आर्थिकी लेख अब गरीबी नहीं, अमीरी समस्या है December 4, 2019 / December 4, 2019 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ः ललित गर्ग:-देश की प्रति व्यक्ति आय मार्च 2019 को समाप्त वित्त वर्ष में 10 प्रतिशत बढ़कर 10,534 रुपये महीना पहुंच जाने का अनुमान है। इससे पहले वित्त वर्ष 2017-18 में मासिक प्रति व्यक्ति आय 9,580 रुपये थी। प्रति व्यक्ति औसत आय का बढ़ना देश की समृद्धि का स्वाभाविक संकेत है। आम आदमी की औसत […] Read more » difference increasing between poverty snd rich poverty अमीर और ज्यादा अमीर गरीब और ज्यादा गरीब गरीबी प्रति व्यक्ति औसत आय
लेख कब तक सताई जाती रहेंगी, अबला निर्भयाएं! December 3, 2019 / December 3, 2019 by लिमटी खरे | Leave a Comment (लिमटी खरे) लगभग सात साल पहले 2012 में जब दिल्ली में निर्भया काण्ड के चलते जनाक्रोश चरम पर था, तब माना जा रहा था कि केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा रियाया के मन को पढ़ लिया जाएगा और इस तरह के जघन्य कृत्यों पर विराम लग पाएगा। एक के बाद एक घटते घटनाक्रमों से […] Read more » hyderabad rape case rape and murder case निर्भया काण्ड
लेख वो 2-3 दिसम्बर की दरम्यानी रात… December 3, 2019 / December 3, 2019 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमार साल उन्नीस सौ चौरासी.. 2-3 दिसम्बर की दरम्यानी रात.. भोपाल के बाशिंदों के लिए यह कयामत की रात थी.. जिन्होंने कयामत शब्द सुना है.. उन्होंने उस दिन महसूस भी किया होगा.. कि कयामत किसे कहते हैं.. इस दिन मैं रायपुर के दाऊ कल्याण सिंह अस्पताल के प्रागंण में था.. कुछ आधी-अधूरी सी खबर […] Read more » Bhopal Gas Tragedy गैस त्रासदी दुनिया की भीषणत औद्योगिक दुर्घटना भोपाल गैस त्रासदी
लेख मैं ककहरा सीख रहा था, वो प्रिंसीपल थे.. December 3, 2019 / December 3, 2019 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमार मैं उन दिनों पत्रकारिता का ककहरा सीख रहा था. और कहना ना होगा कि रमेशजी इस स्कूल के प्रिंसीपल हो चले थे. यह बात आजकल की नहीं बल्कि 30 बरस पुरानी है. बात है साल 87 की. मई के आखिरी हफ्ते के दिन थे. मैं रायपुर से भोपाल पीटीआई एवं देशबन्धु के संयुक्त […] Read more » पत्रकारिता हिन्दी पत्रकारिता प्रशिक्षण कार्यशाला
लेख जहां नारी का सम्मान नहीं होता वहां देवता समान अच्छे मनुष्य नहीं होते December 3, 2019 / December 3, 2019 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on जहां नारी का सम्मान नहीं होता वहां देवता समान अच्छे मनुष्य नहीं होते -मनमोहन कुमार आर्य परमात्मा ने सृष्टि में अनेक प्राणियों को बनाया है जिनमें एक मनुष्य भी है। मनुष्य योनि में मनुष्य के दो भेद स्त्री व पुरुष होते हैं। मनुष्य अल्पज्ञ होता है। इसका अर्थ है कि मनुष्य में जो चेतन अनादि व नित्य जीव है वह अल्प ज्ञान वाला है। उसको पूरा–पूरा ज्ञान […] Read more » Hyderabad mass rape and murder case rape and murder case नारी का सम्मान
दोहे देह कितनी लिये विचर चहता ! December 1, 2019 / December 1, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment देह कितनी लिये विचर चहता, कितने आयाम देखना चहता; आवरण कितने घुसे लख चहता, वरण कितने ही पात्र कर चहता ! कला कितनी में पैठना चहता, ज्ञान विज्ञान की धुरी तकता; राज कितने प्रदेश कर चहता, ताज कितने पहन सतत चहता ! मुक्त पर जब तलक न मन होता, व्यस्त स्तर हरेक रह जाता; त्रस्त […] Read more » देह कितनी लिये विचर चहता !
