विश्ववार्ता समाज योग बनाम सभ्यताओं का संघर्ष June 25, 2018 / June 25, 2018 by वीरेंदर परिहार | Leave a Comment (21 जून योग दिवस पर विशेष) वीरेन्द्र सिंह परिहार तमाम बाधाओं को पारकर पूर्ण बहुमत से प्रधानमंत्री बने नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने की सलाह दी थी। इसका समर्थन 177 से अधिक देशों ने किया, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और कनाडा जैसे देश थे। […] Read more » 46 मुस्लिम देशों Featured चीन और कनाडा प्रधानमंत्री बने नरेन्द्र मोदी भारतीय शास्त्रों योग बनाम सभ्यताओं का संघर्ष संयुक्त राज्य अमेरिका
समाज योग: कर्मसु कौशलम् June 25, 2018 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक इकाई का वृहद ढांचा इस राष्ट्र के संस्कार और सचेतक समाज से हैं | विस्तृत धर्म ग्रन्थ और उपनिषद जो जीवन जीने की कलाओं के साथ संस्कारों के संरक्षण की गाथा कहते है। योग,जीवन जीने की इन्ही कलाओं में एक है। योग भारत में […] Read more » Featured चीन जापान जैन धर्म और हिंदू धर्म तिब्बत दक्षिण पूर्व एशिया और श्रीलंका प्रक्रिया और धारणा बौद्ध धर्म योग योग: कर्मसु कौशलम् शब्द श्रीकृष्ण स्वामी रामदेव
राजनीति समाज धूल में हवा होती फर्टिलिटी June 25, 2018 / June 25, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment उमेश कुमार सिंह नई दिल्ली: आजकल धूल भरी हवा व प्रदूषण ने लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है, इसका सीधा असर हमारे जीवन को प्रभावित करता है यही कारण है कि दिल्ली एन सी आर में कई ऐसे कपल्स हैं, जो काफी कोशिशों के बाद भी बच्चा पैदा करने में नाकाम हो रहे हैं। ऐसे […] Read more » Featured कॉपर गर्भपात जहरीले कण जिंक धूल में हवा होती फर्टिलिटी पुरुषों की फर्टिलिटी लेड हवा व प्रदूषण
राजनीति समाज रोबोट छीनते मानव रोजगार June 23, 2018 / June 23, 2018 by देवेंद्रराज सुथार | Leave a Comment देवेंद्रराज सुथार रोबोट के बढ़ते निर्माण और प्रयोग के कारण मानव के रोजगार पर संकट गहराने लग गया है। वस्तुतः आज रोबोट्स न सिर्फ ऑफिस के अंदर बल्कि ऑफिस के बाहर भी लोगों की नौकरियां छीनने में लगे हैं। यह चिंता जताई जा रही है कि साल 2020 तक कई रोजगार ऐसे होंगे जो ऑटोमेशन […] Read more » Featured छीनते मानव रोजगार ट्रैक्सी ड्राइवर डिलीवरी बॉय नौकरियां रोबोट
समाज न्यू इंडिया का सपना और ज़हरीले खाद्य पदार्थों का धंधा ? June 21, 2018 / June 21, 2018 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी – इसमें कोई संदेह नहीं कि खान-पान को लेकर आम आदमी का रुझान शाकाहार की ओर बढ़ता जा रहा है।स्वास्थ्य के प्रति सजग व्यक्ति दूध,फल व हरी सब्जि़यों की ओर आकर्षित हो रहा है। बाज़ार में भी एक से बढक़र एक आकर्षक व लुभावने फल व सब्जि़यां बिकते दिखाई दे रहे हैं। इतने […] Read more » Featured खाद्य पदार्थों का धंधा ? जयपुर-जोधपुर व अजमेर दही दूध देसी न्यू इंडिया का सपना और ज़हरीले पनीर मिलावटखोरों
समाज योग से खत्म होती है मनुष्य के अन्दर की नकारात्मकता June 21, 2018 / June 24, 2018 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment दीपक राजपूत हर साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाता है। इस साल पूरे विश्व में चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। भारत देश में योगदिवस का एक अपना ही अलग महत्त्व है। योग भारतीय प्राचीन संस्कृति की परम्पराओं को समाहित करता है। भारत देश में योग का प्राचीन समय से हीअहम स्थान है। पतंजली योग दर्शन में कहा गया है कि– योगश्चित्तवृत्त निरोधः अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तोह्रदय की प्रकृति का संरक्षण ही योग है। जो मनुष्य को समरसता की और ले जाता