कविता साहित्य कागजों पर अहसास लिखता हूँ। August 31, 2016 by आकाश कुमार राय | Leave a Comment ना कवि, ना लेखक, ना ही इतिहासकार हूँ… जीवन है अबूझ पहेली, उसके कुछ पल लिखता हूँ.. ना लिखता हूँ शायरी.. ना दोहों की करता बातें.. गुजरे उम्र का.. कागजों पर अहसास लिखता हूँ। यादों के मर्म की बस.. कुछ बात लिखता हूँ.. कुछ उलझे हुए से अपने हालात लिखता हूँ.. जीवन उलझा जिनमें वो […] Read more » कागजों पर अहसास लिखता हूँ।
लेख साहित्य राष्ट्रीय पोषण सप्ताह 2016 August 30, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 1 Comment on राष्ट्रीय पोषण सप्ताह 2016 डा. राधेश्याम द्विवेदी सप्ताह का इतिहास:-पोषण शिक्षा के द्वारा अच्छे स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देने के लिये वर्ष 1982 में केन्द्रीय सरकार द्वारा पहली बार इस अभियान की शुरुआत की गयी क्योंकि राष्ट्रीय विकास के लिये मुख्य रुकावट के रुप में कुपोषण है। इसी लक्ष्य के लिये लोगों को बढ़ावा देने के लिये, […] Read more » National Nutrition Week राष्ट्रीय पोषण सप्ताह
कहानी साहित्य सहयात्री August 30, 2016 by आर. सिंह | Leave a Comment बात उन दिनों की है, जब रेलगाड़ी में प्रथम श्रेणी में सफर करना बहुत बड़ी बात समझी जाती थी. श्रेणियाँ भी तो बहुत होती थी. प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी, बीच में इंटरक्लास (हिंदी समतुल्य शब्द नहीं मिला) और फिर जनता की अपनी श्रेणी यानि तृतीयश्रेणी. वातानुकूलित डब्बे तो आम तौर पर गाड़ियों में होते ही […] Read more » Featured सहयात्री
आलोचना राजनीति खामोश ….अभी पटना कर रहा अपने गुमशुदा सांसद की तलाश है August 30, 2016 by आलोक कुमार | Leave a Comment दशकों से सांसदों को जनता के बीच जाने और उनकी समस्याओं से रूबरू होने की बातें होती आ रही हैं , लोकतन्त्र का तकाजा भी यही है l सुनने – सुनाने में अच्छी लगने वाली इन बातों का बाकियों पर क्या असर हो रहा है ये तो मैं नहीं जानता लेकिन हमारे ,पटना साहिब के, […] Read more » Shatrughan Sinha गुमशुदा सांसद की तलाश
व्यंग्य साहित्य विपक्ष का जोश और शासक का होश …!! August 30, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा मोरली हाइ या डाउन होने का मतलब तब अपनी समझ में बिल्कुल नहीं आता था। क्योंकि जीवन की जद्दोजहद के चलते अब तक अपना मोरल हमेशा डाउन ही रहा है । लेकिन खासियत यह कि जेब में फूटी कौड़ी नहीं वाले दौर में भी यह दुनिया तब बड़ी खूबसूरत लगती थी। जी […] Read more » Featured विपक्ष का जोश शासक का होश ...!!
