लेख विष्णुगुप्त चाणक्य कौटिल्य October 7, 2020 / October 7, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकईसा पूर्व तीन सौ पचास में चमकाएक सितारा भारत भूमि मगध में,ब्राह्मण चणक का पुत्र विष्णुगुप्तचाणक्य कौटिल्य; कूटनीतिज्ञ गुरुमगध सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का! न भूतो न भविष्यति विश्वभर मेंअर्थशास्त्र व राजनीति की हस्ती,उसने जो लिखा वो मानव नीति,उसने जो दिया ज्ञान भूमंडल कोचिंतन है भारतीय मस्तिष्क का! चाणक्य थे मगध के अर्थशास्त्री,उन्होंने जो […] Read more » Vishnugupta Chanakya Kautilya विष्णुगुप्त चाणक्य कौटिल्य
कविता परिवर्तन October 7, 2020 / October 7, 2020 by डॉ. ज्योति सिडाना | Leave a Comment अचानक कैसे बदल जाता है सब कुछराह चलते चलते आदमी तक बदल जाता है।गांव से शहर जाने वाले का पता बदल जाता हैऔर तो और चेहरे का नकाब बदलता है हर पल।मुझे लगता है सिर्फ नहीं बदलता तो जनवादमूर का ‘यूटोपिया’ और समाजवाद का वह स्वप्न‘प्रत्येक से उसकी योग्यता अनुसार, प्रत्येक को उसकी आवशयकतानुसार’।पिछले 73 […] Read more » परिवर्तन
कविता रिश्तों का भ्रम October 7, 2020 / October 7, 2020 by डॉ. ज्योति सिडाना | Leave a Comment हर रिश्ते की बुनियाद में स्वार्थ छिपा है,हर बात के पीछे कुछ न कुछ भावार्थ छिपा है,पैसों की इस दुनिया में भावनाओं का क्या काम,खोखले हैं रिश्ते सारे रख लो चाहे कोई भी नाम।जिसने खामोशी को बोलते, उदासी को चहकते नहीं देखा,धूप को ठिठुरते, आकाश को छटपटाते नहीं देखा,सागर को तरसते और आंसू को हंसते […] Read more » the illusion of relations रिश्तों का भ्रम
कविता नारी October 7, 2020 / October 7, 2020 by डॉ. ज्योति सिडाना | Leave a Comment उठो, जागो और लड़ोखुद के आत्मसम्मान के लिएखुद के अस्तित्व के लिए।सुना है न, भगवान भीउनकी मदद करता हैजो अपनी मदद खुद करते है।तो फिर इंतजार क्योंकिसी और से उम्मीद क्योंबहुत बनी तू सीता, द्रोपदीनिरीह बना तुझे लाज सौप दीजब चाहा प्यार कर लियाजब चाहा तलवार घोंप दी।कठुआ, दिल्ली, उन्नाव, हाथरसबहुत हुआ ये चीत्कार बसरूक […] Read more » poem on women नारी
कविता आर्य कौन, कहां से आए October 7, 2020 / October 7, 2020 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकआर्य कौन है?आर्य कहां से आए?यह आज भी पहेली हैकोई नही बुझा पाए हैंयह गुत्थी खुलती नहीकोई खोल नही पाए हैंसभी धारणा भटकाए! आर्य कौन थे?आर्य कहां से आए?आर्य यहां उग आए थेयहीं आर्यावर्त बसाए थेपूरी वसुधा में छाए थेधरा में स्वर्ग बसाएआर्य भारतवर्ष के! आर्य यही के थेआर्य नही बाहर केआर्य नही […] Read more » who are arya and from where do they came आर्य कौन
दोहे कितने कल्पों से संग रहा! October 7, 2020 / October 7, 2020 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment कितने कल्पों से संग रहा,कितने जीवन ग्रह छुड़वाया;रिश्ते नाते कितने सहसा,मोड़ा तोड़ा छोड़ा जोड़ा! परिवार सखा जीवन साथी,वह बना रहा सब में साक्षी;हर राही से वह मिलवाया,हर साथी सोम सुधा लाया! सब छूटे टूटे या रूठे,कुछ ही बँध पाए प्रभु खूँटे;माधुर्य मनोहर उनका था,अपनापन उनसे लगता था! हर कोई कहाँ ढ़िंग रह पाता,संस्कार अलग सबका […] Read more » कितने कल्पों से संग रहा
दोहे झरने की हर झरती झलकी! October 7, 2020 / October 7, 2020 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment झरने की हर झरती झलकी,पुलकी ललकी चहकी किलकी;थिरकी महकी कबहुक छलकी,क्षणिका की कूक सुनी कुहकी! कब रुक पायी कब देख सकी,रुख़ दुख सुख अपना भाँप सकी;बहती आई दरिया धायी,बन दृश्य विवश धरिणी भायी! कब पात्र बनी किसकी करनी,झकझोर बहाया कौन किया;कारण था कौन क्रिया किसकी,सरका चुपके मग कौन दिया! प्रतिपादन आयोजन किसका,क्या सूत्रधार स्वर सूक्ष्म […] Read more » झरने की हर झरती झलकी!