है। योग मनुष्य की समता और ममता को मजबूती प्रदान करता है। यहएक प्रकार का शारारिक व्यायाम ही नहीं है बल्कि जीवात्मा का परमात्मा से पूर्णतया मिलन है। योग शरीर को तो स्वस्थ्य रखता है ही इसके साथ–साथ मनऔर दिमाग को भी एकाग्र रखने में अपना योगदान देता है। योग मनुष्य में नये–नये सकारात्मक विचारों की उत्पत्ति करता है। जो कि मनुष्य को गलतप्रवृति में जाने से रोकते हैं। योग मन और दिमाग की अशुद्धता को बाहर निकालकर फेंक देता है। साथ-साथ योग से मनुष्य के अन्दर की नकारात्मकता खत्म होती है। योग व्यक्तिगत चेतना को मजबूती प्रदान करता है। योग मानसिक नियंत्रण का भी माध्यम है। हिन्दू धर्म, बौध्द धर्म औरजैन धर्म में योग को आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाता है। योग मन और दिमाग को तो एकाग्र रखता है ही साथ ही साथ योग हमारी आत्मा को भी शुध्दकरता है। योग मनुष्य को अनेक बीमारियों से बचाता है और योग से हम कई बीमारियों का इलाज भी कर सकते हैं। असल में कहा जाते तो योग जीवनजीने का माध्यम है। श्रीमद्भागवत गीता में कई प्रकार के योगों का उल्लेख किया गया है। भगवद गीता का पूरा छठा अध्याय योग को समर्पित है। इस मे योग के तीन प्रमुखप्रकारों के बारे में बताया गया है। इसमें प्रमुख रूप से कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग का उल्लेख किया गया है। कर्म योग– कार्य करने का योग है।इसमें व्यक्ति अपने स्थिति के उचित और कर्तव्यों के अनुसार कर्मों का श्रद्धापूर्वक निर्वाह करता है। भक्ति योग– भक्ति का योग। भगवान् के प्रति भक्ति। इसे भावनात्मक आचरण वाले लोगों को सुझाया जाता है। और ज्ञान योग– ज्ञान का योग अर्थात ज्ञान अर्जित करने का योग। भगवत गीता के छठेअध्याय में बताये गए सभी योग जीवन का आधार हैं। इनके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। भगवद्गीता में योग के बारे में बताया गया है कि– सिद्दध्यसिद्दध्यो समोभूत्वा समत्वंयोग उच्चते। अर्थात् दुःख–सुख, लाभ–अलाभ, शत्रु–मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्र समभाव रखना योगहै। दुसरे शब्दों में कहा जाए तो योग मनुष्य को सुख–दुःख, लाभ–अलाभ, शत्रु–मित्र, शीत और उष्ण आदि परिस्थितिओं में सामान आचरण की शक्ति प्रदानकरता है। भगवान् श्रीकृष्ण ने गीता में एक स्थल पर कहा है ‘योगः कर्मसु कौशलम’ अर्थात योग से कर्मो में कुशलता आती हैं। वास्तव में जो मनुष्य योगकरता है उसका शरीर, मन और दिमाग तरोताजा रहता है। और मनुष्य प्रत्येक काम मन लगाकर करता है। 27 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में अपने पहले संबोधन में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की जोरदार पैरवी की थी। इसप्रस्ताव में उन्होंने 21 जून को ‘‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’’ के रूप में मान्यता दिए जाने की बात कही थी। मोदी की इस पहल का 177 देशों ने समर्थनकिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र में इस आशय के प्रस्ताव को लगभग सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। और 11 दिसम्बर 2014 को को संयुक्तराष्ट्र में 193 सदस्यों द्वारा 21 जून को ‘‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’’ को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रस्ताव को 90 दिन केअंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, जो संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव के लिए सबसे कम समय है। पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून2015 को मनाया गया और पूरे विश्व में धूमधाम से मनाया गया। इस दिन करोड़ों लोगों ने विश्व में योग किया जो कि एक रिकॉर्ड था। योग दिवस में ‘सूर्य नमस्कार’ व ‘ओम’ उच्चारण का कुछ मुस्लिम संगठन विरोध करते रहे