लेख विविधा साहित्य लघु उद्योग दिवस August 29, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 2 Comments on लघु उद्योग दिवस डा. राधेश्याम द्विवेदी किसी विशेष क्षेत्र में भारी मात्रा में सामान का निर्माण,उत्पादन या वृहद रूप से सेवा प्रदान करने के मानवीय कर्म को उद्योग (industry) कहते हैं। उद्योगों के कारण गुणवत्ता वाले उत्पाद सस्ते दामों पर प्राप्त होते है जिससे लोगों का रहन-सहन के स्तर में सुधार होता है और जीवन सुविधाजनक होता चला […] Read more » Featured small industries लघु उद्योग लघु उद्योग दिवस
कविता साहित्य प्रेम भी अपरिपक्व होने लगा है………. August 28, 2016 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment अर्पण जैन ‘अविचल’ स्त्री की देह तालाब-सी है, बिल्कुल ठहरी हुई सी उसमे नदी के मानिंद वेग और चंचलता कुछ नहीं फिर भी पुरुष उस तालाब में ही प्रेम खोजता है, सत्य है क़ि खोज की भाषा भी सिमट-सी गई हैं वेग का आवरण भी कभी कुंठा के आलोक में तो कभी पाश्चात्य के स्वर […] Read more » Featured प्रेम भी अपरिपक्व होने लगा है
व्यंग्य साहित्य कांग्रेस टर्न August 28, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment यदि साल के बारह महीनों में सावन और भादों का महीना न हो, तो जीवन में सर्वत्र सूखापन छा जाए। ऋतुराज भले ही बसंत को कहते हैं; पर वर्षाकाल के बिना बसंत भी सूना ही है। लेकिन सावन-भादों में वर्षा यदि जरूरत से ज्यादा होने लगे, तो भी मुसीबत आ जाती है। इस बार भी […] Read more » congress turn Featured कांग्रेस टर्न
लेख साहित्य हिन्दू संघटन : गांधीजी, स्वामी श्रद्घानंद और स्वातंत्र्य वीर सावरकर August 24, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य सफल वक्ता वही होता है जो श्रोताओं को अपनी बात से सहमत और संतुष्ट तो कर ही ले साथ ही उसकी भाषण कला ऐसी हो जिससे लोग वही कुछ करने के लिए प्रेरित और आंदोलित भी हो उठें जिसे वह वक्ता उनसे कराना चाहता है। भाषण के अंत में यदि नेता कहे […] Read more » Featured गाँधीजी स्वातंत्र्य वीर सावरकर स्वामी श्रद्घानंद हिन्दू संघटन
राजनीति लेख साहित्य मनु और वत्र्तमान राजनीति की विश्वसनीयता भाग-2 August 24, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य महर्षि मनु अपने राजधर्म में राजा की पहली योग्यता बताते हुए कह रहे हैं कि ‘राजा’ ब्राह्मण के समान परम विद्वान होना चाहिए। कारण कि परम विद्वान राजा ही परम विद्वान ब्राह्मण से राजकाज संबंधी कार्यों के संबंध में गूढ़ चर्चा कर सकेगा। यदि ‘राजा’ मूर्ख है या अनपढ़, अशिक्षित या निरक्षर […] Read more » Featured मनु मनुस्मृति
व्यंग्य साहित्य चौथ का चांद और पति की मिलीभगत August 24, 2016 by दीपक शर्मा 'आज़ाद' | Leave a Comment बात बढ़ते बढ़ते इतनी बढ़ गई थी कि शहर के शहर सड़क पर आ उतरे और अन्तत: सरकार को पूरे देश में कर्फ्यू लगाना पड़ा। दरअसल, गत दो दिवस पहले चौथ का व्रत था। जिसके चलते सभी घरों में तनाव पसरा था। शर्मा जी, गांधी जी के तीसरे बंदर की तरह अपनी पत्नी के सामने […] Read more » Featured चौथ का चांद पति की मिलीभगत
लेख साहित्य जगनेर के किले को आल्हा-ऊदल के मामा राजा राव जयपाल ने बनवाया August 22, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 2 Comments on जगनेर के किले को आल्हा-ऊदल के मामा राजा राव जयपाल ने बनवाया डा. राधेश्याम द्विवेदी ताजनगरी आगरा से करीब 40 किलोमीटर दूर जगनेर का ऐतिहासिक किला है। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में जगनेर एक छोटा सा शहर और एक नगर पंचायत है । यह पत्थर और सरसों के तेल निकासी के लिए प्रसिद्ध है। जगनेर के शहर के चारों ओर एक पहाड़ी किला है जो खुद […] Read more » आल्हा-ऊदल जगनेर के किले राजा राव जयपाल