कविता साहित्य क्या मै लिख सकूँगा : पेड़ की संवेदनाओं को March 15, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on क्या मै लिख सकूँगा : पेड़ की संवेदनाओं को सुशील कुमार शर्मा कल एक पेड़ से मुलाकात हो गई। चलते चलते आँखों में कुछ बात हो गई। बोला पेड़ लिखते हो संवेदनाओं को। उकेरते हो रंग भरी भावनाओं को। क्या मेरी सूनी संवेदनाओं को छू सकोगे ? क्या मेरी कोरी भावनाओं को जी सकोगे ? मैंने कहा कोशिश करूँगा कि मैं तुम्हे पढ़ […] Read more » cutting of trees poem on cutting of trees poem on trees क्या मै लिख सकूँगा पेड़ की संवेदना
कहानी साहित्य हरम March 15, 2016 by अमित राजपूत | Leave a Comment अमित राजपूत कष्ट था उसे, जो उसको अंदर तक द्रवित कर रहा था। लेकिन उसके आंसुओं की भरी-मोटी बूंदों को देखकर लग रहा था कि ये कष्ट उसके द्वारा मजबूरी में किये गये किसी न्यौछावर के हैं। अजीब तो लग ही रहा था मुझे उसका इस तरह से झुंझलाकर ऑडीटोरियम से बाहर आना और आकर […] Read more » haram story on writer हरम
कविता साहित्य अभिशप्त March 15, 2016 / March 17, 2016 by डॉ. प्रतिभा सक्सेना | 3 Comments on अभिशप्त रात का था धुँधलका , सिर्फ़ तारों की छाँह । मैंने देखा – मन्दिर से निकल कर एक छायामूर्ति चली जा रही है विजन वन की ओर । आश्चर्यचकित मैंने पूछा, ” देवि ! आप कौन हैं ? रात्रि के इस सुनसान प्रहर में अकेली कहाँ जा रही हैं ? ” * वह चौंक गई, […] Read more » abhishapt poem by Dr. Pratibha saksena अभिशप्त अयोध्या अभिशप्त है
कविता साहित्य कबहू उझकि कबहू उलटि ! March 15, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment कबहू उझकि कबहू उलटि ! कबहू उझकि कबहू उलटि, ग्रीवा घुमा जग कूँ निरखि; रोकर विहँसि तुतला कभी, जिह्वा कछुक बोलन चही ! पहचानना आया अभी, है द्रष्टि अब जमने लगी; हर चित्र वह देखा किया, ग्रह घूम कर जाना किया ! लोरी सुने बतियाँ सुने, गुनगुनाने उर में लगे; कीर्तन भजन मन भावने, लागा […] Read more » poem by gopal baghel कबहू उझकि कबहू उलटि ! चहकित चकित चेतन चलत
लेख साहित्य स्वयंसेवक के वेश में परिवर्तन March 15, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment 11 से 13 मार्च, 2016 तक राजस्थान के नागौर नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिनिधि सभा का वार्षिक सम्मेलन सम्पन्न हुआ। संघ की सर्वाधिक अधिकार प्राप्त सभा होने के नाते महत्वपूर्ण निर्णय प्रायः इसमें ही होते हैं। इस बार सभा की विशेषता यह रही कि इसमें स्वयंसेवकों के गणवेश में खाकी नेकर की जगह […] Read more » change in dress code of rss dress code of rss स्वयंसेवक स्वयंसेवक के वेश में परिवर्तन
कविता साहित्य कलयुगी कन्हैया March 14, 2016 by शकुन्तला बहादुर | 3 Comments on कलयुगी कन्हैया नाम “कन्हैया” पाकर समझा, मैं हूँ कृष्णकन्हैया । नहीं समझ पाया ले डूबेगा , निज जीवन-नैया ।। ” कान्हा ने जब उठा लिया था, गोवर्धन पर्वत को । मैं भी अब उखाड़ फेकूँगा ,इस मोदी शासन को ।।” जैसे क्षमा किये कान्हा ने , दुष्ट वचन शिशुपाल के । मोदी भी हैं क्षमा कर रहे, […] Read more » Poem by Shakuntala Bahadur poem on kanhaiya kumar JNU कन्हैया कलयुगी कन्हैया
