दोहे जब मन की मेरी बात सुने मेरे सँवरिया ! September 18, 2019 / September 18, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment जब मन की मेरी बात सुने मेरे सँवरिया; आनन्द गंग बहे चले मेरे प्रहरिया ! लहरों में घुमा प्रस्तर तर आए नज़रिया; बृ़क्षों की व्यथा उर में रखे चमके वे दुनियाँ ! बादल में घुमड़ सूर्य रमण देखे वे नदिया; वायु में रमे हिय में फुरे मन वन फिरिया ! हर पात सिहर ताप विहर […] Read more » जब मन की मेरी बात सुने मेरे सँवरिया !
दोहे सोचो मत ऐसा कुछ भी नहीं ! September 16, 2019 / September 16, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment सोचो मत ऐसा कुछ भी नहीं अपनी दृष्टि का फेर सभी; पाषाण औ पौधे पूर्ण सुधी, ना हीन भाव उर धारो जी ! तुम ब्रह्म बृहत सृष्टि देखो, कर्मों को कर जीवन झाँको; अपनापन जग पा जाओगे, जब ऊर्द्ध्व भाव रम जाओगे ! क्यों जाति पाँति में बँधकर तुम, श्रँखला सँजोये स्वयं रहे; अपनी आस्था […] Read more »
दोहे कितने ही दर्द सर्द मिले ! September 14, 2019 / September 14, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment कितने ही दर्द सर्द मिले, सुरमयी दुनियाँ; उर में थीं कितनी व्याधि रखी, विरहिन बुधिया ! सुधियों की बरातों में बही, ध्यान कब रही; ज्ञानों की गरिमा उलझे-सुलझे, गूढ़ मति गही ! सामान्य सरोजों की भाँति, खिल कभी सकी; किलकारी बालपन की पुन:, पक के वो तकी ! तत्काल काल गति में बही, अकाली बनी; […] Read more »
लेख विविधा नए मोटर व्हीकल एक्ट से मेरा देश परेशान September 12, 2019 / September 12, 2019 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – नया बना मोटर व्हीकल एक्ट देश को राहत पहुंचाने की बजाय परेशानी का सबब बन रहा है। अनेकों विरोधाभासों एवं विसंगतियों से भरे इस कानून से मेरा देश परेशान है। यह कानून विरोधाभासी होने के साथ-साथ समस्या को और गंभीर बना रहा है। एक नये किस्म के भ्रष्टाचार को पनपने का […] Read more » new motor vehicle act नए मोटर व्हीकल एक्ट
कविता राज हर कोई करना है जग चह रहा ! September 11, 2019 / September 11, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment राज हर कोई करना है जग चह रहा, राज उनके समझना कहाँ वश रहा; राज उनके कहाँ वो है रहना चहा, साज उनके बजा वह कहाँ पा रहा ! ढ़पली अपनी पै कोई राग हर गा रहा, भाव जैसा है उर सुर वो दे पा रहा; ताब आके सुनाए कोई जा रहा, सुनके सृष्टा सुमन मात्र मुसका रहा ! पद के पंकिल अहं कोई फँसा जा रहा, उनके पद का मर्म कब वो लख पा रहा; बाल बन खेल लखते मुरारी रहे, दुष्टता की वे सारी बयारें सहे ! सृष्टि सारी इशारे से जिनके चले, सहज होके वे जगती पै क्रीड़ा करे; जीव गति जान कर तारे उनको चले, कर विनष्टि वे आत्मा में अमृत ढ़ले ! हर निमिष कर्म करके वे प्रतिपालते, धर्म अपना धरे वे प्रकृति साधते; ‘मधु’ है उनका समझ कोई कब पा रहा, अपनी जिह्वा से चख स्वाद बतला रहा ! ✍? गोपाल बघेल ‘मधु’ Read more » राज हर कोई करना है जग चह रहा !
