लेख शख्सियत साहित्य झंडेवाला पार्क का क्रांतिवीर शहीद ”गुलाब सिंह लोधी” August 20, 2016 by ब्रह्मानंद राजपूत | 1 Comment on झंडेवाला पार्क का क्रांतिवीर शहीद ”गुलाब सिंह लोधी” (81 वें बलिदान दिवस 23 अगस्त 2016 पर विशेष) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास ऐसे वीर वीरांगनाओं की कहानियों से भरा पडा है। जिनके योगदान को कोई मान्यता नहीं मिली है। ऐसे ही हमारे अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी हैं। जिनका योगदान भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम मैं अग्रणी रहा है। लेकिन दुर्भाग्य यह रहा है […] Read more » ''गुलाब सिंह लोधी'' Featured
आलोचना साहित्य परसाई के जबलपुर में शक्तिपुंज …!! August 20, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा प्रख्यात व्यंग्यकार स्व. हरिशंकर परसाई , चिंतक रजनीश और फिल्मों के चरित्र अभिनेता रहे प्रेमनाथ के गृह शहर जबलपुर जाने का अवसर मिला तो मन खासा रोमांचित हो उठा। अपने गृह प्रदेश उत्तर प्रदेश में रोजी – रोजगार के सिलसिले में महाकौशल के जबलपुर और आस – पास के जिलों में बस […] Read more » Featured जबलपुर परसाई शक्तिपुंज
लेख साहित्य सम्राट विक्रमादित्य की नगरी उज्जयिनी August 20, 2016 / August 20, 2016 by शीतलकुमार अक्षय | Leave a Comment शीतलकुमार अक्षय इतिहासकारों के अनुसार वैसे तो इस उज्जैन में पूर्वोत्तर समय के दौरान कई राजा-महाराजाओं का अधिपत्य स्थापित रहा है, लेकिन सर्वाधिक रूप में यह नगरी सम्राट विक्रमादित्य की नगरी के रूप में स्थापित रही है। सम्राट विक्रमादित्य को न्यायप्रिय सम्राट माना जाता है और उनके बारे में कई किवदंतिया प्रचलित है। इतिहासकारों ने […] Read more » उज्जयिनी सम्राट विक्रमादित्य सम्राट विक्रमादित्य की नगरी उज्जयिनी
लेख साहित्य भारत में देशी रियासतें और उनका इतिहास August 18, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 3 Comments on भारत में देशी रियासतें और उनका इतिहास डा. राधेश्याम द्विवेदी ब्रिटिश राज के दौरान अविभाजित भारत में नाममात्र के स्वायत्त राज्य थे। इन्हें आम बोलचाल की भाषा में “रियासत”, “रजवाड़े” या व्यापक अर्थ में देशी रियासत कहते थे। ये ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा सीधे शासित नहीं थे बल्कि भारतीय शासकों द्वारा शासित थे। परन्तु उन भारतीय शासकों पर परोक्ष रूप से ब्रिटिश शासन […] Read more » Featured आसाम इंदौर उडीसा कछार काठियावाड़ कुर्ग कोल्हापुर ग्वालियर छत्तीसगढ़ जयंतिया ट्रावनकोर तंजोर त्रिपुरा देशी रियासतें का इतिहास नागपुर बघेलखण्ड बड़ौदा तथा राजपूताना बुंदेलखण्ड भारत में देशी रियासतें मध्य भारत और हिमांचल प्रदेश मनीपुर सतारा
लेख साहित्य स्वाभिमानी महाराणा प्रतापसिंह बढ़ चले हल्दीघाटी की ओर August 18, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य शक्तिसिंह का शक्ति प्रदर्शन एक बार की बात है कि राणा उदयसिंह के दरबार में हथियार निर्यातक/निर्माता व्यक्ति अपने हथियारों का प्रदर्शन करने के लिए आया हुआ था, तब वह हथियार निर्यातक व्यक्ति अपनी एक तलवार की तीव्र धार का प्रदर्शन रूई को काट-काटकर के दिखा रहा था। इतने में ही […] Read more » Featured महाराणा प्रतापसिंह हल्दीघाटी
