राजनीति समाज बस्तों का बोझ कम करने का सराहनीय उपक्रम June 5, 2018 / June 5, 2018 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग शिक्षा के निजीकरण के दौर में बस्ते का बोझ हल्का करने की बात एक सपना बन कर रह गयी, बच्चों के मानसिक तनाव को कम करने के प्रयास निरर्थक होते नजर आने लगे एवं बच्चों का बचपन लुप्त होने लगा, ऐसे जटिल हालात में सरकार ने स्कूली बच्चों के पाठ्यक्रम का बोझ कम […] Read more » Featured का सराहनीय उपक्रम पांचवीं कक्षा बच्चों बस्तों का बोझ कम करने विद्यार्थियों शिक्षा के निजीकरण होमवर्क
समाज संकट जीवन को गढ़ते हैं June 5, 2018 / June 5, 2018 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग संकट जीवन का सहचर है, वह सबके साथ चलता है। लेकिन आदमी संकट के नाम से ही घबड़ाता है। संकट का आभास होते ही वह उससे बचने के उपाय करने लगता है। लेकिन संसार में शायद ही ऐसे व्यक्ति का जन्म हुआ हो जिसने संकटों का सामना न किया हो। संकट तो जीवंत […] Read more » Featured इतिहास खुशी या उदासी गढ़ते हैं शक्ति का जागरण संकट जीवन
समाज मैं भी अब मास्टर बन सकती हूँ June 2, 2018 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment शराब के खिलाफ महिलाओं के प्रयास ने सजाया बच्चों की आंखों में सपना अनीसुर्रहमान खान बच्चों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में “सभी प्रकार की हिंसा से बच्चों की सुरक्षा” उनका मौलिक अधिकार घोषित किया गया है, बच्चों के खिलाफ हिंसा के सभी रूपों को समाप्त करने के लिए सतत विकास केलक्ष्य 2030 के एजेंडा में एक विशिष्ट लक्ष्य (एसडीजी 16.2) को शामिल किया गया है। जो भय, उपेक्षा, दुर्व्यवहार और शोषण से मुक्त रहने के लिए प्रत्येक बच्चे के अधिकार की प्राप्ति को एक नई गति मिलती है। एक भयावह सच यह है कि बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण की घटनाओं के मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। जबकि आदिवासी बहुल राज्य ओडिशा इसी श्रेणी में देश में चौथे स्थान पर है। राष्ट्रीयअपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार ओडिशा में बच्चों के साथ होने वाले अपराधों के अंतर्गत बड़ी संख्या में केस दर्ज किये जाते हैं। एक अनुमान के अनुसार ओडिशा के एक लाख बच्चों में से प्रत्येक सात बच्चों का यौनशोषण किया जाता है। मनोवैज्ञानिक इन अपराधों के पीछे कई कारणों को ज़िम्मेदार मानते हैं, जिनमें शराब का सेवन भी प्रमुख है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ओडिशा के संभलपुर जिला स्थित लरियापली ग्रामपंचायत की महिलाओं ने सख़्त क़दम उठाते हुए क्षेत्र को शराब जैसी कुरीतियों से मुक्त करने का बीड़ा उठाया है। इससे बच्चों का न केवल भविष्य संवर रहा है बल्कि उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के भी प्रयास जारी हैं। महिलाओं के इस हौसले ने गांव के लोगों विशेषकर पुरुषों में शराब के प्रति सोंच को भी बदलने का काम किया है। शराबबंदी से होने वाले परिवर्तनों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए गांव की एक युवा लड़की बताती है कि”अब मुझे विश्वास हो गया है कि मास्टर बनने का मेरा सपना अब पूरा हो सकता है।” वहीं दूसरी ओर आठवीं क्लास में पढ़ने वाली चौदह वर्षीय सुकांति कालू आत्मविश्वास से लबरेज होकर बताती है कि “पहले मेरे पापान केवल सभी प्रकार का नशा किया करते थे बल्कि घर में झगड़ा और मारपीट भी करते थे। जब शाम को उनके घर आने का समय होता तो हम लोग घर का अंधेरा कोना खोज कर इसमें अपने आप को छिपाने के प्रयास में लग जाते, लेकिन बेचारी माँ! उसकी तो जम कर पिटाई होती थी। माँ को मार खाता देख, बर्दाश्त नहीं होता तो मैं उस को बचाने जाती, मगर जब खुद की पिटाई होती तो न चाहते हुए भी अलग होना पड़ताथा।” सुकांती के पिता घनश्याम कालू एक राजमिस्त्री है, जो दिन भर की अपनी मेहनत की कमाई को शाम में शराब की चंद बोतलों में उड़ा दिया करता था। उसकी एक