कहानी साहित्य वर का शिकार March 14, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on वर का शिकार कुछ लोग कहते हैं कि रिश्ते ऊपर से ही बनकर आते हैं। फिर भी विवाह के विज्ञापनों का कारोबार खूब फल-फूल रहा है। किसी समय उत्तर भारत में हर रेलमार्ग के किनारे दीवारों पर ‘रिश्ते ही रिश्ते’ जैसे विज्ञापन लिखे मिलते थे; पर अब इनकी जगह पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट ने ले ली है। आजकल […] Read more »
कविता साहित्य एक हो जावें – पर्व होली का मनावें March 14, 2016 / March 14, 2016 by विमलेश बंसल 'आर्या' | Leave a Comment एक हो जावें, पर्व होली का मनावें, कुहुक रही हैं कोयल डालियाँ। फ़ाग गवावें, कृपा ईश्वर की पावें, झूम रही हैं जौ की बालियाँ।। एक हो जावें….. मासों में अंतिम मास फाल्गुन विदाई का। देने संदेशा आया, प्रेम और भलाई का। जगें जगावें, भेद हर दिल के मिटावें, पावन बनावें हृदय प्यालियाँ।। एक हो जावें […] Read more » Holi festival Poem on Holi होली होली पर्व
कविता साहित्य कैलिफ़ोर्निया में हिमपात March 11, 2016 by शकुन्तला बहादुर | 8 Comments on कैलिफ़ोर्निया में हिमपात टाहो झील पर – ************* हिमाच्छादित पर्वत-श्रेणी , शैलशिखर संग शोभित थी । ओढ़ रुपहली चूनर मानो , वधू सदृश वह गर्वित थी ं।। ऊपर नभ का था वितान और, पवन झकोरे मंगल गाते । खड़े संतरी से थे तरुवर , मानो थे पहरा देते ।। उत्सव सा था सजा हुआ , जो देख प्रकृति […] Read more » Poem by Shakuntala Bahadur कैलिफ़ोर्निया में हिमपात
लेख साहित्य गंगा तप की राह चला सन्यासी सानंद March 10, 2016 by अरुण तिवारी | Leave a Comment अरुण तिवारी प्रो जी डी अग्रवाल जी से स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी का नामकरण हासिल गंगापुत्र की एक पहचान आई आई टी, कानपुर के सेवानिवृत प्रोफेसर, राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय के पूर्व सलाहकार, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रथम सचिव, चित्रकूट स्थित ग्रामोदय विश्वविद्यालय में अध्यापन और पानी-पर्यावरण इंजीनियरिंग के नामी सलाहकार के रूप में […] Read more » Featured गंगा तप सन्यासी सानंद स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद
व्यंग्य साहित्य “आलसस्य परम सुखम “ March 10, 2016 by अमित शर्मा (CA) | 1 Comment on “आलसस्य परम सुखम “ प्राचीन काल से ही आलस को सामाजिक और व्यक्तिगत बुराई माना जाता रहा हैं. “जो सोवत हैं, वो खोवत हैं” जैसी कहावतो के माध्यम से आलसी लोगो को धमकाने और “अलसस्य कुतो विद्या” जैसे श्लोको के ज़रिये उनको सामाजिक रूप से ज़लील करने /ताने कसने के प्रयास अनंतकाल से जारी हैं. लेकिन फिर भी आज […] Read more » आलसस्य परम सुखम
लेख साहित्य लाल और नीली कटोरी : वामपंथ तथा अम्बेडकरवाद का प्रतीक March 10, 2016 by विजय कुमार | 2 Comments on लाल और नीली कटोरी : वामपंथ तथा अम्बेडकरवाद का प्रतीक इन दिनों दिल्ली का जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (ज.ने.वि.) काफी चर्चा में है। गत नौ फरवरी को वहां छात्रों तथा कुछ बाहरी लोगों ने पाकिस्तान जिन्दाबाद, भारत तेरे टुकड़े होंगे: इंशा अल्लाह, इंशा अल्लाह तथा भारत की बरबादी तक जंग चलेगी.. जैसे देशद्रोही नारे लगाये। वे अफजल गुरु, मकबूल बट तथा याकूब मेनन जैसे देशद्रोही […] Read more » Featured अम्बेडकरवाद अम्बेडकरवाद का प्रतीक कन्हैया कुमार जेएनयू नीली कटोरी लाल कटोरी वामपंथ वामपंथ का प्रतीक