पर्यावरण लेख वनाग्नि व समुद्र में तेल रिसाव से नष्ट हो रही है जैव विविधता October 7, 2020 / October 7, 2020 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment –अशोक “प्रवृद्ध” इस पृथ्वी पर विकसित विविध जीवन मानव की अनेक आवश्यकताओं को आदिकाल से ही पूर्ण करता रहा है, और आज भी कर रहा है। प्रकृति में अनेकानेक प्रकार के पादप एवं जीव-जन्तु परिस्थितिक तन्त्र के अनुरूप विकसित एवं विस्तारित हुए हैं तथा जब तक पर्यावरण अनुकूल रहता है, उनका जीवन चक्र क्रमिक रूप […] Read more » Biodiversity is being destroyed due to oil spills in forest and sea तेल रिसाव से नष्ट हो रही है जैव विविधता नष्ट हो रही है जैव विविधता वनाग्नि व समुद्र में तेल रिसाव
लेख शख्सियत हिन्दी पत्रकारिता के ‘माणिक’ मामाजी October 7, 2020 / October 7, 2020 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Leave a Comment प्रखर संपादक माणिकचंद्र वाजपेयी उपाख्य ‘मामाजी’ की 101वीं जयंती पर विशेष लोकेन्द्र सिंह ‘मन समर्पित, तन समर्पित और यह जीवन समर्पित। चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूँ’। कवि रामावतार त्यागी की यह पंक्तियां यशस्वी संपादक माणिकचंद्र वाजपेयी उपाख्य ‘मामाजी’ के जीवन/व्यक्तित्व पर सटीक बैठती हैं। मामाजी ने अपने ध्येय की साधना […] Read more » माणिकचंद्र वाजपेयी मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी
लेख शख्सियत मामा माणिकचंद: एक ध्येय समर्पित पत्रकार October 6, 2020 / October 6, 2020 by डॉ. पवन सिंह मलिक | Leave a Comment डॉ. पवन सिंह मलिक भारतीय पत्रकारिता में मूल्यों को स्थापित करने में अनेक नामों की एक लंबी श्रृखंला हमको दिखाई देती है। लेकिन उन मूल्यों को अपने जीवन का ध्येय बना पूरा जीवन उसके लिए समर्पित कर देना और उसी ध्येय की पूर्ति के लिए जीवन भर कलम चलाना, ऐसा कोई नाम है तो वो […] Read more » Mama Manikchand मामा माणिकचंद
व्यंग्य ‘स्वादु’ जैसा स्वाद लिए है ये ‘साडनफ्रोइडा’ October 6, 2020 / October 6, 2020 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment सुशील कुमार ‘नवीन’ दुनिया जानती है हम हरियाणावाले हर क्षण हर व्यक्ति वस्तु और स्थान में ‘संज्ञा’ कम ‘स्वाद’ ज्यादा ढूंढते हैं। ‘सर्वनाम’ शब्दों का प्रयोग करना भी कोई हमसे सीखे। और उनकी विशेषता बताने वाले ‘विशेषण’ शब्दों के प्रयोग के क्या कहने। वैसे हमें ‘प्रविशेषण’ शब्दों में भी महारत हासिल है पर हम उनकी […] Read more » साडनफ्रोइडा स्वाद लिए है ये साडनफ्रोइडा
लेख समाज आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम October 5, 2020 / October 5, 2020 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment सूर्यकांत देवांगन भानुप्रतापपुर, कांकेर छत्तीसगढ़ प्रधानमंत्री ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने का अभियान कुछ महीनों पहले ही शुरू किया है, लेकिन छत्तीसगढ़ की एक ग्रामीण महिला रेणुका ढीमर ने इसकी शुरूआत आज से चार साल पहले ही कर दी थी। खेती और मजदूरी करके गुजर-बसर करने वाले परिवार की इस बहू ने 2016 में प्रशासन से […] Read more » A step towards self-reliant India आत्मनिर्भर भारत