आलोचना प्रदेश में प्रशासन पस्त लेकिन समाजवादी मस्त February 27, 2015 by मृत्युंजय दीक्षित | 1 Comment on प्रदेश में प्रशासन पस्त लेकिन समाजवादी मस्त मृत्युंजय दीक्षित एक ओर जहां आजकल प्रदेश का कामकाज बेहद सुस्त हो गया है हर विभाग में अफसरों की लापरवाही के परिणाम सामने आ रहे हैं तथा समाजवादी सरकार की लोकलुभावन योजनाएं एक के बाद एक फेल होती जा रही हैं उस समय सैफई में जिस प्रकार से सपा मुखिया मुलायम के पोते तेज प्रताप […] Read more » प्रदेश में प्रशासन पस्त समाजवादी मस्त
आलोचना राहुल की छुट्टी या कर्तव्य से पलायन February 27, 2015 by सुरेश हिन्दुस्थानी | 2 Comments on राहुल की छुट्टी या कर्तव्य से पलायन सुरेश हिन्दुस्थानी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का हमेशा से ही राष्ट्रीय गतिविधियों से अलग रहने का स्वभाव रहा है। जब भी देश में कोई बड़ी घटना होती है, राहुल की तलाश की जाती है, लेकिन हमारे यह महाशय तलाश करने के बाद भी कहीं दिखाई नहीं देते हैं। बाद में कुछ सूत्र अवश्य इस बात […] Read more » कर्तव्य से पलायन राहुल की छुट्टी
व्यंग्य मैया मोरी , मैं नहीं संसद जायौ! February 26, 2015 by अशोक गौतम | 2 Comments on मैया मोरी , मैं नहीं संसद जायौ! हांतो रसिको! आज आपको ससंद पुराण कीआगे की कथा सुनाता हूं। संसद पुराण अनंत है। इसकी कथाएं अनंत हैं। मेरी इतनी हिम्मत कहां जो इन सात दिनों में आपके सामने पूरे संसद पुराण की कथा बांच सकूं। उसे सुनने के लिए तो ……. पिछले चार दिनों से आपने ससंद पुराण की कथा जिस लगन से […] Read more » मैं नहीं संसद जायौ
व्यंग्य समय से पहुंचने वाली ट्रेनें ही दे दीजिए February 25, 2015 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment हे रेलवे के नीति – नियंताओं ! हमें मंजिल पर समय से पहुंचने वाली ट्रेनें ही दे दीजिए …!! तारकेश कुमार ओझा चाचा , यह एलपी कितने बजे तक आएगी। पता नहीं बेटा, आने का राइट टेम तो 10 बजे का है, लेकिन आए तब ना…। शादी – ब्याह के मौसम में बसों की कमी के […] Read more » समय से पहुंचने वाली ट्रेनें ही दे दीजिए
व्यंग्य छुट्टी का हक तो बनता ही है.. February 25, 2015 by विजय कुमार | Leave a Comment शर्मा जी बहुत दिन से घूमने नहीं आ रहे थे। न सुबह, न शाम। बाकी मित्र तो ज्यादा चिन्ता नहीं करते; पर मेरा मन उनके बिना नहीं लगता। बहुत दिन हो जाएं, तो बेचैनी होने लगती है। सो मैं उनके घर चला जाता हूं। मिलना का मिलना, और साथ में भाभी जी के हाथ के […] Read more »
कहानी मर्डर इन गीतांजलि एक्सप्रेस February 25, 2015 by विजय कुमार सप्पाती | 6 Comments on मर्डर इन गीतांजलि एक्सप्रेस ||| सुबह 8:30 ||| मैंने टैक्सी ड्राईवर से पुछा- “और कितनी देर लगेंगी।” उसने कहा – “साहब बस 30 मिनट में पहुंचा देता हूँ।” मैंने घडी देखी 8:40 हो रहे थे। मैंने कहा – “यार 9 बजे की गाडी है।” थोडा जल्दी करो यार। उसने स्पीड बढ़ा दी. मैं नासिक की सडको को देखने लगा। मैं अपनी कंपनी के काम से आया हुआ था. […] Read more » मर्डर इन गीतांजलि एक्सप्रेस