कविता साहित्य सरकारी हुक्म November 29, 2019 / November 29, 2019 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment कान खोलकर सुन ले बिल्ली, तुरत छोड़ दे चूहे खाना। दिल्ली से गूगल पर आया, आज सबेरे ही परवाना। बड़े खाएंगे छोटों को तो, होगा बहन जुर्म यह भारी। ऐसा वैसा हुक्म नहीं यह, यह तो हुक्म हुआ सरकारी। पूँछतांछ में लगीं बिल्लियाँ, क्या ऐसा आदेश हुआ है। अगर हुआ है सच में ऐसा, ऐसा […] Read more »
लेख परीक्षा प्रणाली में बदलाव के सार्थक कदम November 28, 2019 / November 28, 2019 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – लम्बे अरसे से कहा जा रहा है कि वर्तमान परीक्षा प्रणाली जड़ होकर महज शारीरिक एवं बौद्धिक विकास को प्राथमिकता देती रही है, जबकि मानसिक एवं भावनात्मक विकास भी शिक्षा के महत्वपूर्ण अंग होते हुए भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बौद्धिकता शिक्षा का एक अंग है, पर […] Read more » changes in examination pattern परीक्षा प्रणाली में बदलाव बच्चों को तनावमुक्त बनाये रखना शिक्षा की सर्वोच्च प्राथमिकता वर्तमान परीक्षा प्रणाली
कविता ताले में बैठा” की “होल November 28, 2019 / November 28, 2019 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment बहुत आजकल गुस्सा रहता, ताले में बैठा “की” होल। चाबी डाली और घुमाया। ताला खोला और लगाया। खुलना लगना रोज मशक्कत, सबने हाथ जोर आजमाया। धकम पेल में कोई न समझा, कितने दुःख में है” की” होल. जब जब ताला खुला न भाई। सबने जहमत खूब उठाई। घर के भीतर जाएँ कैसे, सबको आई खूब […] Read more » ताले में बैठा" की "होल
लेख सार्थक पहल खुशी के लिये कम सोचें और ज्यादा जिएं November 26, 2019 / November 26, 2019 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – अपने भीतर झांकने पर पता चलता है कि कई तरह की तमन्नाएं और ख्वाहिशें दुबकी बैठी हैं, जो चैन से जीने नहीं देतीं। कई सवाल हैं, जिनके जवाब तक पहुंचे बिना खुशी एवं महत्वाकांक्षाएं अधूरी ही रहती है। जब दिल खुश होता है तो उसकी रौनक चेहरे पर खुद-ब-खुद झलकने लगती […] Read more » खुशी के लिये कम सोचें ज्यादा जिएं
कविता मानवता का आज अनूठा उदहारण देखा | November 23, 2019 / November 23, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मानवता का आज अनूठा उदहारण देखा | बीमार बे सहारा लोगो का अच्छा जीवन देखा || मानवता जिनको देख कर बिलख रही थी | आज गुरुकुल आश्रम में उनको हँसते देखा || कर्मयोगी रवि ने जो कभी था सपना देखा | उस सपने को हमने आज पूरा होता देखा || वह मानव ही नहीं,वरन है […] Read more » मानवता
व्यंग्य स्वर्ग में ऑखों देखी हिंसा भी नहीं छपवा पाये पत्रकार November 21, 2019 / November 21, 2019 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीवस्वर्ग में लोकतंत्र नहीं राजतंत्र है। इन्द्र वहॉ के लोकपाल है जिनके राजकाज में कोई भी स्वर्गवासी या देवता दखल नहीं देते सभी खुश है, आनन्द से है मानो ब्रम्हानन्दी हो गये है। होशंगाबाद के पत्रकार प्रश्न कर चुके थे कि अगर सब आनंन्दमय है तो […] Read more » स्वर्ग में ऑखों देखी हिंसा