लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-13 December 6, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य गीता के दूसरे अध्याय का सार आत्मा को नहीं होत है, सुख, दु:ख का कभी भान। द्वन्द्व सताते देह को बात वेद की जान।। हमारे देश के भी बड़े-बड़े विद्वानों तक को ऐसी भ्रांति रही है। आज के संसार के लोगों की तो यह प्रमुख समस्या है कि वे आत्मा और शरीर […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta आज का विश्व गीता का कर्मयोग
कविता साहित्य हर उम्र वैसे अजीब होती है December 5, 2017 by बीनू भटनागर | Leave a Comment ये सत्तर की उम्र भी अजीब होती है, बुढ़ापे की दहलीज़ होती है, इसके आगे जितनी मिल जाये, सूद पर व्याज होती है। सत्तर की उम्र में भी रोमांस होता है, अंदाज़ ज़रा सा अलग होता है तुमने दवाई खाई अब आराम करलो, ऐसी बातें होती है। किसको कितनी दवाइयां निगलनी […] Read more » Featured हर उम्र वैसे अजीब होती है
लेख हिंदुस्तान के गद्दार जमींदार December 5, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 1 Comment on हिंदुस्तान के गद्दार जमींदार डा. राधेश्याम द्विवेदी हमारे भारत को प्राचीन काल से ही सोने की चिड़िया कहलाने का गौरव प्राप्त था, लेकिन जब सोने की चिड़िया कहे जाने वाले हमारे भारत पर अंग्रेजों ने कब्ज़ा किया उसके बाद भारत से वो गौरव छिन गया. हम सभी ने जब भी अपने इतिहास के बारे में पढ़ा या सुना है […] Read more » Featured गद्दार जमींदार जमींदार हिंदुस्तान
व्यंग्य साहित्य साहित्य के प्रधान सेवक December 4, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment अमित शर्मा (CA) मिश्रा जी साहित्य के प्रधान सेवक है। साहित्य सेवा का यह बीड़ा उन्होंने 55 किलो ग्राम श्रेणी में ही उठा लिया था ज़ब वो युवावस्था की दहलीज़ पर एक पैर पर खड़े थे। मिश्रा जी ने यह ज़िम्मेदारी साहित्य के बिना कहे ही अपने कंधो और शरीर के हर अंग पर ले […] Read more » साहित्य साहित्य के प्रधान सेवक
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-12 December 2, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता के दूसरे अध्याय का सार और संसार गीता और शहादत अपनी मजहबी मान्यताओं को संसार पर बलात् थोपने वाले जिहादियों को लालच दिया गया है कि यदि ऐसा करते-करते तुम मृत्यु को प्राप्त हो जाते हो तो तुम शहीद कहे जाओगे। जबकि श्रीकृष्ण जी अर्जुन से इसके ठीक विपरीत […] Read more » Featured गीता गीता का कर्मयोग विश्व
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-11 December 2, 2017 / December 2, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य  गीता के दूसरे अध्याय का सार और संसार आजकल पैसा कैसे कमाया जाए और कैसे बचाया जाए?-सारा ध्यान इसी पर केन्द्रित है। आय के सारे साधन चोरी के बना लिये गये हैं, जिससे व्यक्ति उन्हें किसी को बता नहीं सकता, इसलिए उनकी मार को चुप-चुप झेलता रहता है। जितना दिल साफ […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta गीता गीता का कर्मयोग गीता के दूसरे अध्याय का सार विश्व
व्यंग्य साहित्य पब्लिक अॉन डय़ूटी … !! December 2, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा बैंक में एक कुर्सी के सामने लंबी कतार लगी है। हालांकि बाबू अपनी सीट पर नहीं है। हर कोई घबराया नजर आ रहा है। हर हाथ में तरह – तरह के कागजों का पुलिंदा है। किसी को दफ्तर जाने की जल्दी है तो कोई बच्चे को लेने स्कूल जाने को बेचैन है। […] Read more » पब्लिक अॉन डय़ूटी
लेख साहित्य कवि मुक्तिबोध की जन्मशती November 27, 2017 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमार साहित्य समाज में किसी कवि की जन्मशती मनाया जाना अपने आपमें महत्वपूर्ण है और जब बात मुक्तिबोध की हो तो वह और भी जरूरी हो जाता है। मनुष्य की अस्मिता, आत्मसंघर्ष और प्रखर राजनीतिक चेतना से समृद्ध स्वातंत्रोत्तर प्रगतिशील काव्यधारा के शीर्ष व्यक्तित्व के रूप में स्थापित मुक्तिबोध अपने समय के एक ऐसे […] Read more » गजानन माधव मुक्तिबोध मुक्तिबोध
लेख साहित्य चोर चोर मौसेरे भाई November 27, 2017 by बीनू भटनागर | Leave a Comment चोर चोर मौसेरे भाई मिले चुनावी वक़्त मोलभाव सीटों का करें इधर उधर भटकें। लोग जो आज इधर हैं कल मिल जायें उधर, आज जिन्हे अच्छा कहें, कल खोजेंगे नुक्स, जो कुर्सी की आस दे, उसके होंगे भक्त। ना कोई आदर्श है ना कोई सिद्धान्त झूठे दस्तावेज़ हैं, इनके घोषणापत्र, राजनीति बस हो रही, सत्ता […] Read more » चोर चोर मौसेरे भाई
कविता साहित्य कुछ और उठो सत्यार्थी November 27, 2017 by बीनू भटनागर | Leave a Comment इंसान ज्वालामुखी बन चुके थे, पहले ही, इंसानो के बच्चे भी मासूमियत छोड़कर, ज्वालामुखी बनने लगे हैं, जो कभी भी फट कर सब कुछ जला सकते हैं। कोई चार साल की उम्र में हैवानियत कर गया, किसी किशोर ने बच्चे को मार दिया, इमतिहान के डर ने गुनाह करवा डाला! दोष किसे दूँ सीखा तो […] Read more » सत्यार्थी
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-10 November 27, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment गीता के दूसरे अध्याय का सार और संसार हमारे देश में लोगों की मान्यता रही है कि शत्रु वह है जो समाज की और राष्ट्र की व्यवस्था को बाधित करता है। ऐसा व्यक्ति ही अधर्मी माना गया है। धर्म विरूद्घ आचरण करने वाला व्यक्ति समाज, राष्ट्र और जन-जन का शत्रु होता है। ऐसे व्यक्ति का […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta Shri Krishna गीता गीता का कर्मयोग विश्व
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-9 November 27, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता के दूसरे अध्याय का सार और संसार अर्जुन समझता था कि दुर्योधन और उसके भाई, उसका मित्र कर्ण और उसका मामा शकुनि युद्घ क्षेत्र में उसके हाथों मारे जा सकते हैं, इसके लिए तो वह मानसिक रूप से पहले से ही तैयार था। वह यह भी जानता था कि […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta Shri Krishna गीता गीता का कर्मयोग विश्व