कहानी साहित्य सखी वे मुझसे कह कर जाते.. September 15, 2016 by आर. सिंह | Leave a Comment “सिद्धि हेतु स्वामी गए यह गौरव की बात पर चोरी चोरी गए यही बड़ा व्याघात. सखी वे मुझसे कह कर जाते”, —‘यशोधरा’ मैथिलीशरणगुप्त. ” भाई साहिब क्या आप जल्द से जल्द इस अस्पताल में पहुँच सकते हैं?” कोकिला. मैं तो अवाक रह गया.मेरे फोन पर यह सन्देश मेरी मुंह बोली बहन कोकिला का था,पर यह […] Read more » सखी वे मुझसे कह कर जाते..
व्यंग्य हिंदी दिवस या हिन्दी विमर्श September 15, 2016 by एम्.एम्.चंद्रा | Leave a Comment एम् एम्. चन्द्रा हिंदी दिवस पर बहस चल रही थी. एक वर्तमान समय के विख्यात लेखक और दूसरे हिंदी के अविख्यात लेखक. हम हिंदी दिवस क्यों मानते है? कोई दिवस या तो किसी के मरने पर मनाया जाता है या किसी उत्सव पर, तो ये हिंदी दिवस किस उपलक्ष में मनाया जा रहा है. अविख्यात […] Read more » हिंदी दिवस हिन्दी विमर्श
व्यंग्य साहित्य शाहबुद्दीन के नाम एक खत September 15, 2016 by संजय चाणक्य | Leave a Comment संजय चाणक्य ” लिखू कुछ आज यह वक़्त का तकाजा है ! मेरे दिल का दर्द अभी ताजा-ताजा है !! गिर पडते है मेरे आसू ,मेरे ही कागज पर ! लगता है कि कलम मे स्याही का दर्द ज्यादा है !!,, मै काफी उलझन में था सोचता हू खत की शुरूआत कहा से और कैसे […] Read more » Featured शाहबुद्दीन के नाम एक खत
कहानी साहित्य बेबसी के आंसू September 13, 2016 / September 14, 2016 by राजू सुथार | Leave a Comment अकाल तो दिख ही रहा था , और दूसरी ओर चुनाव कदमों में थे । मीरपुर गांव में इन दिनों विधायक के चुनाव होने वाले थे इस कारण हर जगह राजनीतिज्ञों का धूम धड़ाका हो रहा था । बरसात की ऋतु थी किन्तु इस बार अकाल ही दिख रहा था अर्थात अभी तक इन्द्र देव […] Read more » बेबसी के आंसू
लेख हिंदी दिवस उनकी नजर में शायद हिंदी शासितों की भाषा है,और अंग्रेजी शासकों की भाषा है। September 10, 2016 by श्रीराम तिवारी | Leave a Comment श्रीराम तिवारी वेशक दुनिया के अधिकांस प्राच्य भाषा विशारद ,व्याकरणवेत्ता ,अध्यात्म -दर्शन के अध्येता और भाषा रिसर्च- स्कालर समवेत स्वर में उत्तर वैदिक संस्कृत वांग्मय के ही मुरीद रहे हैं। जिसका वैचारिक चरमोत्कर्ष उस वेदांत दर्शन में झलकता है,जिसके प्रतिवाद स्वरूप अनेक ‘अवैदिक’ भारतीय दर्शनों का यहाँ निरंतर उदभव होता रहा है। जिसका भाषाई चरमोत्कर्ष […] Read more » Featured अंग्रेजी शासकों की भाषा हिंदी हिंदी शासितों की भाषा है
राजनीति व्यंग्य साहित्य खाट का खटराग September 9, 2016 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment राजनीति में नए नए प्रयोगों के आदी रहे राहुल गांधी ने खाट-चर्चा के जरिए कांग्रेस को ठेठ आम लोगों के बीच चर्चा में ला दिया है। खाट-चैपाल चर्चा में आनी ही थी, क्योंकि खाट का अपना एक शास्त्रीय राग भी होता है, जो शास्त्रीय संगीत में तो शामिल नहीं है, लेकिन लोक में लोकश्रुतियों की […] Read more » Featured खाट खाट का खटराग
