विधि-कानून खत्म नहीं होगी सजायाफ्ता जनप्रतिनिधियों की सदस्यता February 20, 2013 / February 20, 2013 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव यह हमारे देश की कानून व्यवस्था की ही विडंबना है कि जेल में कैद निर्दोष आरोपी तो मतदान करने के अधिकार से वंचित रहता है, लेकिन किसी सांसद और विधायक को गंभीर आपराधिक मामले में सजा भी हो जाए तो भी उसकी सदस्यता बेअसर रहती है। कानून की इस विसंगति को दूर करने […] Read more » खत्म नहीं होगी सजायाफ्ता जनप्रतिनिधियों की सदस्यता
विधि-कानून संविधान निर्माता February 20, 2013 / February 20, 2013 by डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री | 4 Comments on संविधान निर्माता डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री गणतंत्र दिवस का अवसर था। फ़ौज, पुलिस, कचहरी ,बैंक ,यूनिवर्सिटी जैसे भिन्न-भिन्न क्षेत्रों से सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों की अनौपचारिक गोष्ठी हो रही थी। चर्चा चल पड़ी कि देश का संविधान कैसे बना। कुछ लोगों का कहना था कि उस समय कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी, उसने कुछ लोग नामित ( nominate ) […] Read more » संविधान निर्माता
विधि-कानून विविधा संविधान के विपरीत है वीआईपी और वीवीआईपी श्रेणी February 20, 2013 / February 20, 2013 by बी.पी. गौतम | Leave a Comment बी.पी. गौतम विशिष्ट और अति विशिष्ट लोगों की सुरक्षा में लगे जवानों और उन पर किये जा रहे खर्च का मुद्दा उच्चतम न्यायलय तक पहुँच गया है। विशिष्ट और अति विशिष्ट लोगों को सुरक्षा देनी चाहिए या नहीं, इस पर बहस भी छिड़ गई है। कोई कह रहा है कि सुरक्षा देनी चाहिए, तो किसी […] Read more » वीआईपी और वीवीआईपी श्रेणी
विधि-कानून लोकपाल February 12, 2013 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment दिखार्इ दे रहा है। फिलहाल वह भले ही अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के जनलोकपाल की भावना के अनुरुप न हो, लेकिन ऐसा लगने लगा है कि सरकार लोकपाल लाना चाहती है। शायद इसलिए अन्ना की सहयोगी किरण बेदी ने कहा भी है कि सरकार लोकपाल को आगे बढ़ता देखना चाहती है। प्रमोद भार्गव लोकपाल […] Read more » लोकपाल
विधि-कानून लोकपाल विधेयक को मंत्रिमंडल की मंजूरी February 2, 2013 / February 2, 2013 by एडवोकेट मनीराम शर्मा | 2 Comments on लोकपाल विधेयक को मंत्रिमंडल की मंजूरी भारत में किसी भी निकाय को स्वायतता या स्वतन्त्रता की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि भारत में स्वायतता का कोई अभिप्राय: ही नहीं है| जो निकाय पहले से ही स्वतंत्र है उनकी स्थिति भी संतोषजनक नहीं है| न्यायपलिका जिसे स्वायतता और स्वतन्त्रता प्राप्त है वह जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरी उतर रही है| एक […] Read more »
विधि-कानून कठोर कानून तो चाहिए ही, लेकिन संस्कार व्यवस्था भी हो- मा. गो. वैद्य January 12, 2013 by मा. गो. वैद्य | 2 Comments on कठोर कानून तो चाहिए ही, लेकिन संस्कार व्यवस्था भी हो- मा. गो. वैद्य १६ दिसंबर को, राजधानी दिल्ली में चलती बस में एक २३ वर्षीय युवती पर पशु को भी शर्मिंदा करने वाला राक्षसी लैंगिक अत्याचार मानव देहधारी बदमाशों ने किया, उसने देश के समाजजीवन को झकझोंर दिया. सामान्यत: अपने विश्व में खोया रहने वाला मध्यम वर्ग बड़ी संख्या में रास्ते पर उतरा; और उसने उन गुंडों को […] Read more » बलात्कार
