दोहे साहित्य प्राण की आहुति कोई देता ! May 8, 2017 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment प्राण की आहुति कोई देता, समझ बलिदान कहाँ कोई पाता; ताक में कोई है रहा होता, बचा कोई कहाँ उसे पाता ! रही जोखिम में ज़िन्दगी रहती, सुरक्षा राह हर कहाँ होती; तभी तो ड्यूटी है लगी होती, परीक्षा हर घड़ी वहाँ होती ! चौकसी करनी सभी को होती, चूक थोड़ी भी नहीं है चलती; […] Read more » प्राण की आहुति कोई देता !
गजल साहित्य मेरे लफ़्ज तुझसे यकीं माँगें May 8, 2017 by शालिनी तिवारी | Leave a Comment शालिनी तिवारी झुरमुट में दिखती परछाइयाँ घुँघुरू की मद्दिम आवाज लम्बे अर्से का अन्तराल तुझसे मिलने का इन्तजार चाँद की रोशन रातों में पल हरपल थमता जाए ऐसा लगता है मानो तुम मुझसे आलिंगन कर लोगी पर कुछ छण में परछाइयाँ नयनों से ओझल हो जायें दिन की घड़ी घड़ी में बस बस तेरी ही […] Read more » मेरे लफ़्ज तुझसे यकीं माँगें
व्यंग्य चूहा साहित्य में नया अध्याय May 7, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment आजकल शायद ही कोई बच्चा हो, जो टी.वी. पर चालाक चूहे और खूंखार बिल्ले वाली ‘टॉम और जैरी’ की कार्टून कथा न देखता हो। वैसे समय काटने के लिए कई बूढ़े भी इसे देखते हैं। ये कार्टून कथा तो विदेशी है; पर इससे हजारों साल पूर्व पंचतंत्र और अन्य भारतीय कथा साहित्य में चूहों की […] Read more » Featured चूहा साहित्य
व्यंग्य साहित्य साडी रसोई १०/- और सादी रसोई ५/- में ……. May 7, 2017 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment पंजाब दे कैप्टन उर्फ़ महाराजा साहेब अर्थात सदर ऐ रियासत ने पंजाब के गरीबों को भरपेट भोजन देने का वायदा किया था और वह भी महज़ ५ रुप्प्या में ….. जब सदर ने रियासत की जेब टटोली तो राजकुमार की जेब की मानिंद ‘फटी ‘ हुई निकली …… एक जद्दी एडवाइज़र को बुलाया …. हल […] Read more » Featured साडी रसोई १०/ सादी रसोई ५/
व्यंग्य साहित्य अब चुहे बने शराबी : वाह रे बिहार पुलिस May 6, 2017 by सज्जाद हैदर | Leave a Comment इन चूहों ने रात के घोर अंधेरे का फायदा उठाया, योजना बनाई तथा बड़ी चतुराई पूर्वक सभी बिन्दुओं पर गंभीरता पूर्वक विचार किया तथा योजना बद्ध तरीके से इस बड़े कार्य को सफलता पूर्वक अंजाम दिया। क्योंकि यह मामला पुलिस विभाग से संबंधित था, अत: इस संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए बड़ी चतुराई के साथ रात के घोर अंधेरे का फायदा उठाते हुए थानों के पिछले द्वार से प्रवेश किया क्योंकि थाने के मुख्य द्वार पर एक पुलिस वाला पहरा दे रहा था, जो संगीन के साथ पूरी मजबूती से खड़ा हुआ था, इसी कारण चूहों ने पिछले द्वार से प्रवेश की योजना बनाई, जिसके सहारे शराब के भंडार गृह तक योजना बद्ध तरीके से पहुंच गए। Read more » Featured चुहे बने शराबी बिहार पुलिस
व्यंग्य साहित्य तुच्छता से स्वच्छ्ता की और May 6, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment स्वच्छ भारत अभियान के सर्वे में सबसे स्वच्छ शहरो में इंदौर पहले और भोपाल दूसरे नंबर पर आया है, ये दोनों शहर बीजेपी शासित राज्य मध्यप्रदेश में आते है, वैसे 2014 में सरकार बनने के बाद बीजेपी नेताओ ने अपने बयानों से जैसी गंदगी फैलाई है उसे देखते हुए ये काफी अप्रत्याशित लगता है। यह […] Read more » स्वच्छ भारत अभियान
व्यंग्य साहित्य ऋषि मुनियों के देश में , अब अऋषि रहे ना कोय May 5, 2017 by जगमोहन ठाकन | Leave a Comment जग मोहन ठाकन बाबा रामदेव जी महाराज को आप चाहे योग गुरु कहें या संयोग गुरु ; उनके “ गुरु” होने में कोई संदेह नहीं रह गया है .बल्कि महागुरू का ताज भी उनके मस्तक पर छोटा प्रतीत होता है . हाँ , इतना भी निश्चित मानिये कि वो समय की नजाकत और नब्ज […] Read more » Featured बाबा रामदेव