राजनीति व्यंग्य साहित्य खाट सभा और टाट सभा September 8, 2016 / September 8, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment कल शाम शर्मा जी के घर गया, तो वे माथे पर हाथ रखे ऐसे बैठे थे, जैसे सगी सास मर गयी हो। हर बार तो मेरे आने पर वे हंसते हुए मेरा स्वागत करते थे, पर आज उनमें कोई हलचल ही नहीं थी। भाभी जी भी घर पर नहीं थी। इसलिए मैंने रसोई से एक […] Read more » Featured खाट सभा टाट सभा
आलोचना व्यभिचार का महिमामंडन September 8, 2016 by हरिहर शर्मा | Leave a Comment परंपरागत राजनीति से ऊबी हुई दिल्ली की जनता ने बड़ी आशा और विश्वास के साथ आम आदमी पार्टी को विजयश्री प्रदान की थी ! किन्तु एक के बाद एक दिल्ली सरकार के कुल छह मंत्रियों में से तीन को विभिन्न आरोपों के चलते हटाना पड़ा ! किन्तु सबसे ज्यादा चोंकाने वाली विदाई हुई है महिला […] Read more » AAP Featured Sandeep Kumar Sex CD व्यभिचार का महिमामंडन
राजनीति व्यंग्य साहित्य खटिया लूटेरी जनता September 8, 2016 / September 8, 2016 by अश्वनी कुमार, पटना | Leave a Comment जब लोकतंत्र जनता के लिए है, चुनाव जनता के लिए हैं, रैलियों का इंतजाम जनता के लिए है तो खटिया क्यूँ नहीं? उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से खटिया लूटने के शुरुआत बताती है की अब चुनाव के वक्त जनता को ठगने का जो टैलेंट नेताओं में पहले था वो अब जनता में आने लगी […] Read more » Featured khat sabha of Rahul Gandhi खटिया लूटेरी जनता
कविता तुम से प्यार कितना है September 7, 2016 / September 7, 2016 by मनीषा गुप्ता | Leave a Comment मनीषा गुप्ता क्या कहूँ की तुम से प्यार कितना है तेरी चाहत पर एतबार कितना है !! की साँसे भी अब तो कर देती है बगावत की तुम बिन चलना अब उनका भी मुहाल कितना है !! की तेरी आने की आहट से ही महक जाता है श्रृंगार मेरा देखो मेरे वज़ूद में बसता तेरा […] Read more » तुम से प्यार कितना है
व्यंग्य साहित्य इतने लोग हड़ताल नहीं इन्कलाब करते है September 5, 2016 by एम्.एम्.चंद्रा | Leave a Comment एम. एम.चन्द्रा भाई! गाड़ी की सर्विस करानी है सर! अभी तो 9 भी नहीं बजे और पुलिस को देखकर आपको क्या लगता है? क्या आज कोई काम हो पायेगा ? सर यदि आप अपनी गाड़ी को बचाना चाहते हो तो आज यहाँ से गाड़ी ले जाओ और किसी ओर दिन सर्विस करा लेना. भाई! ये पुलिस वाले हड़ताल […] Read more » इन्कलाब
कहानी साहित्य बाप जी की दुकान September 5, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on बाप जी की दुकान यों तो हर गांव और नगर में चौक होते हैं; पर लखनऊ के चौक की बात ही कुछ और है। यह केवल एक चौराहा नहीं, बल्कि 200 साल पुराना बाजार और घनी आबादी वाला क्षेत्र भी है। इसलिए इसे ‘पुराना शहर’ भी कहते हैं। लखनऊ के प्रसिद्ध चिकन की कढ़ाई वाले कपड़े यहां सबसे अच्छे […] Read more » बाप जी की दुकान