आलोचना साहित्य नेताओं की फोटोबाजी May 27, 2016 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डा. वेद प्रताप वैदिक आजकल के नेताओं ने अभिनेताओं और सुंदरियों को भी मात कर दिया है। वे खूब बन-ठनकर अपने फोटो खिंचवाते हैं। फिर उन्हें अखबारों के मुखपृष्ठों और टीवी के पर्दों पर सजवा देते हैं। यह ‘छपास’ और ‘दिखास’ की बीमारी अब महामारी बन गई है। एक-एक नेता अपने फोटो छपवानें के […] Read more » नेताओं की फोटोबाजी
व्यंग्य साहित्य कांग्रेस मुक्त भारत दल May 22, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment कोई भारत को धार्मिक देश कहता है, तो कोई सांस्कृतिक। कोई इसे अर्थप्रधान बताता है, तो कोई बलप्रधान। कोई सांप और सपेरों का देश कहता है, तो कोई ज्ञानियों का; पर मेरी विनम्र राय इस बारे में बहुत स्पष्ट है कि ‘मेरा भारत महान’ एक राजनीति प्रधान देश है। यहां कितने राजनीतिक दल हैं, शायद […] Read more » Featured कांग्रेस मुक्त भारत दल
आलोचना राजनीति साहित्य ‘बाप का माल’ में ही नेहरू-गांधी के नाम! May 22, 2016 by शंकर शरण | 3 Comments on ‘बाप का माल’ में ही नेहरू-गांधी के नाम! अभिनेता ऋषि कपूर ने देश में महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों को नेहरू परिवार के नाम से बाँधने के अन्याय पर ऊँगली उठाई है। सारी जगहों को नेहरू, इंदिरा, राजीव, आदि मय कर देने पर उन का सवाल हैः इस देश को ‘बाप का माल समझ रखा था?’ देश की स्मृति पर ऐसे पारिवारिक कब्जे पर पहले […] Read more » Featured नेहरू-गांधी
कविता साहित्य बाल हकीकत राय May 20, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment धन्य-धन्य हे बाल हकीकत, धन्य-धन्य बलिदानी। देगी नवजीवन जन-जन को, तेरी अम र कहानी।। प्राण लुटाए निर्भय होकर, धर्म प्रेम की ज्वाला फूंकी। तुझे प्रलोभन देकर हारे, सकल क्रूर मुल्ला अज्ञानी।। नश्वर तन है जीव अमर यह, तत्व ज्ञान का तूने जाना। तेरी गौरव गाथा गा गा, धन्य हुई कवियों की वाणी।। गूंज उठे धरती […] Read more » बाल हकीकत राय
लेख साहित्य हर युग में महाभारत May 19, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment महाभारत के समय भी दो वर्ग थे — एक निपट भौतिकवादी, जो शरीर के अतिरिक्त कुछ भी स्वीकार नहीं करता था और जिसकी दृष्टि मात्र भोग पर थी। आत्मा के होने, न होने से कोई मतलब न था। जिन्दगी का अर्थ था भोग और लूट, खसोट। उसी वर्ग के खिलाफ कृष्ण को युद्ध करवाना पड़ा। […] Read more » हर युग में महाभारत
व्यंग्य साहित्य अंक के लगाकर पंख , डिग्री मारे डंक May 14, 2016 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment अच्छी शिक्षा-दीक्षा प्राप्त करना प्रत्येक नागरिक का सविंधान प्रदत्त अधिकार है , हालांकी आज के माहौल में शिक्षा प्राप्त करने के प्रयासों और उन प्रयासों से प्राप्त सफलता को देखते हुए लगता है की सविंधान निर्माताओं ने “राइट टू एजुकेशन” देकर सविंधान को ना केवल नीरस होने से बचाया है बल्कि आने वाली पीढ़ियों को […] Read more » अंक के लगाकर पंख डिग्री मारे डंक
