राजनीति व्यंग्य साहित्य रंज लीडर को बहुत है मगर… May 8, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment किसी राजनीतिक विश्लेषक ने कहा है कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर जाता है; पर काफी समय से कांग्रेस के लिए लखनऊ के ही रास्ते बंद है। ऐसे में अपने बलबूते पर वह दिल्ली कैसे पहुंचे ? जीवन-मरण जैसा यह बड़ा प्रश्न मैडम जी के सामने है। वे कई साल से कोशिश में हैं […] Read more » Featured रंज लीडर को बहुत है मगर...
लेख साहित्य द्रौपदी की हँसी May 8, 2016 / May 8, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। हस्तिनापुर के सिंहासन पर युधिष्ठिर का अभिषेक भी संपन्न हो चुका था। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भीष्म पितामह सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा में शर-शैया पर यातना सहते हुए लेटे हुए थे। उस युग में श्रीकृष्ण और विदुर के बाद भीष्म पितामह ही राजनीति, धर्म और शास्त्र […] Read more » Featured द्रौपदी की हँसी
दोहे साहित्य हलके से जब मुसका दिए ! May 7, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment हलके से जब मुसका दिए, उनको प्रफुल्लित कर दिए; उनकी अखिलता लख लिए, अपनी पुलक उनको दिए ! थे प्रकट में कुछ ना कहे, ना ही उन्हें कुछ थे दिए; पर हिया आल्ह्वादित किए, कुछ उन्हें वे थिरकित किए ! जो रहा अन्दर जगाए, उर तन्तु को खिलखिलाए; सब नाड़ियाँ झँकृत किए, हर चक्र को […] Read more »
कला-संस्कृति लेख साहित्य साहित्य और समाज May 7, 2016 by डॉ. सौरभ मालवीय | Leave a Comment डॊ. सौरभ मालवीय साहित्य समाज का दर्पण है, समाज का प्रतिबिम्ब है, समाज का मार्गदर्शक है तथा समाज का लेखा-जोखा है. किसी भी राष्ट्र या सभ्यता की जानकारी उसके साहित्य से प्राप्त होती है. साहित्य लोकजीवन का अभिन्न अंग है. किसी भी काल के साहित्य से उस समय की परिस्थितियों, जनमानस के रहन-सहन, खान-पान व […] Read more » Featured साहित्य और समाज
कहानी साहित्य स्टेशन के कानून May 6, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on स्टेशन के कानून रामलाल रेलवे स्टेशन पर फलों की ठेली लगाता था। बिहार के अपने गांव से बारह साल पहले जब वह यहां आया था, तब उसकी उम्र खेलने-खाने की थी; पर पेट की भूख क्या नहीं करा लेती ? शुरू मंे तो उसने स्टेशन के बाहर एक होटल में बरतन साफ किये। फिर स्टेशन पर फल बेचने […] Read more » स्टेशन के कानून
राजनीति व्यंग्य वायु सेना चीफ का सीबीआई जाना! May 4, 2016 by हरि शंकर व्यास | Leave a Comment अपन को रिटायर वायु सेना चीफ एसपी त्यागी का सीबीआई दफ्तर जाना अच्छा नहीं लगा! पैदल, कंधे पर एक बैग लटकाए, सीबीआई बिल्डिंग में जाते एसपी त्यागी की जो टीवी फुटेज देखी तो मन खिन्न हुआ। जो शख्स भारत की वायुसेना का प्रमुख रहा, जिसने लाखों सैनिकों को लीडरशीप दी उसका व्यक्तित्व-कृतित्व, उसकी गरिमा, प्रतिष्ठा […] Read more » Featured अगस्ता वेस्टलैंड एसपी त्यागी वायु सेना चीफ सीबीआई