हैं। असल में कहा जाए तो ‘ओम’ शब्द योग के साथ जुड़ाहुआ है। इसे विवाद में तब्दील करना दुर्भागयपूर्ण है। लेकिन इसे हर किसी पर थोपा भी नहीं जा सकता। इसलिए योग करते समय लोगों को ‘ओम’ उच्चारण को अपनी धार्मिक मान्यता की आजादी के अनुसार प्रयोग करना चाहिए। अगर किसी का धर्म ओम उच्चारण की आजादी नहीं देता तो उन्हें बिनाओम जाप के योग करना चाहिए। लेकिन योग को किसी एक धर्म से जोडकर विवाद पैदा नहीं करना चाहिए। आज के समय में योग को भारत के जन–जनतक योग को पहुँचाने में योग गुरु बाबा रामदेव, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर सहित अनेकों ऐसे महापुरुषों का अहम् योगदान है। इनके योग के क्षेत्र मेंयोगदान की वजह से ही आज भारत के घर–घर में प्रतिदिन योग होता है। भगवद्गीता के अनुसार – तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम। अर्थात् कर्त्व्य कर्म बन्धक न हो, इसलिए निष्काम भावना से अनुप्रेरित होकरकर्त्तव्य करने का कौशल योग है। योग को सभी लोगों को सकारात्मक भाव से लेना चाहिए। कोई भी धर्म–सम्प्रदाय योग की मनाही नहीं करता। इसलिएलोगों को योग को विवाद में नहीं घसीटना चाहिए। योग बुध्दि कुशग्र बनाता है और संयम बरतने Read more » Featured आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर पतंजली योग बाबा रामदेव मनुष्य के अन्दर की नकारात्मकता मुस्लिम संगठन सूर्य नमस्कार
समाज बुज़ुर्गों की दयनीय स्थिति चिंताजनक June 20, 2018 / June 20, 2018 by देवेंद्रराज सुथार | 1 Comment on बुज़ुर्गों की दयनीय स्थिति चिंताजनक देवेंद्रराज सुथार बुज़ुर्गों का उत्पीड़न घर से शुरू होता है और इसे अंजाम वे लोग देते हैं जिन पर वह सबसे ज्यादा विश्वास करते हैं। इस वर्ष, दुर्व्यवहार को अंजाम देने वाले लोगों में सबसे पहले बेटे हैं, उसके बाद बहुएं हैं। इस बात का खुलासा सामाजिक संस्था ‘हेल्पेज इंडिया’ ने किया है। हाल में […] Read more » Featured आवास उत्पीड़न कपड़ा कानून चिकित्सा और गुजारे बुज़ुर्गों की दयनीय स्थिति चिंताजनक भोजन
समाज योग से खत्म होती है मनुष्य के अन्दर की नकारात्मकता June 19, 2018 / June 19, 2018 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment ब्रह्मानंद राजपूत, हर साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाता है। इस साल पूरे विश्व में चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। भारत देश में योग दिवस का एक अपना ही अलग महत्त्व है। योग भारतीय प्राचीन संस्कृति कीपरम्पराओं को समाहित करता है। भारत देश में योग का प्राचीन समय से ही अहम स्थान है। पतंजली योग दर्शन में कहा गया है कि– योगश्चित्तवृत्त निरोधः अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है। दूसरे शब्दों में कहा जाएतो ह्रदय की प्रकृति का संरक्षण ही योग है। जो मनुष्य को समरसता की और ले जाता है। योग मनुष्य की समता और ममता को मजबूती प्रदान करता है। यह एक प्रकार का शारारिक व्यायाम ही नहीं है बल्कि जीवात्मा कापरमात्मा से पूर्णतया मिलन है। योग शरीर को तो स्वस्थ्य रखता है ही इसके साथ–साथ मन और दिमाग को भी एकाग्र रखने में अपना योगदान देता है। योग मनुष्य में नये–नये सकारात्मक विचारों की उत्पत्ति करता है। जो किमनुष्य को गलत प्रवृति में जाने से रोकते हैं। योग मन और दिमाग की अशुद्धता को बाहर निकालकर फेंक देता है। साथ-साथ योग से मनुष्य के अन्दर की नकारात्मकता खत्म होती है। योग व्यक्तिगत चेतना कोमजबूती प्रदान करता है। योग मानसिक नियंत्रण का भी माध्यम है। हिन्दू धर्म, बौध्द धर्म और जैन धर्म में योग को आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाता है। योग मन और दिमाग को तो एकाग्र रखता है ही साथ ही साथ योगहमारी आत्मा को भी शुध्द करता है। योग मनुष्य को अनेक बीमारियों