लेख साहित्य काश! यह इतना आसान होता May 14, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment गीता के छठे अध्याय में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि ऐसा नहीं है कि यह गीता रहस्य मैं तुम्हें पहली बार बता रहा हूँ। सृष्टि के आरंभ में मैंने यह रहस्य सूर्य को बताया था, सूर्य ने इसे मनु को बताया और मनु ने इक्ष्वाकु को। कालान्तर में यह ज्ञान लुप्त हो गया। इसीलिए […] Read more » काश! यह इतना आसान होता
गजल साहित्य हो मुक्त बुद्धि से, हुआ अनुरक्त आत्मा चल रहा ! May 14, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment हो मुक्त बुद्धि से, हुआ अनुरक्त आत्मा चल रहा; मैं युक्त हो संयुक्त पथ, परमात्म का रथ लख रहा ! मन को किए संयत नियत, नित प्रति नाता गढ़ रहा; चैतन्य की भव भव्यता में, चिर रचयिता चख रहा ! देही नहीं स्वामी रही, मोही नहीं ममता रही; चंचल कहाँ अब रति रही, गति अवाधित […] Read more » हुआ अनुरक्त आत्मा चल रहा हो मुक्त बुद्धि से
व्यंग्य साहित्य मियाँ ये आशिकी इज्जत बिगाड़ देती है” May 11, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment क्यूँ रे अज्जू!!!!!! क्या हो रिया है आजकल काॅलेज में, क्या माहौल बना है!! अज्जू:- पीके भाई, काॅलेज का तो तुम पूछो ही मत अभी, अजब माहौल बना बैठा है आजकल तो!! पीके:- क्यूँ भाई ऐसा क्या गज्जब हुआ जा रहा है, क्या छात्र वात्र स्ट्राइक विस्ट्राइक कर बैठे है क्या?? अज्जू:- अरे नही नही […] Read more » मियाँ ये आशिकी इज्जत बिगाड़ देती है"
लेख शख्सियत साहित्य कृष्णभक्ति के महाकवि सूरदास May 11, 2016 / May 11, 2016 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment 11 मई पर विशेषः- मृत्युंजय दीक्षित महाकवि सूरदास का हिंदी जगत के साहित्य में अप्रतिम स्थान है। सूरदास के जन्मतिथि स्थान व उनके जन्मांध होने पर विद्वानों मे मतभेद हैं। लेकिन उनकी महानता व कृष्णभक्ति को लेकर सभी विद्वानों में एकरूपता है। सूरदास की साहित्यिक रचनाएं हिंदी जगत के लिए मील का पत्थर साबित हुई […] Read more » Featured कृष्णभक्ति महाकवि सूरदास
लेख साहित्य भोजन के लिए दुर्योधन का श्रीकृष्ण को आमंत्रण May 9, 2016 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment महाभारत का युद्ध टालने और दुर्योधन को समझाने के लिए अन्तिम प्रयास के रूप में श्रीकॄष्ण को हस्तिनापुर की राजसभा में युधिष्ठिर के दूत के रूप में भेजने का निर्णय लिया गया। श्रीकृष्ण ने भी इसे सहर्ष स्वीकार किया। हस्तिनापुर के मुख्य द्वार पर श्रीकृष्ण का भव्य स्वागत किया गया। सबसे औपचारिक मुलाकात के बाद […] Read more » दुर्योधन भोजन भोजन के लिए दुर्योधन का श्रीकृष्ण को आमंत्रण श्रीकृष्ण को आमंत्रण
कविता साहित्य रजनीगन्धा हूँ मैं, May 8, 2016 by के.डी. चारण | Leave a Comment के डी चारण रजनीगन्धा हूँ मैं, रंगोआब खुशबू से शेष जी, हां रजनीगंधा ही हूँ मैं, वह रंगोआब, खुशबू वाला पुष्प नहीं, जो जीवन में भाव भरता है, नयापन लाता है। समय रंगकर होठों की लाली बढाने वाली, पीक के लाल छर्रों वाली, मुलायम-कठोर कणों के गुण धर्म वाली रजनीगन्धा ही हूँ मैं। एक पतली […] Read more » रजनीगन्धा हूँ मैं