राजनीति ‘‘यह सिर्फ कष्ट की बात नहीं, हमारी सबसे बड़ी राष्ट्रीय त्रासदी है’’ April 18, 2013 / April 18, 2013 by वीरेंदर परिहार | 3 Comments on ‘‘यह सिर्फ कष्ट की बात नहीं, हमारी सबसे बड़ी राष्ट्रीय त्रासदी है’’ वीरेन्द्र सिंह परिहार भाजपा के मुख्य पत्र ‘कमल संदेश’ में प्रभात झा द्वारा यह लिखे जाने पर कि भारत की पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल, श्रीमती इन्दिरा गांधी के यहां रोटी बनाती थीं। इसलिए श्रीमती सोनिया गांधी ने उन्हे राष्ट्रपति बनवा दिया इस पर किसी ने लिखा कि यदि […] Read more »
राजनीति ‘‘आगे-आगे देखिए होता है, क्या?…………’’ April 18, 2013 by वीरेंदर परिहार | 2 Comments on ‘‘आगे-आगे देखिए होता है, क्या?…………’’ वीरेन्द्र सिंह परिहार अभी 13 अप्रैल तक ऐसा माना जा सकता था कि जद यू ने प्रधानमंत्री के प्रश्न पर गुजरात के नरेन्द्र मोदी के प्रति अपना रूख नरम कर लिया है। लेकिन 14 अप्रैल को नितीश कुमार ने जद यू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में […] Read more » modi and nitish Narendra Modi
राजनीति दो ध्रुवों पर केन्द्रित होती भारतीय राजनीति April 17, 2013 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on दो ध्रुवों पर केन्द्रित होती भारतीय राजनीति प्रमोद भार्गव भारत में सीधे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री चुने जाने की संवैधानिक व्यवस्था नहीं है, बावजूद देश में जिस तरह का राजनीतिक माहौल आकार लेता जा रहा है, उससे साफ है कि राजनीति दो व्यकितवादी ध्रुवों पर केन्द्रित हो रही है। ऐसे में संप्रग और राजग गठबंधन के प्रमुख दल कांग्रेस और भाजपा ने सुनियोजित […] Read more » दो ध्रुवों पर केन्द्रित होती भारतीय राजनीति
राजनीति मोदी से कौन डरता है? April 16, 2013 / April 16, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 2 Comments on मोदी से कौन डरता है? भारत में आम चुनाव होने में वैसे तो अभी एक वर्ष का समय शेष है परंतु जिस प्रकार की चर्चायें और बहस राजनीतिक विश्लेषकों और राजनीतिक दलों के मध्य चल रही है उससे तो अलग ही संकेत मिलते दिखायी दे रहे हैं। इन सबके मध्य यह अवश्य विचारणीय विषय है और शोध का भी विषय […] Read more »
राजनीति परिपक्व शरद यादव और नीतीश की बन्दर टोपी April 16, 2013 / April 16, 2013 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment बचपन में पढ़ी सुनी वह कहानी कमोबेश सभी की स्मृति में होगी जिसमें एक राहगीर व्यापारी बंदरों द्वारा चोरी की गई अपनी टोपियों को चतुराई से वापिस लेनें का प्रयास करता है. देश में धर्मनिरपेक्षता की अजीबोगरीब और अनगढ़ परिभाषाओं के चलते बिहारी मुख्यमंत्री नीतीश भी इस अल्पसंख्यक टोपी को लेकर वैसी ही कोई नई […] Read more » परिपक्व शरद यादव और नीतीश की बन्दर टोपी
राजनीति राजनीति:‘अत्याचार’ और ‘माफ़ी’ की April 14, 2013 / April 14, 2013 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जाफ़री हमारे देश के लोकतंत्र में सत्ता की मंजि़ल को तय करने के लिए विकास कार्यों के बजाए अन्य जिन रास्तों से होकर गुज़रा जाता है उनमें सांप्रदायिकता, जातिवाद व क्षेत्रवाद जैसे कई मार्ग शामिल होते हैं। इन्हीं अफ़सोसनाक रास्तों में एक रास्ता है पहले अत्याचार और फिर माफी की राजनीति किए जाने का। […] Read more »