आलोचना सैफई का समाजवाद : अंडर द कार्पेट February 23, 2015 / February 23, 2015 by अलकनंदा सिंह | 4 Comments on सैफई का समाजवाद : अंडर द कार्पेट देश की राजनीति में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद ऐसे कई नेता हुए जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख बदल दिया जिनमें से एक थे राममनोहर लोहिया। राजनीतिक अधिकारों के पक्षधर रहे डॉ. लोहिया ऐसी समाजवादी व्यवस्था चाहते थे जिसमें सभी की बराबर हिस्सेदारी रहे। लोहिया कहते थे कि सार्वजनिक धन […] Read more » सैफई का समाजवाद
व्यंग्य व्यंग्य बाण : वी.वी.आई.पी. खांसी February 21, 2015 / February 23, 2015 by विजय कुमार | 2 Comments on व्यंग्य बाण : वी.वी.आई.पी. खांसी मुझे फिल्म देखने का कभी शौक नहीं रहा। हां, अच्छे गीत सुनने से मन-मस्तिष्क को आराम जरूर मिलता है। बालगीत भी बहुत अच्छे लगते हैं। ऐसे कुछ गीत और कविताएं मैंने भी लिखी हैं। कई बड़े अभिनेताओं ने बालगीत गाये हैं, यद्यपि वे स्थापित गायक नहीं है। इनमें अशोक कुमार द्वारा फिल्म ‘आशीर्वाद’ में गाया […] Read more » वी.वी.आई.पी. खांसी
व्यंग्य न्याय बिकता है February 19, 2015 by अनुज अग्रवाल | 4 Comments on न्याय बिकता है चरित्र जज साहब, कपिल सिब्बल, गरीब किसान दीना और उसका वकील सुरेश … (किसान दीना के खेत पर प्रधान ने कब्जा कर लिया है | सुनवाई हो ही रही थी कि सिब्बल साहब का फ़ोन आ जाता है) कपिल सिब्बल :- “हेल्लो हजूर, .. माईबाप हैं का ? जज साहब :- कहिये क्या हुआ […] Read more » न्याय बिकता है
कविता प्रेम का ऐसा हठयोग …? February 19, 2015 by अलकनंदा सिंह | Leave a Comment आलता भरे पांव से वो ठेलती है, उन प्रभामयी रश्मियों को, कि सूरज आने से पहले लेता हो आज्ञा उससे प्रेम का ऐसा हठयोग देखा है तुमने कभी कैसे पहचानोगे कि कौन बेताल है, और कौन विक्रमादित्य, जिसके कांधे पर झूलता है मेरा और तुम्हारा मन ठंडी हुई आंच में भी सुलगने लगता है कोई […] Read more » प्रेम का ऐसा हठयोग ...?
कहानी होली बाद नमाज़ February 19, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment अहद एक मुसलमान है। मुसलमान इसिलए क्योंकि वो एक मुस्लिम परिवार में पैदा हुआ है। हां ये बात अलग है कि “वो कभी इस बात पर जोर नहीं देता है कि वो मुसलमान है। वो मुसलमान है तो है। क्या फर्क पड़ता है? और क्या जरुरत है ढि़ंढ़ोरा पीटने की?“ वो कभी इन बातों पर […] Read more » होली बाद नमाज़
कविता इक नया उत्कर्ष लाने जा रहा हूं February 18, 2015 by अरुण तिवारी | Leave a Comment आज रेगिस्तान में भी सावणी बरसात आई, मेघ डोल्या, सगुन बोल्या, मानसां का यह समंदर बढ चला आगे ही आगे राह छोङो, पंथ रोको मत, इक नया उत्कर्ष लाने जा रहा हूं । मृत पङे थे हाथ जो उन्हे लहराने जा रहा हूं। गैर की बंधक पङी तकदीर खुद छुङाने जा रहा हूं । गैर […] Read more » इक नया उत्कर्ष लाने जा रहा हूं