आलोचना साहित्य शिव योगी हैं नशेडी नहीं | March 10, 2016 by अनुज अग्रवाल | Leave a Comment हाल ही में महाशिवरात्रि का पर्व बीत गया | यानि कि भगवान् आशुतोष का दिन | कई मित्रो के मेसेज आये शिवरात्रि की शुभकामनाये प्रेषित करते हुए | सभी का धन्यवाद सभी को शुभकामनाये | रूद्र आप सबकी रक्षा करे | पर मन उस तरह प्रफुल्लित हुआ जिस तरह एक त्यौहार पर होना चाहिए | […] Read more » शिव शिव नशेडी नहीं शिव योगी हैं शिव योगी हैं नशेडी नहीं
कविता साहित्य स्वामी विवेकानन्द जी की पुण्य-स्मृति मे – श्रद्धांजलि March 8, 2016 by शकुन्तला बहादुर | 2 Comments on स्वामी विवेकानन्द जी की पुण्य-स्मृति मे – श्रद्धांजलि भारत-भू पर हुए अवतरित, एक महा अवतार थे । थी विशेष प्रतिभा उनमें, वे ज्ञानरूप साकार थे ।। तेजस्वी थे, वर्चस्वी थे , महापुरुष थे परम मनस्वी । था व्यक्तित्व अलौकिक उनका, कर्मयोग से हुए यशस्वी ।। भारत के प्रतिनिधि बनकर वे, अमेरिका में आए थे । जगा गए वे जन जन को , युग-धर्म […] Read more » स्वामी विवेकानन्द जी की पुण्य-स्मृति मे
व्यंग्य साहित्य प्रौढ़ शिक्षा केंद्र और राजनीती के अखाड़े March 7, 2016 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment स्कूल और कालेजो को शिक्षा का मंदिर कहाँ जाता हैं। मंदिर इस देश की राजनीती को बहुत भाते हैं फिर चाहे वो इबादत के हो या शिक्षा के। शिक्षा के मंदिरो में राजनैतिक दल जितनी आसानी से घुस जाते हैं उतनी आसानी से तो अवैध बांग्लादेशी भी भारत में नहीं घुस पाते हैं। नेताओ को […] Read more » प्रौढ़ शिक्षा केंद्र प्रौढ़ शिक्षा केंद्र और राजनीती के अखाड़े राजनीती के अखाड़े
लेख समाज साहित्य राम मंदिर के लिए बलिदान देने वाली रानी जय राजकुमारी March 7, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment संत और राष्ट्र जागरण जब-जब देश-धर्म की हानि हुई है तब-तब भारत के संत महात्माओं ने भी अपने राष्ट्रधर्म का पालन करते हुए धर्म जागरण और राष्ट्र जागरण करने का पुनीत कार्य करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। वैसे भी राष्ट्र में शांति और सुव्यवस्था का सुंदर परिवेश ही व्यक्ति को धर्मशील बनाता है, और […] Read more » Featured Rani Jairajkumari sacrificed for rammandir रानी जय राजकुमारी राम मंदिर के लिए बलिदान देने वाली रानी जय राजकुमारी
कहानी साहित्य एक नंबर March 7, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment छात्रों के लिए एक नंबर का बड़ा महत्व है। कोई एक नंबर से पास हो जाता है, तो कोई फेल। किसी को एक नंबर की महिमा से छात्रवृत्ति मिल जाती है, तो किसी को नौकरी; पर एक नंबर के चक्कर में किसी को पत्नी मिली हो, ऐसी बात शायद आपने नहीं सुनी होगी; पर मेरे […] Read more » एक नंबर
आलोचना साहित्य और भाषण बाज नहीं चाहिए ! March 7, 2016 by कीर्ति दीक्षित | Leave a Comment कीर्ति दीक्षित क्षत विक्षत है भारत भूमि का अंग अंग बाणों से । त्राहि त्राहि का नाद निकलता है असंख्य प्राणों से । । दिनकर साहब की ये पंक्तियाँ आज के परिदृश्य में कितनी सफल होकर उतरती हैं, आज ये भारत भूमि यदि कोई मानवी रूप धारित किये होती तो कितने ही बार प्राण तज दिए […] Read more » और भाषण बाज नहीं चाहिए !
