सामने वाला शुरु से ही बचाव मुद्रा में आ जाए, दिफेंसिव […] Read more » इतिहास की हत्या मार्क्सवादी इतिहासकारों के बौद्धिक घोटाले रोमिला थापर और सीताराम गोयल
कविता मुर्दे सवाल करते हैं…! May 19, 2021 / May 19, 2021 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल मुर्दे सवाल करते हैं… ?वे कहते हैंबेमतलब बवाल करते हैंइंसानों हम तो मुर्दे हैंक्योंकि…हमारे जिस्म में साँसे हैं न आशेंलेकिन…इंसानों, तुम तो मुर्दे भी नहीं बन पाएक्योंकि…जिंदा होकर भी तुम मर गएमैंने तुमसे क्या माँगा था…?सिर्फ साँसे और अस्पतालतुम वह भी नहीं दे पाएहमने तो तुमसेसिर्फ चार कंधे मांगे…?तुम वह भी नहीं दे […] Read more » मुर्दे सवाल करते हैं
लेख स्वास्थ्य-योग कोरोना कालः मानसिक स्वास्थ्य का रखें खास ख्याल May 19, 2021 / May 19, 2021 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment प्रो. संजय द्विवेदी वक्त का काम है बदलना, यह भी बदल जाएगा कोविड-19 के इस दौर ने हर किसी को किसी न किसी रूप में गंभीर रूप से प्रभावित किया है । किसी ने अपना हमसफर खोया है तो किसी ने अपने घर-परिवार के सदस्य,दोस्त या रिश्तेदार को खोया ह । इन अपूरणीय क्षति का […] Read more » कोरोना काल कोरोना कालः मानसिक स्वास्थ्य
कविता गंगा मैया की पुकार May 19, 2021 / May 19, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अस्थियां प्रवाहित होती थी मुझमें,अब लाशे निरंतर बहती है मुझमें।और अब कितने पाप धोऊ सबके,ये गंगा मैया कह रही है हम सबको। जिस देश में पवित्र गंगा बहती है,अब पवित्र गंगा में लाशे बहती है।कैसा बुरा समय अब आ गया है,जब मुर्दों की बुरी गति होती है।। थक गई हूं मै पापियों के पाप धोते […] Read more » Call of Ganga maiya गंगा मैया की पुकार
लेख समाज स्वच्छ जल से आज भी वंचित हैं आदिवासी May 19, 2021 / May 19, 2021 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment सूर्यकांत देवांगन रायपुर, छत्तीसगढ़ आधुनिकता के इस दौर में जब शहर के तकरीबन हर दूसरे-तीसरे घर के लोग आरओ का फिल्टर पानी पीते हैं तो वहीं देश के ग्रामीण इलाकों में कुछ ऐसे भी गांव हैं जहां वर्षों से सरकारी तंत्र की अनदेखी के कारण लोगों को पीने के लिए साफ पानी तक नसीब नहीं […] Read more » Tribals are still deprived of clean water स्वच्छ जल से आज भी वंचित हैं आदिवासी
कविता तब मिलेगी मुक्ति जातिवाद से May 19, 2021 / May 19, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआरक्षण शब्द घृणित हो चुका शब्द हरिजन सा,मगर छुपके छुपाके सबको चाहिएआरक्षण पिछड़े, आदिवासी, हरिजन के जैसा! अब आरक्षण मिला संपूर्ण भारत जन को,हरिजन-अंत्यज, पिछड़ेजन,अर्थहीन से समग्र ब्राह्मण जाति तक को! जब से आरक्षण ब्राह्मण को मिला,तब से उपाधि ‘हरिजन’ ‘राम’ जैसे आरक्षित शब्दघृणित नहीं और पूर्वाग्रह मुक्त सा भी लगने लगा! अब […] Read more » liberation from casteism Then you will get liberation from casteism तब मिलेगी मुक्ति जातिवाद से
कविता धन दौलत पर न कर इतना गुमान May 19, 2021 / May 19, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment धन दौलत पर न कर इतना गुमान,ये हाथ का मैल है धुल ही जाएगा।न कुछ लाया था न कुछ ले जायगा,यही पर सब कुछ ही रह जाएगा।। बनाये थे जो तूने महल दुम्हले,क्या तू इनको साथ ले जाएगा ?खड़े रहेंगे ये सभी यही पर बन्दे,साथ कुछ भी न तू ले जाएगा।। बांट देना अपने दोनों […] Read more » धन दौलत पर न कर इतना गुमान
मनोरंजन लेख स्वातंत्र्यवीर सावरकर पर ‘द वीक’ का माफ़ीनामा May 19, 2021 / May 19, 2021 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Leave a Comment लोकेन्द्र सिंह ‘द वीक’ पत्रिका ने स्वातंत्र्यवीर सावरकर पर लिखे गए झूठे और अपमानजनक लेख के लिए माफी मांगी है। ‘द वीक’ की यह माफ़ी राष्ट्रभक्त लोगों की जीत है और महापुरुषों का अपमान करने वाले संकीर्ण मानसिकता के लोगों की पराजय। निरंजन टाकले नाम के पत्रकार का एक लेख ‘द वीक’ ने 24 जनवरी, […] Read more » Swatantravir Savarkar The Week द वीक' का माफ़ीनामा