व्यंग्य बप्पा और सेल्फी वाले भक्त September 11, 2019 / September 11, 2019 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल भक्ति की अपनी शक्ति है। भक्ति और उसकी धारा का विच्छेदन और विश्लेषण करना आसान नहीं है। कण-कण में भक्ति का भाव समाया हुआ है। तेरे में मेरे में खड्ग में और खंभ में भी भक्ति विराजमान है। […] Read more » सेल्फी वाले भक्त
व्यंग्य नॉट आउट @हंड्रेड September 9, 2019 / September 9, 2019 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment “ख्वाबों,बागों ,और नवाबों के शहर लखनऊ में आपका स्वागत है” यही वो इश्तहार है जो उन लोगों ने देेखा था जब लखनऊ की सरजमीं पर पहुंचे थे। ये देखकर वो खासे मुतमइन हुए थे । फिर जब जगह जगह उन लोगो ने ये देखा कि “मुस्कराइए आप लखनऊ में हैं “तो उनकी दिलफ़रेब मुस्कराहटें कान […] Read more »
लेख मैगसेसे मंच से रविश कुमार ने खूब उगला जहर September 6, 2019 / September 6, 2019 by संजय सक्सेना | 2 Comments on मैगसेसे मंच से रविश कुमार ने खूब उगला जहर हिन्दी पत्रकारों,मोदी सरकार,मिशन चन्द्रयान सबकी उड़ाई खिल्ली संजय सक्सेना छक्ज्ट इंडिया और उसके मैनेजिंग एडिटर […] Read more » Magsaysay Award to Ravish Kumar Ravish Kumar रविश कुमार
लेख ज्ञान के महासागर थे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन। September 6, 2019 / September 6, 2019 by आई. पी ह्यूमन | Leave a Comment प्रथम भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्ण की आज 131वीं जयंती है।उनके जन्म दिवश को शिक्षक दिवश के रूप में हर वर्ष 5 सितम्बर को देश भर में बढ़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है।बदलते सामाजिक परिवेश और भारतीय पारम्परिकता और भारतीय संस्कृति के आधुनिकता के दौर में जहाँ गुरु और शिष्य के बीच मात्र […] Read more » डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
कविता शिक्षक कौन है ? September 6, 2019 / September 6, 2019 by राकेश कुमार पटेल | Leave a Comment शिक्षक कौन है ? राही सा मन को, राह दिखा दे जिसे चलना न आये, उसे चलना सिखा दे जिसे हँसना न आये , उसे हँसाना सिखा दे जिसे रोना न आये , उसे रोना सिखा दे जिसे खो कर पाना न आये, उसे पाना सिखा दे भूले भटके को , घर का पता बता […] Read more »
कविता शिक्षक ने शिक्षा पा ली September 3, 2019 / September 3, 2019 by डॉ कविता कपूर | Leave a Comment समाज बोला तू तो शिक्षक है,भविष्य निर्माता है, देश के कर्णधार का, तू ही तो भाग्य विधाता है। नव निर्माण का लिए संकल्प, निकल पड़ा वह निर्विकल्प, राह में टकराई संचार क्रांति, बलखाती- इठलाती बोली, “मैं हूं ज्ञान का भंडार, खोल दिए हैं मैंने सफलता के सभी द्वार, तू तो है बालक नादान, पा न […] Read more » Education शिक्षक शिक्षक ने शिक्षा पा ली शिक्षा
कविता कब छलकि जाय मन की गगरी ! September 2, 2019 / September 2, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment कब छलकि जाय मन की गगरी, कौन जानता; वो डाल डाल पात पात, हमको नचाता !सम्बंध गाढ़े और हलके, समय ढ़ालता; अनुभव कराके नये नये, चित्त रचाता ! भोजन का भेद आत्मशोध, विचारों को शुध; दो व्यक्तियों को विलग करा, वो ही मिलाता !क्या होगा वक़्त बाद, कहाँ इंसान जानता; संस्कार भोग हमरे करा, हमको […] Read more » कब छलकि जाय मन की गगरी !