Category: राजनीति

राजनीति

 कैसे हो सशक्त भारत का निर्माण

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पाकिस्तान को मोस्ट फेवरेट नेशन (MFN) न माना जाय और  समझौता एक्सप्रेस, दिल्ली-लाहौर बस सेवा व अन्य जितने भी भारत-पाक यात्रा के रेल व सड़क मार्ग है सभी को प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिये। सांस्कृतिक, फ़िल्मी व खेल आदि के नाम पर आये हुए सभी पाकिस्तानियों को निसंकोच देश से निकाला जाये और भविष्य के लिए इस पर भी प्रतिबंध लगें। भारत की सम्पूर्ण सीमाओं पर घुसपैठियों व आतंकियों को रोकने के प्रभावी उपाय किये जाए। सीमा क्षेत्रों में अवैध मस्ज़िद व मदरसो पर न्यायायिक कार्यवाही करके उनको ध्वस्त किया जाये। देश में सरकार द्वारा घोषित 90 मुस्लिम बहुल जिलों में ही पिछले  30 वर्षो के पुलिस व गुप्तचर विभागों के अभिलेखों का ब्यौरा (रिकार्ड्स) देखें  तो उसमें  नकली करेंसी, अवैध हथियार, नशीले पदार्थ व अन्य देशद्रोही घटनाओं में लिप्त पाये जाने वाले अपराधी अधिकाँश मुसलमान ही मिलेंगे।

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आर्थिकी चुनाव राजनीति

राजनीतिक चंदे के लिए निर्वाचन बाॅन्ड का औचित्य

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एक मोटे अनुमान के अनुसार देश के लोकसभा और विधानसभा चुनावों पर 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होते हैं। इस खर्च में बड़ी धनराशि कालाधन और आवारा पूंजी होती है। जो औद्योगिक घरानों और बड़े व्यापारियों से ली जाती है। आर्थिक उदारवाद के बाद यह बीमारी सभी दलों में पनपी है। इस कारण दलों में जनभागीदारी निरंतर घट रही है। अब किसी भी दल के कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को पार्टी का सदस्य नहीं बनाती हैं। मसलन काॅरपोरेट फंडिंग ने ग्रास रूट फंडिंग का काम खत्म कर दिया है। इस कारण अब तक सभी दलों की कोशिश रही है कि चंदे में अपारदर्शिता बनी रहे।

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राजनीति

भारत-इजराइल : धरती से स्वर्ग तक अटूट संबंध

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मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के वशीभूत इंदिरा गाँधी ने इजराइल के सबसे बड़े शत्रु फिलिस्तीन को सबसे पहले मान्यता दी और उसके "फिलिस्तीन मुक्ति संगठन" के अध्यक्ष यासिर अराफात को करोड़ों रुपये का 'नेहरु शांति पुरस्कार' 1980 में दिया था । इसके बाद राजीव गाँधी ने भी अपने कार्यकाल में उसको 'इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार' दिया था।जब के समाचारो से ज्ञात हुआ था कि राजीव गाँधी ने तो उसको पूरे विश्व में घूमने के लिए एक बोईंग 747 विमान भी उपहार में दिया था। मुस्लिम परस्ती भारत के नेताओं में उस समय इतनी अधिक छायी हुई थी कि  यासिर अराफात को छींक भी आती थी तब वो भागकर दिल्ली चला आता था और हमारे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा और राजीव गांधी आदि उसके लिए पलकें बिछाए रहते थे।

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