कविता साहित्य काश हर घर आँगन हो January 10, 2020 / January 10, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment कितना अच्छा था जब हम बच्चे थे तब घर के आँगन में इकट्ठा हो जाता था पूरा परिवार। कैलाश,शंकर, विनिया चन्दा आँगन में खूब मस्ती करते थे तब आँगन किसी खेल के मैदान से कमतर नहीं था जिसमें समा जाता था सारा मोहल्ला घर-द्वार। मकान से जुड़ा हुआ आँगन आँगन से बाहर तक घर का […] Read more »
कविता जीवन का अधूरापन January 10, 2020 / January 10, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment मुझे याद है प्रिय शादी के बाद तुम दूर-बहुत दूर थी मैं तुम्हारे वियोग में दो साल तक अकेला रहा हॅू। बड़ी शिद्दत के बाद तुम आयी थी तुम्हारे साथ रहते तब दिशायें मुझे काॅटती थी और तुम अपनी धुन में मुझसे विलग थी। तुम्हारा पास होना अक्सर मुझे बताता जैसे जमीन-आसमान गले मिलने को […] Read more »
टॉप स्टोरी लेख निर्भया के दोषियों को फांसी अपराधियों के लिए सुधर जाने का सबक January 9, 2020 / January 9, 2020 by दीपक कुमार त्यागी | Leave a Comment दीपक कुमार त्यागी देश में महिलाओं को उपभोग की वस्तु मानकर उनकी अस्मिता से खिलवाड़ करने वालों सुधर जाओं, अब ऐसे अपराधियों को देश में फांसी लगने की शुरुआत बहुत जल्द होने वाली है। 16 दिसंबर 2012 की स्याह रात को जब लोग चैन से अपने घरों में सो रहे थे, तब देश का दिल […] Read more » nirbhaya gang rape sentence to death to nirbhaya gang rapist निर्भया कांड निर्भया के दोषियों को फांसी
धर्म-अध्यात्म लेख कलिकाल का मोक्ष द्वार गंगासागर January 9, 2020 / January 9, 2020 by जगदीश यादव | Leave a Comment सागरद्वीप यानी गंगासागर में स्थित कपिलमुनि मंदिर कितना प्राचीन है इसके बारे में कोई भी दावे से कुछ नहीं कह सकता है। लेकिन कहा जाता है कि आज से पांच हजार वर्ष पहले ही आमलोगों को उक्त धर्म स्थली की जानकारी मिल गयी थी।.योगोश चंद्र राय ने अपने ‘पूजापार्वन‘ ग्रंथ में गंगा सागर का उल्लेख […] Read more » ganga sagar कलिकाल का मोक्ष द्वार कलिकाल का मोक्ष द्वार गंगासागर गंगासागर
कविता नवा साल मंगल होय, दुइ हजार बीस।। January 9, 2020 / January 9, 2020 by अजय एहसास | Leave a Comment जे कबहू ना बोलत रहा, रहा दूरि अउ चाहे नियर आज ऊहै कहत बाटै, हैप्पी न्यू इयर ह्वाटस्अप पै मैसेज देय, हाथ जोड़ि सिम्बल दुइ हजार उन्निस मा, बन्द रहा बोलचल बिटवा कहै बाप से तू बाटा उन्नीस ता हम बाटी बीस नवा साल मंगल होय, दुइ हजार बीस।। केहू रहै भूखा नंगा, फटेहाल भीखमंगा […] Read more » नवा साल मंगल होय
कविता समय की मार।। January 9, 2020 / January 9, 2020 by अजय एहसास | Leave a Comment जिस्म मेरा यूं समय से लड़ रहा है सांसों को भी आजमाना पड़ रहा है आजमाना चाहूं गर जीवन को मैं स्वयं को भी भूल जाना पड़ रहा है। जिनकी आंखों मे भरी है नफरतें उनसे भी आँखें मिलाना पड़ रहा है दूसरों को सौंपता हूं खुद को जब तब स्वयं से दूर जाना पड़ […] Read more »
कविता साहित्य अब तो पुरानी यादे रह गयी January 9, 2020 / January 9, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मिस्सी रोटी मक्खन वाली,छाछ मलाई चली गयी | खाट खटोला पटरा पटरी,दरी चटाई चली गयी || भाई बहन की धमाचौकड़ी,मार पिटाई चली गयी | ढोलक घुंघरू गीत ठठोली,रोती बिदाई चली गयी || इन्तजार इकरार लुकाछिपी,प्रेम पत्र लिखाई चली गयी | सिर पर चुन्नी नीची नजरे,अब वे कहाँ ये चली गयी || कलम स्लेट पैन होल्डर,दवात […] Read more »
लेख साहित्य पण्डित-पंडताई के बीच झगड़ा January 7, 2020 / January 7, 2020 by आत्माराम यादव पीव | 1 Comment on पण्डित-पंडताई के बीच झगड़ा लेखक आत्माराम यादव पीव (आकाश मार्ग से नारद जी हाथों में वीणा लिये भारत के एक गाँव की ओर प्रस्थान कर रहे है और जॅपते जा रहे है- श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि …. श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि . वे गाँव की सीमा में प्रवेश करते है तभी उन्हें एक भक्त मिलता है) भक्त- […] Read more » पण्डित-पंडताई के बीच झगड़ा
लेख सार्थक पहल कुछ अच्छा खरीदे देशहित के लिए January 6, 2020 / January 6, 2020 by आनंद जोनवार | Leave a Comment आध्यात्मिकता की ऊंचाई को छूना है तो साधना अपने लिए नहीं दूसरों के लिए होना चाहिए।आपकी साधना तभी सार्थक है जब उससे दूसरों को लाभ मिलें। तभी सफल साधना मानी जायेगी।करुणा दया सैद्धांतिक के साथ साथ व्यवहार में होना चाहिए ।पेटियों में रुपए डाल देना मूर्तियों पर चढ़ा देना ही दान नहीं होता। दान अकेले […] Read more » हथकरघा
कविता ईश्वर को नौकर रख सकता है इंसान January 3, 2020 / January 3, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment जिस दिन ईश्वर ने अपना वसीयतनामा इंसान के नाम लिख दिया इंसान ने खोद डाली सारी खदानें सोना,चान्दी, हीरे-मौती निकाल कर अपनी तिजौरी भर ली। धरती की सारी सुरंगे स्वार्थी इंसान ने खोज ली और सारी तिजौरियों को बहुमूल्य रत्न भण्डारों से भर ली। उसने पहले नदियों के पानी को बेचा नदियों के किनारों की […] Read more » ईश्वर को नौकर रख सकता है इंसान
कविता छेदवाली नाव पर सवार पत्रकार January 3, 2020 / January 3, 2020 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment मुद्दत से चली आ रही पत्रकारिता की पुरानी कई छिद्रवाली नाव पर सवार है मेरे शहर के तमाम पत्रकार इस पुरानी नाव में कुछ छेद पार कर चुके लोगों ने तो कुछ छेद इस नाव पर सवार लोगों ने किये है। इस पुरानी नाव को चट्टानों के बीच भयंकर तूफानों को भी झेलना होता है […] Read more » पत्रकार
कविता नववर्ष का अभिनन्दन January 3, 2020 / January 3, 2020 by शकुन्तला बहादुर | Leave a Comment Read more » नववर्ष का अभिनन्दन