लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-25 December 28, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का चौथा अध्याय और विश्व समाज गीता के इन श्लोकों में यह तथ्य स्पष्ट किया गया है कि संसार में जब अनिष्टकारी शक्तियों का प्राबल्य होता है तो उस अनिष्ट से लडऩे वाली शक्तियों का भी तभी प्राकट्य भी होता है। जब बढ़ता संसार में घोर पाप अनाचार। तभी […] Read more » Featured आज का विश्व कर्मयोग गीता गीता का कर्मयोग विश्व
लेख सबके अटल जी December 27, 2017 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment प्रसिद्द दार्शनिक सुकरात ने कहा था कि “जिस देश का राजा कवि होगा उस देश में कोई दुखी न होगा” – अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल में यह बात चरितार्थ हो रही थी. स्वातंत्र्योत्तर भारत के नेताओं में कुछ ही ऐसे नेता हुए हैं जो विपक्षियों से भी सम्मान पातें हों. और ऐसे जननेता तो […] Read more » Featured प्रधानमन्त्री अटलजी
लेख साहित्य बटेश्वर शिलालेख से उत्पन्न विरोधाभास December 27, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी राजा परमार्दिदेव का परिचय :-गुर्जर प्रतिहार वंश की स्थापना 8वी शताब्दी में उज्जयिनी में हुई थी।उनके वंशज बाद में उज्जयिनी के साथ साथ गंगा यमुना के दोआब क्षेत्र कान्यकुब्ज या कन्नौज पर भी शासन करते रहे। इसी वंश का शासक नागभट्ट द्वितीय का समामनत राजा चन्द्रवर्मन (नन्नुक) ने बुन्देलखण्ड वर्तमान उ. प्र. […] Read more » बटेश्वर शिलालेख
कविता बचपन की यादें December 26, 2017 by राकेश कुमार पटेल | Leave a Comment सोचता हूॅ फिर से एक बार बचपन में चले जाते न कभी समय की चिंता होती न कभी घडी देखते जब बजती स्कूल की घंटी तब किताब, कलम काॅपी समेटते निकल जाते रास्ते पर किसी दोस्त को हंसाते तो किसी को चिढाते जब बजती प्रार्थना की घंटी तब दौड कर आते कतार में सामने वाले […] Read more » Childhood memories
व्यंग्य साहित्य स्वास्थ्य की माँगे खैर, करे सुबह की सैर December 23, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment पृथ्वी, बिना किसी बुलावे के या भुलावे के निरंतर सूर्य के चक्कर लगाती है। हालाँकि अभी तक यह सिद्ध नहीं हो पाया है कि निरंतर चक्कर लगाने के पीछे ,पृथ्वी की सूर्य के प्रति दीवानगी है या केवल स्वास्थ्य संबधी जागरूकता। वैज्ञानिक, अपने ज्ञान को ललकारते हुए बताते है कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती […] Read more » करे सुबह की सैर स्वास्थ्य की माँगे खैर
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-24 December 23, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य    गीता का चौथा अध्याय और विश्व समाज अभी तक हमारे विश्व नेता वह नहीं बोल रहे हैं जो उन्हें बोलना चाहिए। उनके बोलने में कितनी ही गांठें लगी रहती हैं। बोलने में स्पष्टता नहीं है। छल नीति है। इसीलिए विश्वशान्ति के मार्ग में अनेकों बाधाएं हैं। इन बाधाओं को […] Read more » Featured आज का विश्व कर्मयोग गीता गीता का कर्मयोग
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-23 December 23, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का चौथा अध्याय और विश्व समाज गीता का चौथा अध्याय अभी पिछले दिनों दशहरा (30 सितम्बर 2017) के पावन पर्व पर देश के राष्ट्रपति भवन में पहली बार इस पर्व से सम्बन्धित विशेष कार्यक्रम रखा गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस अवसर पर कन्या पूजन […] Read more » Featured आज का विश्व कर्मयोग गीता गीता का कर्मयोग
लेख महमूद गजनवी ने 25 वर्षों तक तैयारी के बाद किया सोमनाथ पर आक्रमण December 21, 2017 / December 23, 2017 by हरिहर शर्मा | 1 Comment on महमूद गजनवी ने 25 वर्षों तक तैयारी के बाद किया सोमनाथ पर आक्रमण परवेज महमूद सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारतीय उपमहाद्वीप को लूटने के उद्देश्य से हमलावर यहाँ आते रहे और इस धरा को रक्तरंजित करते रहे | ख़ास बात यह है कि इन हमलावरों द्वारा किये गए अत्याचारों पर पाकिस्तान के इस्लामाबाद में रहने वाले पाकिस्तान आर्म्ड फ़ोर्स के सेवानिवृत्त ग्रुप कप्तान परवेज महमूद ने […] Read more » Featured Mahmood Gaznavi Mahmood gaznavi attacked India महमूद गजनवी
व्यंग्य साहित्य वे बीच में खड़े हैं December 20, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment गुजरात के चुनाव आखिरकार सम्पन्न हो ही गये। दो महीने से बड़ा शोर था उनका। उस शोर में बेचारे हिमाचल प्रदेश को तो लोग भूल ही गये। बात ही कुछ ऐसी थी। परिणाम देख-सुनकर शर्मा जी बहुत उदास हैं। – ये ठीक नहीं हुआ वर्मा। – क्यों, जो भी हुआ, जनता ने किया है। क्या […] Read more » Featured बीच मणिशंकर अय्यर
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-22 December 20, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment गीता का तीसरा अध्याय और विश्व समाज जब व्यक्ति अपना कार्य तो अधर्म पूर्वक करे अर्थात डाक्टर रोगियों की सेवा न करके उनकी जेब काटे, व्यापारी शुद्घ वस्तु न देकर मिलावट करे इत्यादि और सुबह-शाम मन्दिरों में घण्टे घडिय़ाल बजाये तो ऐसा कार्य अधर्म=निज स्वभाव के अनुसार न होकर भयजनक होता है, पाखण्ड होता है। […] Read more » Featured आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग गीता का तीसरा अध्याय विश्व समाज
लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-21 December 19, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का तीसरा अध्याय और विश्व समाज आज के संसार में दुर्जन आतंकी संगठन सिर उठा रहे हैं। इनके विरूद्घ सारे संसार के लोग यदि पूर्ण मनोयोग से उठ खड़े हों तो विश्व को आतंकवाद से मुक्त होने में कोई देर नहीं लगेगी। कर्म को सही गति और सही दिशा […] Read more » Featured karmayoga of geeta आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग
व्यंग्य बड़े – बड़ों की शादी और बीमारी …!! December 19, 2017 / December 19, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा पता नहीं तब अपोलो या एम्स जैसे अस्पताल थे या नहीं, लेकिन बचपन में अखबारों में किसी किसी चर्चित हस्ती खास कर राजनेता के इलाज के लिए विदेश जाने की खबर पढ़ कर मैं आश्चर्यचकित रह जाता था। अखबारों में अक्सर किसी न किसी बूढ़े व बीमार राजनेता की बीमारी की खबर […] Read more » शादी