कविता साहित्य मां, पर पीर तो होती होगी May 3, 2016 by अरुण तिवारी | Leave a Comment गांव की सबसे बङी हवेली उसमें बैठी मात दुकेली, हवेली से बाते करते, दीवारों से सर टकराना, ईंट सरीखा मन हो जाना, दूर बैंक से पैसा लाना, नाज पिसाना, सामान मंगाना, हर छोटे बाहरी काम की खातिर दूजों से सामने गिङगिङ जाना, किसी तरह घर आन बचाना, शूर हो, मज़बूर हो मां, पर पीर तो […] Read more » Featured poem on mother पर पीर तो होती होगी मां
कविता साहित्य विकृतियाँ समाज की May 2, 2016 by राघवेन्द्र कुमार 'राघव' | Leave a Comment राघवेन्द्र कुमार राघव मेरे मन की बेचैनी को, क्या शब्द बना लिख सकते हो ? तक़लीफ़ें अन्तर्मन की, क्या शब्दों मे बुन सकते हो ? लिखो हमारे मन के भीतर, उमड़ रहे तूफ़ानों को । लिखो हमारे जिस्मानी, पिघल रहे अरमानों को । प्यास प्यार की लिख डालो, लिख डालो जख़्मी रूहें । लिखो ख़्वाहिशों […] Read more » विकृतियाँ समाज की
व्यंग्य साहित्य चने के पेड़ पे…!! April 28, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा दुनिया में कई चीजें दिखाई पहले पड़ती है , लेकिन समझ बाद में आती है। बचपन में गांव जाने पर चने के पेड़ तो खूब देखे। लेकिन इस पर चढ़ने या चढ़ाने का मतलब बड़ी देर से समझ आया।इसी तरह हेलीकाप्टर से घूम – घूम कर जनसभा को संबोधित करने , राजप्रसाद […] Read more » चने के पेड़
कहानी साहित्य मन की गांठ April 27, 2016 by विजय कुमार | 3 Comments on मन की गांठ पिछले दिनों मैं रेलगाड़ी से हरिद्वार से दिल्ली आ रहा था। सर्दी के दिन थे। मेरे साथ बैठे यात्री के मफलर पर ‘नवभारत उद्योग, हरिद्वार’ का लेबल लगा था, जबकि मेरे मफलर पर ‘भारत उद्योग, हरिद्वार’ का। इस सुखद संयोग पर बात छिड़ी, तो उन्होंने ‘भारत’ और ‘नवभारत उद्योग’ की कहानी सुनायी। इसके मुख्य पात्र […] Read more » मन की गांठ
व्यंग्य साहित्य ईमानदार राजनीती पर भारी बेईमान मौसम April 23, 2016 by अमित शर्मा (CA) | 3 Comments on ईमानदार राजनीती पर भारी बेईमान मौसम आजकल गर्मी और आईपीएल के साथ साथ “सम-विषम” (ऑड-इवन) और पुतले लगाए जाने का भी मौसम हैं ताकि कलेजे से बीड़ी जला सकने वाले इस मौसम में चौके-छक्के , सुनी सड़के और अपने पंसदीदा पुतले देखकर आपकी रूह को बिना “रूह -अफजा” पिए ही ठंडक पहुँचे। इसी मौसम में “गतिमान एक्सप्रेस” भी लांच हो चुकी हैं लेकिन […] Read more » ईमानदार राजनीती बेईमान मौसम
लेख विविधा साहित्य भक्ति रस से उपजा वीर रस April 22, 2016 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | Leave a Comment डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री भारत पर विदेशी हमलों की शोकगाथा बहुत पुरानी है । उतनी ही पुरानी इसकी संघर्ष गाथा है । लेकिन संघर्ष और शत्रु से मुक़ाबला कितना ही शौर्यपूर्ण क्यों न रहा हो , अन्ततः भारत के भाग्य में परवश होना ही वदा था । शायद इसीलिए आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ,भारतीय साहित्य, ख़ासकर […] Read more » Featured Guru Arjun Dev भक्ति रस वीर रस श्री अर्जुन देव श्री गोविन्द सिंह श्री तेगबहादुर