से बचाता है और योग से हम कई बीमारियों का इलाज भी कर सकते हैं। असल में कहा जाते तो योग जीवन जीने का माध्यम है। श्रीमद्भागवत गीता में कई प्रकार के योगों का उल्लेख किया गया है। भगवद गीता का पूरा छठा अध्याय योग को समर्पित है। इस मे योग के तीन प्रमुख प्रकारों के बारे में बताया गया है। इसमें प्रमुख रूप से कर्म योग, भक्तियोग और ज्ञान योग का उल्लेख किया गया है। कर्म योग– कार्य करने का योग है। इसमें व्यक्ति अपने स्थिति के उचित और कर्तव्यों के अनुसार कर्मों का श्रद्धापूर्वक निर्वाह करता है। भक्ति योग– भक्ति का योग। भगवान् केप्रति भक्ति । इसे भावनात्मक आचरण वाले लोगों को सुझाया जाता है। और ज्ञान योग– ज्ञान का योग अर्थात ज्ञान अर्जित करने का योग। भगवत गीता के छठे अध्याय में बताये गए सभी योग जीवन का आधार हैं। इनके बिनाजीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। भगवद्गीता में योग के बारे में बताया गया है कि – सिद्दध्यसिद्दध्यो समोभूत्वा समत्वंयोग उच्चते। अर्थात् दुःख–सुख, लाभ–अलाभ, शत्रु–मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्रसमभाव रखना योग है। दुसरे शब्दों में कहा जाए तो योग मनुष्य को सुख–दुःख, लाभ–अलाभ, शत्रु–मित्र, शीत और उष्ण आदि परिस्थितिओं में सामान आचरण की शक्ति प्रदान करता है। भगवान् श्रीकृष्ण ने गीता में एक स्थलपर कहा है ‘योगः कर्मसु कौशलम’ अर्थात योग से कर्मो में कुशलता आती हैं। वास्तव में जो मनुष्य योग करता है उसका शरीर, मन और दिमाग तरोताजा रहता है। और मनुष्य प्रत्येक काम मन लगाकर करता है। 27 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में अपने पहले संबोधन में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की जोरदार पैरवी की थी। इस प्रस्ताव में उन्होंने 21 जून को ‘‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’’ के रूप में मान्यतादिए जाने की बात कही थी। मोदी की इस पहल का 177 देशों ने समर्थन किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र में इस आशय के प्रस्ताव को लगभग सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। और 11 दिसम्बर 2014 को को संयुक्तराष्ट्र में 193 सदस्यों द्वारा 21 जून को ‘‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’’ को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रस्ताव को 90 दिन के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, जो संयुक्त राष्ट्र संघ में किसीदिवस प्रस्ताव के लिए सबसे कम समय है। पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया और पूरे विश्व में धूमधाम से मनाया गया। इस दिन करोड़ों लोगों ने विश्व में योग किया जो कि एक रिकॉर्ड था। योग दिवस में ‘सूर्य नमस्कार’ व ‘ओम’ उच्चारण का कुछ मुस्लिम संगठन विरोध करते रहे हैं। असल में कहा जाए तो ‘ओम’ शब्द योग के साथ जुड़ा हुआ है। इसे विवाद में तब्दील करना दुर्भागयपूर्ण है। लेकिन इसे हर किसीपर थोपा भी नहीं जा सकता। इसलिए योग करते समय लोगों को ‘ओम’ उच्चारण को अपनी धार्मिक मान्यता की आजादी के अनुसार प्रयोग करना चाहिए। अगर किसी का धर्म ओम उच्चारण की आजादी नहीं देता तो उन्हेंबिना ओम जाप के योग करना चाहिए। लेकिन योग को किसी एक धर्म से जोडकर विवाद पैदा नहीं करना चाहिए। आज के समय में योग को भारत के जन–जन तक योग को पहुँचाने में योग गुरु बाबा रामदेव, आध्यात्मिक गुरुश्री श्री रविशंकर सहित अनेकों ऐसे महापुरुषों का अहम् योगदान है। इनके योग के क्षेत्र में योगदान की वजह से ही आज भारत के घर–घर में प्रतिदिन योग होता है। भगवद्गीता के अनुसार – तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम। अर्थात् कर्त्व्य कर्म बन्धक न हो, इसलिए निष्काम भावना से अनुप्रेरित होकर कर्त्तव्य करने का कौशल योग