कविता मानवता का आज अनूठा उदहारण देखा | November 23, 2019 / November 23, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मानवता का आज अनूठा उदहारण देखा | बीमार बे सहारा लोगो का अच्छा जीवन देखा || मानवता जिनको देख कर बिलख रही थी | आज गुरुकुल आश्रम में उनको हँसते देखा || कर्मयोगी रवि ने जो कभी था सपना देखा | उस सपने को हमने आज पूरा होता देखा || वह मानव ही नहीं,वरन है […] Read more » मानवता
व्यंग्य स्वर्ग में ऑखों देखी हिंसा भी नहीं छपवा पाये पत्रकार November 21, 2019 / November 21, 2019 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीवस्वर्ग में लोकतंत्र नहीं राजतंत्र है। इन्द्र वहॉ के लोकपाल है जिनके राजकाज में कोई भी स्वर्गवासी या देवता दखल नहीं देते सभी खुश है, आनन्द से है मानो ब्रम्हानन्दी हो गये है। होशंगाबाद के पत्रकार प्रश्न कर चुके थे कि अगर सब आनंन्दमय है तो […] Read more » स्वर्ग में ऑखों देखी हिंसा
व्यंग्य स्वर्गलोक में पत्रकारो का हँगामा November 21, 2019 / November 23, 2019 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव पत्रकार की सारी नस्ले जो दुनिया में कहीं नहीं है, होशंगाबाद में मिल जायेगी इसलिये नर्मदातट पर बसा होशंगाबाद नगर भूलोक का अजीब शहर बन गया है। यहॉ के लोग दुनिया में सबसे अनूॅठे है। नेताओं का तो क्या कहना, बड़े बिरले है जिन्हें म्युजियम मे होना चाहिये वे होशंगाबाद में […] Read more » स्वर्गलोक में पत्रकारो का हँगामा
लेख ” श्रीराम की बासी” को भागीरथ की दरकार November 19, 2019 / November 19, 2019 by संजय चाणक्य | Leave a Comment संजय चाणक्य ” बचाकर रखना बासी को जरूरत कल भी बहुत होगी। यकीनन आने वाली पीढ़ी इतनी पाक भी नही होगी।।” भगवान राम के इच्छा से नारायणी से निकलकर कुशीनगर जनपद के विभिन्न श्रेत्रो से होकर तकरीबन साठ किलो मीटर की यात्रा तय करने के बाद पुन: नारायणी से समाहित हो जाने वाली “बासी नदी […] Read more » बासी नदी
कविता रोम रोम में हमारे ओम भर जाये November 19, 2019 / November 19, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment हे प्रभु ज्ञान दाता,ज्ञान हमको दीजिये | शीघ्र हमारे दुर्गणों,को दूर हमसे कीजये || लीजिये हमको शरण में,हम सदाचारी बने | ब्रह्मचारी धर्म रक्षक और वीर व्रतधारी बने || रोम रोम में ओम भर जाये हमारे | प्रभु, ऐसी शक्ति हमको दीजिये || छल कपट से कोसो दूर रहे हम प्रभु | बस अपनी भक्ति […] Read more » रोम रोम में हमारे ओम
लेख विधि-कानून सूचना अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ,जबाबदेह तंत्र और असली चुनौती की दुरभिसंधि November 18, 2019 / November 18, 2019 by डॉ अजय खेमरिया | Leave a Comment अफसरशाही की शरणस्थली बनी सूचना अधिकार की सुविधाएं डॉ अजय खेमरियाभारत का सुप्रीम कोर्ट सूचना के अधिकार कानून के दायरे में आएगा।चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के ही सेक्रेटरी जनरल और लोक सूचना अधिकारी की तीन याचिकाओं को खारिज करते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है।उत्तरदायी […] Read more » Supreme Court असली चुनौती की दुरभिसंधि जबाबदेह तंत्र जबाबदेह तंत्र और असली चुनौती की दुरभिसंधि सुप्रीम कोर्ट सूचना अधिकार सूचना अधिकार की सुविधाएं सूचना अधिकार: सुप्रीम कोर्ट