आलोचना राजनीति नायक नहीं, खलनायक हूं मैं May 4, 2017 by वीरेंदर परिहार | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की उत्पत्ति समझे जानें वाले अरविन्द केजरीवाल के मामले में पूर्व में आम लोगों की धारणा आम राजनीतिज्ञों से कुछ अलग किस्म की थी। यह माना गया था कि पेषेवर राजनीतिज्ञों की जगह केजरीवाल भारतीय राजनींति को नई दिषा देंगे। उनकी ‘आप’ पार्टी के बढ़ते ग्राफ […] Read more » AAP AAP Party Arbind Kejriwal Featured kejriwal खलनायक नायक नहीं
लेख शख्सियत साहित्य कविवर टैगोर : कुछ विवाद – कुछ प्रवाद May 4, 2017 by डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री | Leave a Comment रवीन्द्र नाथ टैगोर (7 मई 1861–7 अगस्त 1941), जिन्हें आधुनिक भारत में “ गुरुदेव “ का सम्मान मिला, ऐसे महाकवि, जिन्हें साहित्य का नोबल पुरस्कार मिला, विश्व के एकमात्र ऐसे कवि जिनके लिखे गीतों को दो भिन्न देशों में “राष्ट्रगान “ का सम्मान मिला, बहु-आयामी व्यक्तित्व के ऐसे धनी जो हर आयाम में शिखर […] Read more » Featured Guru Rabindra Nath tagore गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर टैगोर
कला-संस्कृति लेख साहित्य हिंदू – इस्लामिक पूजा गृह May 4, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी प्रारम्भिक इतिहास :-हिंद इस्लामिक वास्तुकला का प्रारंभ 12वीं शताब्दी के अंत में भारत पर विदेशी कब्ज़े से हुआ। मुसलमानों को सासानी और बिज़ेन्टाइन साम्राज्यों से विभिन्न योजनाओं का खज़ाना विरासत में मिला । सुरूचिपूर्ण इमारतों होने के कारण उन्होंने जिस भी देश पर कब्ज़ा किया, वहां की स्थानीय वास्तुकला को अपने अनुकूल […] Read more » हिंदू - इस्लामिक पूजा गृह
लेख साहित्य बुढ़िया का ताल: ताल भी,एत्माद्खान का मण्डप निवास भी May 2, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी आगरा की भूमि मुगलकालीन राजाओं,बेगमों उच्च पदस्थ लोगों तथा साधु महात्माओं के स्मारकों, महलों ,बाग बगीचों व बगीचियों से भरी पड़ी है।मुगल पूर्व बागों में कैलाश, रेनुकता, सूरकुटी, बृथला व बुढ़िया का ताल आदि प्रमुख हैं। मुगलकालीन बागों की एक लम्बी श्रृंखला यहां देखने को मिलती है।ये मुख्यतः तीन प्रकार के होते […] Read more » बुढ़िया का ताल
व्यंग्य साहित्य मोबाइल की माया, बना इंसानी हमसाया May 2, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment हर हाथ के पास काम हो या ना हो लेकिन हर हाथ के पास मोबाइल ज़रूर है। आदमी को अपने वर्क की इतनी चिंता नहीं होती है जितनी मोबाइल नेटवर्क की होती है। फेसबुक, वाट्सएप, इंस्टाग्राम जैसे एप्स से आम आदमी टाइम-पास कर बहुत कुछ फेल करना सीख गया है। गूगल प्ले-स्टोर में जाकर दिमाग पर ज़्यादा लोड लिए कुछ भी डाउनलोड करना आसान है। गूगल स्टोर उस गोदाम की तरह की तरह हो गया है जहाँ उचित दाम पर सब वस्तु आसानी से मिल जाती है। वह दिन दूर नहीं जब गूगल स्टोर इतना "यूजर-फ्रैंडली" हो जाएगा की राशन की सारी चीज़े भी पंसारी की तरह उपलब्ध करवाएगा। ज़्यादा व्यस्तता होने आपातकाल में गूगल स्टोर सुलभता से सुलभ शौचालय का रूप लेकर हल्का करने वाला एप भी ला सकता है। हल्का होना इंसान के बहुत ज़रूरी है क्योंकि जितना हल्कापन होगा सफलता की उड़ान उतनी ही ऊँची होगी। Read more » "उड़ान" Featured केंद्र सरकार द्वारा सस्ती हवाई यात्रा मोबाइल की माया हमसाया