कविता साहित्य सलामती की दुआ मै करती रहूँगी August 18, 2016 by शालिनी तिवारी | Leave a Comment तुम्हारी कलाइयों में रक्षा की राखी, बरस दर बरस मैं बाँधती रहूँगी, दिल में उमंगे और चेहरे पर खुँशियाँ, हर एक पल मै सजाती रहूँगी, कभी तुम न तन्हा स्वयं को समझना, कदम से कदम मैं मिलाती रहूँगी, तुम हर इक दिन आगे बढ़ते ही रहना, सलामती की दुआ मै करती रहूँगी । खुदा ने […] Read more » Featured सलामती की दुआ मै करती रहूँगी
कविता साहित्य मुझको अब सहना आता है………. August 16, 2016 by बीनू भटनागर | Leave a Comment मुझको अब सहना आता है इतनी पीड़ा सहने पर अब, ईश्ववर भी याद नहीं आता, जितनी पीड़ा देनी है दे दे वो, मुझको अब सहना आता है। पीड़ा आज गई घर अपने, फिर आऊंगी वादा करके। हर आहट पर लगता है कहीं पीड़ा वापिस आने का संकेत तो नहीं ………….. इतनी पीड़ा सहकर अब रोज़ […] Read more » मुझको अब सहना आता है
कहानी साहित्य तमाचा August 16, 2016 by सपना मांगलिक | Leave a Comment अ और ब दोनों पति पत्नी हैं ।अ जब देखो तब ब को प्रताड़ित करता रहता है ।कभी कभी जरा सी बात पर ब पर हाथ भी उठा देता है ।ब अपने बच्चों के लिए खामोश रहती है ।शायद वह बच्चों को खराब घरेलू माहौल नहीं देना चाहती ।मगर अ इसे उसकी लाचारी या कमजोरी […] Read more » तमाचा
मीडिया व्यंग्य साहित्य सोशल -मीडिया और सामाजिकता के बदलते आयाम August 15, 2016 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment अनादिकाल से ही मनुष्य सामाजिक प्राणी माना जाता रहा हैं। क्योंकि ज़िंदा रहने के लिए भले ही रोटी -कपडा -मकान की ज़रूरत होती हो लेकिन औकात में रहने के लिए शुरू से ही समाज की ज़रूरत महसूस की जाती रही है। भले ही कालांतर में असामाजिक तत्व और असामाजिक घटनाये महामारी की तरह बढ़ी हो […] Read more » Featured सामाजिकता के बदलते आयाम सोशल मीडिया
कविता साहित्य अधूरी है आज़ादी August 15, 2016 by नरेश भारतीय | Leave a Comment नरेश भारतीय अधूरी क्यों है अभी भी यह आज़ादी? विभाजन को स्वीकार करने की मजबूरी क्या थी? जो कट कर अलग हुए क्या ख़ुश रहे? जो मारकाट से आहत हुए किसके दुश्मन थे? साम्प्रदायिक हत्याओं की भेंट चढ़ती गई आज़ादी सरहद के उस पार जो आज होता दिख रहा विध्वंस और विनाश के कगार पर […] Read more » Featured poem on Independence Day अधूरी है आज़ादी आजादी
कविता साहित्य आजादी पर गर्व हमें है August 15, 2016 by शालिनी तिवारी | Leave a Comment आजादी पर गर्व हमें है और सदा तक बना रहेगा, जिन लोगों ने कुर्वानी दी उनका नाम अमर रहेगा, पर अन्तिम जन को आजादी कब तक मिल पाएगी ? दुपहरिया में मजदूरों की मेहनत कब रंग लाएगी ? उनकी सोच बदल जाए तो सच्ची आजादी होगी, भुखमरी पर पाबन्दी ही सच्ची खुशहाली होगी, झुग्गी झोपड़ियों […] Read more » poem on Independence Day आजादी आजादी पर गर्व हमें है
आलोचना साहित्य कैसे रहे याद कब हुए आजाद! August 14, 2016 by जगदीश यादव | Leave a Comment जगदीश यादव कोलकाता। पन्द्रह अगस्त को भारतवासी आजादी की 70 वीं वर्षगांठ मानएगें। लेकिन शायद यह जानकर हैरत होगी कि देश की एक आबादी को यह नहीं पता है कि देश किस वर्ष में आजाद हुआ। एक सर्वेक्षण में सिर्फ दो ही सवाल पूछे गये। पहला सवाल था कि 15 अगस्त क्यों मनाया जाता है […] Read more »