मनोरंजन व्यंग्य सिनेमा तो क्यों धन संचय November 18, 2019 / November 18, 2019 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment हाल ही में एक ट्वीट ने काफी सुर्खियां बटोरी ,”पूत कपूत तो क्यों धन संचय, पूत सपूत तो क्यों धन संचय” जिसमें अमिताभ बच्चन साहब ने सन्तान के लिये धन एकत्र ना करने का उपदेश दिया है लोगों ने इस वाक्य को आई ओपनर की संज्ञा दी है ।लोग बाग़ ये अनुमान लगा रहे हैं […] Read more » पूत कपूत तो क्यों धन संचय पूत सपूत तो क्यों धन संचय
दोहे तकि तकि कें वाण मारा करे ! November 18, 2019 / November 18, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment तकि तकि कें वाण मारा करे, प्राण हुलसिया; प्राँगण प्रकृति के खेला किए, जीव उमरिया ! हर आत्म रही अपनी, अखेटन की ठिठोरन; हर खाट बैठे वे ही रहे, चितेरे से बन ! हर ठाठ-बाट हर ललाट, ललक लास्य भर; हर ओज खोज औ सरोज, सौम्य सुधा क्षर ! साहस भरोसा भाव चाव, ताव ख्वाब […] Read more » तकि तकि कें वाण मारा करे !
लेख विज्ञान आईआईटी में आत्महत्याएं बदनुमा दाग November 18, 2019 / November 18, 2019 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ( आईआईटी ) दिल्ली की एक छात्रा ने परिसर में ही अपने छात्रावास की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस की शुरुआती जांच कहती है कि इसका कारण भी अवसाद ही है, जैसाकि अक्सर आत्महत्याओं का कारण यही होता है। यह घटना तथाकथित समाज एवं राष्ट्र […] Read more » suicides in iits आईआईटी में आत्महत्याएं
लेख शख्सियत समाज ….और जिंदगी की आखिरी जंग हार गए गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह November 18, 2019 / November 18, 2019 by मुरली मनोहर श्रीवास्तव | Leave a Comment – मुरली मनोहर श्रीवास्तव दुनिया में गणित के बूते अपनी पहचान कायम करने वाले महान गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह आज ज़िन्दगी की जंग आखिरकार हार गए। वृहस्पतिवार की सुबह इन्होंने पटना के पीएमसीएच में आखिरी सांसें ली। कभी इस गणितज्ञ ने आइंस्टीन के सिद्धांत को भी चुनौती दे दी थी। बिहार के भोजपुर जिले […] Read more » mathematician vashishth narayan singh गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह
कविता बेटी जब पैदा नहीं होगी,तब बहू कहाँ से लाओगे ? November 15, 2019 / November 15, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बेटी जब पैदा नहीं होगी,तब बहू कहाँ से लाओगे ? बहु जब घर नहीं आयेगी,तब परिवार कैसे बढाओगे ? आज की बेटी कल बहू बनेगी, सारी सृष्टि इसी तरह चलेगी | बेटा और बेटी है दोनों जरुरी, वर्ना सृष्टि हो जायेगी अधूरी || भाई को बहन कहाँ से मिलेगी,जब बेटी की भ्रूण हत्या होगी | […] Read more » तब बहू कहाँ से लाओगे ? बेटी जब पैदा नहीं होगी
दोहे आज कोई जग ख़िताब ! November 15, 2019 / November 15, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment आज कोई जग ख़िताब, चह कहाँ हैं पा रहे; मन हमारे आज ख़्वाब, आ कहाँ हैं पा रहे ! जो भी कुछ गा पा रहे, मुक्त भव से आ रहे; अलूनी सी आत्म ध्वनि में, सलौनी छवि दे रहे ! पढ़ न पाते हम किताब, रह न पाते रख रख़ाव; रख न पाते कोई हिसाब, […] Read more » आज कोई जग ख़िताब !