कविता साहित्य नारी March 6, 2016 by शकुन्तला बहादुर | 3 Comments on नारी हरिश्चन्द्र से पति के हाथों,बिकी शैव्या थी सतयुग में । निर्वासित हुई श्री राम के द्वारा , सीता त्रेता युग में ।। छला इन्द्र ने और अहिल्या,शापित हुई निज पति के द्वारा । दमयन्ती भी त्यक्त हुई थी , द्यूतपराजित नल के द्वारा ।। पंचपती न बचा सके थे, लाज द्रौपदी की द्वापर में । […] Read more » नारी
महत्वपूर्ण लेख विविधा साहित्य आपका सुंदर नाम रचिए। March 6, 2016 by डॉ. मधुसूदन | 3 Comments on आपका सुंदर नाम रचिए। डॉ. मधुसूदन (एक) प्रवेश: शायद आप कविता नहीं करते, पर कवियों या कवयित्रियों की भाँति अपना अलग और अच्छा-सा नाम अवश्य रच सकते हैं। आज आप को, ऐसे नाम रचने की सरल विधि समझाने का उद्देश्य है। विषय विस्तृत है, इस लिए कुछ ही उदाहरणों से इसे विशद किया जाएगा। कवि और कवयित्रियाँ, ऐसे सुन्दर […] Read more » Featured आपका सुंदर नाम रचिए।
कविता साहित्य आज के सवाल हैं कि आज ही जवाब दो। March 6, 2016 by अरुण तिवारी | Leave a Comment नदी जिये या जल मरें, बची रहे श्री सदा ऐसा भी कमाल हो, सत्ता ही दलाल हो, तो क्यों न ईमान पे सवाल हो ? जल रही मशाल है कि उठ रहे सवाल हैं कि आज के सवाल हैं कि आज ही जवाब दो। चुन गये तो क्या तुम्हीं भगवान हो गये? चुन रहा जो […] Read more » Featured आज के सवाल हैं कि आज ही जवाब दो।
कहानी साहित्य देवी की लीला March 1, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on देवी की लीला परसों मेरा एक मित्र रामपुर से आया। उसके पास जो अखबार था, उसमें ‘मां लीलावती निराश्रित कन्या आश्रम’ के ‘दीवाली मिलन’ का समाचार छपा था। उससे पता लगा कि इन दिनों आश्रम के अध्यक्ष मेरे मामाजी हैं। मामाजी के इस आश्रम से जुड़ने की कहानी बड़ी रोचक है; पर इसके लिए हमें लगभग दस […] Read more » देवी की लीला
व्यंग्य साहित्य और बड़कू मामा बन गए बुद्धिजीवी…!! March 1, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा बड़कू मामा गरीब बैकग्राऊंड से थे। लेकिन जैसा कि नाम से स्पष्ट है , वे अपने परिवार के दूसरे भाई – बहनों में बड़े थे। लिहाजा उन्हें अपनों का सुनिश्चित सम्मान बराबर मिलता था। घर के बड़े बुजुर्ग भी परिवार के सभी सदस्यों को बड़े के नाते उन्हें अनिवार्य सम्मान देने का […] Read more » और बड़कू मामा बन गए बुद्धिजीवी...!!
व्यंग्य साहित्य (ब)जट : यमला पगला दीवाना February 29, 2016 / February 29, 2016 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment अमित शर्मा प्रतिवर्ष संसद में आम बजट पेश किया जाता हैं. इसे आम बजट इसीलिये कहाँ जाता हैं क्योंकि ये आम के सीजन के पहले आता है. बजट पेश करने के पीछे आय-व्यय का वार्षिक लेखा -जोखा रखना तो गौण कारण हैं इसके पीछे (सुविधानुसार चाहे तो आगे भी मान सकते हैं)मुख्य कारण ये हैं […] Read more » (ब)जट : यमला पगला दीवाना satire on bidget