राजनीति भाजपा का जेडीयू द्वारा भय दोहन April 14, 2013 by विनायक शर्मा | 4 Comments on भाजपा का जेडीयू द्वारा भय दोहन -विनायक शर्मा बिहार में एनडीए की बहुमत की सरकार चला रहे जेडीयू के नितीशकुमार को कुछ अधिक ही छटपटाहट सी लगी हुई जान पड़ती है. वैसे यह कोई नई बात नहीं है. समाजवादियों के लिए किसी भी दल या गठबंधन में अधिक दिन तक बने रहना बहुत ही कठिन है. इनका पूर्व का […] Read more » भाजपा का जेडीयू द्वारा भय दोहन
राजनीति क्या बाकर्इ सीबीआर्इ से भयभीत हैं मुलायम April 14, 2013 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव बार-बार सरकार और सीबीआर्इ के डर का राग अलाप रहे हैं। मुलायम के इस रहस्यमयी राग के अर्थ को समझना एकाएक मुश्किल है। क्योंकि जहां वे केन्द्र की सप्रंग सरकार द्वारा धमकाकर समर्थन लेने की बात करते हैं, वहीं कभी लालकृष्ण आडवाणी तो कभी जनसंघ के संस्थापक श्यामाप्रसाद […] Read more » क्या बाकर्इ सीबीआर्इ से भयभीत हैं मुलायम
राजनीति भारत का इतिहास रहा है संत शक्ति से प्रेरणा लेनें का April 13, 2013 / April 13, 2013 by प्रवीण गुगनानी | 1 Comment on भारत का इतिहास रहा है संत शक्ति से प्रेरणा लेनें का राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोर्चे यानि एन डी ए के घटक के तौर पर जनता दल यूनाइटेड जो कि पिछले दस वर्षों से भाजपा के साथ बिहार में अपना आधार विस्तारित करते हुए आज सत्ता सुख भोग रहा है को अचानक आवश्यक- अनावश्यक, उचित –अनुचित और बिना सोचे व्यक्तव्य जारी करनें की रपत पड़ गई लगती है. […] Read more »
राजनीति मानसिक दिवालियेपन की हदें लांघते सियासी बोल-वचन April 12, 2013 / April 12, 2013 by सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र” | 2 Comments on मानसिक दिवालियेपन की हदें लांघते सियासी बोल-वचन – सिद्धार्थ मिश्र”स्वतंत्र” जिह्रवा ऐसी बावरी कह गई स्वरग पाताल, आप कही भीतर भई जूती खात कपाल । इन दिनों चल रहे सियासी व्यंगबाणों को देखकर ये दोहा आज और भी प्रासंगिक हो गया है । हो भी क्यों ना हमारे अनपढ़ या फर्जी डिग्री के बल पर खुद को शिक्षित बताने वाले जननायकों के […] Read more » मानसिक दिवालियेपन
राजनीति पश्चिम बंगाल की मार्क्सवादी धींगामुश्ती पहुँची दिल्ली April 12, 2013 / April 12, 2013 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | Leave a Comment -- डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री पश्चिमी बंगाल में जब से मार्क्सवादी पार्टी की सरकार को ममता ने बिना किसी ममता के उलटा दिया है , तब से उनकी व्याकुलता बढ़ती जा रही है । दरअसल सोनिया कांग्रेस की मार्क्सवादी पार्टी के प्रति ममता ही बंगाल में उनके शासन को बचाने का काम करती रही है […] Read more »
राजनीति केंद्र में आए हिंदुत्व और मोदी April 12, 2013 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on केंद्र में आए हिंदुत्व और मोदी प्रमोद भार्गव भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह की 76 सदस्यीय जो नर्इ टीम वजूद में आर्इ है, उससे साफ है कि एक तो भाजपा आक्रामक हिंदुत्व के अपने सनातन अजेंडे को आगे बढ़ा रही है, दूसरे उसने प्रधानमंत्री के रुप में नरेन्द्र मोदी की दावेदारी अनौपचारिक रुप से सार्वजनिक कर दी है। क्योंकि संसदीय बोर्ड और […] Read more » केंद्र में आए हिंदुत्व और मोदी