विधि-कानून सूचना का अधिकार और सरकार की अस्वस्थता : मा. गो. वैद्य November 7, 2012 by मा. गो. वैद्य | Leave a Comment सूचना अधिकार का कानून (राईट टू इन्फर्मेशन ऍक्ट) हमारे देश में है. इस अधिकार के अंतर्गत, सामान्य नागरिक सरकारी निर्णयों के बारे में, अनजाने या जानबूझकर अकारण गोपनीय रखी जानकारी पूछ सकता है और संबंधित विभाग को वह देनी पड़ती है. इस अधिकार के कारण, अनेक सरकारी घोटाले, सही में मंत्री और अन्य सरकारी अधिकारियों […] Read more » सूचना का अधिकार
जन-जागरण विधि-कानून जानने के हक पर अंकुश की कवायद October 19, 2012 / October 19, 2012 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भ :- निजता के बहाने सूचना के अधिकार पर अंकुश की कवायद प्रमोद भार्गव निजता के बहाने जानने के अधिकार, मसलन सूचना के अधिकार पर अंकुश लगाने की कवायद तेज होती दिखार्इ दे रही है। हालांकि अधिकार के पर कतरने की शुरुआत तो तभी हो गर्इ थी, जब मनमोहन सिंह सरकार ने सीबीआर्इ को सूचना […] Read more » ban on rti
टेक्नोलॉजी विधि-कानून इंटरनेट आरटीआई का दिल October 13, 2012 by सरमन नगेले | Leave a Comment 12 अक्टूबर सूचना का अधिकार दिवस पर विशेष सरमन नगेले भारत की सक्षमता के लिये आरटीआई और सबके लिये आरटीआई। मीडिया आरटीआई को प्रोत्साहित करे और आमजन इन्टरनेट के माध्यम से सूचना प्राप्त करना शुरू कर दें तो एक बड़ी क्रांति का सूत्रपात होगा। इन्टरनेट आरटीआई का दिल है, यह बात किसी आईटी प्रोफेशनल या […] Read more » आरटीआई इंटरनेट
आर्थिकी विधि-कानून भारत के हर ‘संसाधन’ पर हक है मेरा! October 5, 2012 / October 5, 2012 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment अदालती फैसले को सही संदर्भ में समझने की जरूरत संजय द्विवेदी राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए संदर्भ पत्र पर उच्चतम न्यायालय की राय को केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी अपनी विजय के रूप में प्रचारित करने में लगी है। जबकि यह मामले को आधा समझना है। ऐसी आधी-अधूरी समझ से ही संकट खड़े होते हैं। […] Read more » भारत के हर ‘संसाधन’ पर हक
जन-जागरण राजनीति विधि-कानून हम सेक्युलर हैं, क्योंकि — October 5, 2012 / October 5, 2012 by विपिन किशोर सिन्हा | 5 Comments on हम सेक्युलर हैं, क्योंकि — विपिन किशोर सिन्हा हम सेक्युलर हैं, क्योंकि — १. हम भारत के संविधान में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करके अल्पसंख्यकों को आरक्षण देते हैं। २. हम बांग्लादेश के घुसपैठी मुसलमानों का हिन्दुस्तान में सिर्फ़ स्वागत ही नहीं करते, बल्कि राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र बनवाकर भारत की नागरिकता भी देते हैं। ३. हम हिन्दू-तीर्थस्थलों […] Read more » we are seculars
विधि-कानून विविधा कसाब की फांसी और सरकार की नीतियां September 10, 2012 / September 9, 2012 by राकेश कुमार आर्य | 2 Comments on कसाब की फांसी और सरकार की नीतियां राकेश कुमार आर्य भारत की एकता और अखण्डता को मिटाने के लिए तथा यहां की आंतरिक शांति में विघ्न डालने की नीयत से 26 नवंबर 2008 को पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में प्रतिष्ठित मुंबई पर आतंकी हमला कराया था। इस हमले में पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद अजमल कसाब और कुछ […] Read more » hanging of Kasab कसाब की फांसी