है। योग को सभी लोगों को सकारात्मकभाव से लेना चाहिए। कोई भी धर्म–सम्प्रदाय योग की मनाही नहीं करता। इसलिए लोगों को योग को विवाद में नहीं घसीटना चाहिए। योग बुध्दि कुशग्र बनाता है और संयम बरतने की शक्ति देता है। योग की जितनी धार्मिकमान्यता है। उतना ही योग स्वस्थ्य शरीर के लिए जरूरी है। योग से शरीर तो स्वस्थ्य रहता है ही साथ ही साथ योग चिंता के भाव को कम करता है। और मनोबल भी मजबूत करता है। योग मानसिक शान्ति प्रदान करता है औरजीवन के प्रति उत्साह और ऊर्जा का संचार करता है। योग मनुष्य में सकारात्मकता तो बढाता है ही, साथ ही साथ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढाता है। इसलिए लोगों को इस तनाव भरे जीवन से मुक्ति पाने के लिए योगकरना चाहिए। और दूसरे लोगों को भी प्रेरित करना चाहिए। जिससे कि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके। Read more » Featured आध्यात्मिक गुरुश्री श्री रविशंकर बौध्द धर्म और जैन धर्म मनुष्य के अन्दर की नकारात्मकता योग गुरु बाबा रामदेव योग दिवस योग से खत्म होती है हिन्दू धर्म
कविता समाज अस्तित्व June 19, 2018 / June 25, 2018 by डॉ छन्दा बैनर्जी | Leave a Comment डॉ. छन्दा बैनर्जी मैं एक फोटो फीचर जर्नलिस्ट हूँ । शहर के सांस्कृतिक गतिविधियों से सम्बन्धित फीचर तैयार करता हूँ । साधारणतया ऐसे कार्यक्रम जहाँ किसी महापुरुष की जन्म शताब्दी समारोह हो या कोई दिवस विशेष पर मनाया जाने वाला वार्षिकी समारोह, सहसा मुझे आकर्षित नहीं कर पाते । चूँकि मीडिया के प्रोफेशन में हूँ […] Read more » अस्तित्व आकाशवाणी उपन्यास फीचर जर्नलिस्ट
समाज २७ बार रक्तदान कर आदर्श उपस्थित करने वाले आदर्श व्यक्ति-“आर्यसमाज धामावाला- डा. विनीत कुमार” June 18, 2018 / June 18, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, आर्यसमाज धामावाला-देहरादून ऋषि दयानन्द के कर कमलों से स्थापित आर्यसमाज है। विश्व में किसी मुस्लिम बन्धु की उसके पूरे परिवार सहित पहली शुद्धि ऋषि दयानन्द जी ने इसी आर्यसमाज में की थी और उसका नाम अलखधारी रखा था। आर्यसमाज धामावाला से अतीत में अनेक प्रसिद्ध विद्वान व नेता जुड़े रहे हैं जिन्होंने […] Read more » २७ बार रक्तदान कर Featured आदर्श उपस्थित करने वाले आदर्श व्यक्ति आर्यनेता श्री ओम्प्रकाश त्यागी गुरुकुल डा. भवानीलाल भारतीय पं. प्रकाशवीर शास्त्री मेश्वरानन्द सरस्वती लाला राम गोपाल शालवाले शायद गुरुकुल वृन्दावन शास्त्रार्थ महारथी पं. ओम् प्रकाश शास्त्री - खतौली स्वामी अमर स्वामी सरस्वती स्वामी डा. सत्यप्रकाश जी स्वामी मुनीश्वरानन्द सरस्वती स्वामी सत्यपति जी
समाज भारत की खाप पंचायतों के तालिबानी फरमान June 17, 2018 / June 17, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य  भारत में प्रचलित खाप पंचायतों के विरुद्ध शिक्षित वर्ग और देश के न्यायालयों की कड़ी आपत्ति समय-समय पर आती रही है। इसके उपरांत भी खाप पंचायतों के अन्यायपूर्ण और निर्दयता से भरे निर्णय को हम बार-बार सुनते रहते हैं। ऐसे में खाप पंचायतों की स्थिति के बारे में हमें गंभीरता से […] Read more » Featured काइयां के तालिबानी फरमान ग्राम पंचायत में स्वयंसेवी चालाक और बेईमान न्यायप्रेमी न्यायालयों भारत की खाप पंचायतों
समाज फ़ादर्स डे बनाम तर्पण June 16, 2018 / June 16, 2018 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमार रिश्ते में हम तेरे बाप लगते हैं, तब लगता है कि बाप कोई बड़ी चीज होता है लेकिन बाज़ार ने ‘फादर्स डे’ कहकर उसे भी टेडीबियर की शक्ल दे दी है। ब्च्चे उन्हीं की जेब काटकर, उन्हें गिफ्ट देते हैं। उपहार कहने पर बाज़ार की नज़रों में देहाती हो जाएंगे, इसीलिए गिफ़्ट कहना […] Read more » पिता फ़ादर्स डे बनाम तर्पण फादर्स-डे भारतीय संस्कृति रिश्ते