रिश्तेदार रुक्मणी प्रधान कहती हैं कि “घनश्यामकालू पहले महुआ और चावल से बने स्थानीय शराब का भी आदी था, इतना ही नहीं उसकी पत्नी भी ताड़ी का सेवन की आदी थी”। लेकिन अब उन्होंने इस बुराई से तौबा कर ली है। दाहिने हाथ में कलम और बाएँ हाथ में कॉपी पकड़े कुर्सी पर बैठी सुकांति मुस्कुराते हुए कहती है कि “अब हमारे पापा और मम्मी हमें खूब पढ़ाना चाहते हैं, अब शाम को जब हमारे पिता घर आते हैं तो उनके हाथ मेंहमारे लिए मिठाइयां या फल होते हैं। हमारी एक मांग पर कॉपी, कलम, किताब सब कुछ हाज़िर कर देते हैं और कहते हैं कि एक दिन मेरी बेटी मेरा नाम रोशन करेगी, मैं ने भी सोच रखा है कि अब मैं दिल व जान सेपढ़ाई करूंगी और मास्टर बनकर गांव के सारे बच्चों को भी पढ़ाऊंगी।” गांव में अचानक आये इस बदलाव को लेकर 23 वर्षीय पदमनी बदनाईक कहती हैं कि “मैं खुद बी.ए पास हूँ, मेरा घर सुनदरगढ़ जिले में है लेकिनमैं ने यह तय कर रखा है कि अपने लोगों के लिए कुछ ज़रूर करूँगी, यह उसी का हिस्सा है कि मैं यहाँ महिलाओं को एकत्रित करके उन्हें शराब से होने वाले जानी माली नुकसान से अवगत कराया, और महिलाओं कोतैयार किया कि गांव में शराब की क्रय-विक्रय को बंद किया जाए, शुरू में इस काम में थोड़ी मुश्किल ज़रूर आई, लेकिन अब स्थिति बहुत बेहतर है”। अपनी मुहिम के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि “शुरुआत में, हमने यहाँ की महिलाओं को समूह से जोड़ने के लिए, उनके घर गए और साथ बैठ कर समस्या का समाधान करने की कोशिश की, लेकिन हताश औरमार खाने की आदी हो चुकी अधिकांश महिलाओं ने यही उत्तर दिया कि “हम क्या कर सकते हैं?” लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और धीरे धीरे दस महिलाओं का एक स्वयं सहायता समूह (एस.एच.जी) बनाया, जिन्होंनेशराब की भट्ठी चलाने वालों का विरोध शुरू कर दिया, देखते ही देखते और भी महिलाएं समूह का हिस्सा बनने लगीं, तो समूह को बड़ा करते हुए इसका नाम “नारी शक्ति संघ” कर दिया गया”। “नारी शक्ति संघ” की अध्यक्षा हमादरी धरवा अपनी पंचायत की उप सरपंच भी हैं, जबकि सचिव परीमोदोनिय नायक हैं। एक अन्य सदस्य अपना परिचय कराते हुए कहती है कि “मेरा नाम पुष्पलता नायक है, गांव केअन्य पुरुषों की तरह मेरा पति भी शराब पीता था, जिस के कारण हमारे घरेलू हालात बद से बदतर हो गए थे। यही हाल गांव की अन्य महिलाओं के घरों का भी था, इसलिए सभी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया किइसके ज़िम्मेदार शराब की भट्ठी को बंद करवाना होगा। इस निर्णय को बदलने के लिए हमारे पतियों ने हमपर काफी दबाब बनाया यहां तक कि हमारे साथ मारपीट भी की, वहीं दूसरी ओर हमारे आंदोलन को ख़त्म करनेके लिए शराब भट्टी के मालिकों ने कई तरह के प्रलोभन और धमकियां भी दीं, लेकिन आखिरकार हमारे अटल इरादे के आगे उन्हें घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा। गांव में शराबबंदी को सख्ती से लागू समूह ने यह फैसला भी लिया कि यदि गांव में कोई भी पुरुष या महिला शराब पीकर गाली गलौज करेगा तो उस पर पहली बार एक हजार रूपए का जुर्माना लगाया जाएगा। अगरदूसरी बार भी पकड़ा गया तो जुर्माने की राशि बढ़ कर दो हजार हो जाएगी। ऐसे ही शराब की भट्टी वालों के लिए भी एक कानून बनाया कि अगर गांव में शराब बनाते हुए पकड़े गए तो पहली बार पांच हज़ार का जुर्मानादेना होगा और यदि दूसरी बार भी पकड़े जाते हैं, तो दंड की राशि दोगुनी हो जाएगी। हमारे इस फैसले का गांव में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। शराबबंदी से एक तरफ जहां गांव के लोगों के जीवन स्तर में सुधारआया है वहीँ दूसरी ओर उनके घर की आमदनी भी बढ़ी है। अब बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी बल दिया जा रहा है। लरियापली जैसे हजारों गाँव में लाखों बच्चे न जाने कैसे कैसे सपनों को अपनी आँखों में सजाते होंगे। लेकिन क्या हर बच्चे अपने सपनों को सुकांति की तरह पूरा कर पाते है? यह वह प्रश्न है जो हर शराबी को कम सेकम एक बार अपने हाथ में शराब की बोतल पकड़ने से पहले अवश्य करना चाहिए, आप का यह प्रश्न और उत्तर लाखों बच्चों की ज़िंदगी बदल देगा। Read more » Featured कलम नारी शक्ति संघ" मां लरियापली ग्रामपंचायत संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन
चिंतन समाज भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का गिरता स्तर May 31, 2018 by देवेंद्रराज सुथार | Leave a Comment देवेंद्रराज सुथार किसी भी देश में स्वास्थ्य का अधिकार जनता का सबसे पहला बुनियादी अधिकार होता हैं। लेकिन भारत में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में रोज़ाना हजारों लोग अपनी जान गंवा देते हैं। भारत स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बांग्लादेश, चीन, भूटान और श्रीलंका समेत अपने कई पड़ोसी देशों से पीछे हैं। इसका खुलासा […] Read more » Featured अफगानिस्तान 8.2 प्रतिशत अस्पतालों का गिरता स्तर चीन बांग्लादेश भारत में स्वास्थ्य भूटान और श्रीलंका मालदीव 13.7 प्रतिशत और नेपाल 5.8 प्रतिशत शोध एजेंसी 'लैंसेट' संख्या 8 प्रतिशत
समाज बाड़मेर जिले के गांवों में पानी का संकट, पानी व्यापार तेजी पर May 31, 2018 by दिलीप बीदावत | Leave a Comment दिलीप बीदावत इन दिनों पैट्रोल डीजल की कीमतों में पिछले चार सालों से लगातार हो रही वृद्धि से मध्यम वर्ग की जेबों पर पड़ने वाले भार को लेकर हर स्तर पर हायतौबा मची हुई है, वहीं बाड़मेर जिले में पीने के पानी को लेकर हर साल आने वाले संकट की कानो-कान खबर व चर्चा नहीं […] Read more » Featured गर्मी गांवों में पानी का संकट जलदाय विभाग टेंकर पानी व्यापार तेजी पर पेयजल संकट बाड़मेर जिले मरूस्थल मौसम
राजनीति समाज पत्थलगड़ी बिगाड़ सकती है भाजपा का सियासी समीकरण May 31, 2018 by हरिराम चौरसिया | Leave a Comment हरिराम चौरसिया छत्तीसगढ़ में आसन्न विधानसभा चुनाव के ठीक पहले झारखंड प्रदेश की सीमा से लगे जशपुर जिले में औचक रूप में सामने आई आदिवासियों की पत्थलगड़ी आंदोलन ने सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है. जशपुर से शुरू हुई इस मुहिम की आंच सरगुजा व कोरबा के रास्ते से होते हुए […] Read more » Featured आदिवासी गांवों छत्तीसगढ़ के कोरबा पत्थलगड़ी बिगाड़ पत्थलगड़ी मुहिम प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल बिलासपुर भाजपा रायगढ़ समीकरण
विश्ववार्ता समाज आयरलैंडःचर्च के अंधविष्वास से जुड़ा बदलेगा गर्भपात का कानून May 31, 2018 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव आयरलैंड के भारतीय मूल के प्रधानमंत्री लियो वरडकर ने गर्भपात पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए जो जनमत संग्रह कराया था, उसका जनादेश कानून को रद्द करने के पक्ष में आ गया हैं। इस ऐतिहासिक बदलाव के पक्ष में 66.36 फीसदी लोग सहमत हैं। इसके पहले एग्जिट पोल में भी यही परिणाम […] Read more » Featured अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार अमेरिका और भारत अल्ट्रासाउंड आयरलैंड कनाडा गर्भपात चिकित्सा-जांच प्रणाली ब्रिटेन
समाज तम्बाकू मुक्ति से ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण संभव May 30, 2018 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग विश्व की गम्भीर समस्याओं में प्रमुख है तम्बाकू और उससे जुड़े नशीले पदार्थों का उत्पादन, तस्करी और सेवन में निरन्तर वृद्धि होना। नई पीढ़ी इस जाल में बुरी तरह कैद हो चुकी है। आज हर तीसरा व्यक्ति किसी-न-किसी रूप में तम्बाकू का आदी हो चुका है। बीड़ी-सिगरेट के अलावा तम्बाकू के छोटे-छोटे पाउचों […] Read more » 60 लाख लोग मारे Featured डब्ल्यूएचओ तम्बाकू मुक्ति से ही स्वस्थ धूम्रपान नवयुवक राष्ट्र का निर्माण संभव
चिंतन समाज देश बदलना है तो देना होगा युवओ को सम्मान May 30, 2018 by डॉ नीलम महेन्द्रा | 2 Comments on देश बदलना है तो देना होगा युवओ को सम्मान डॉ नीलम महेंद्र भारत एक युवा देश है। इतना ही नहीं , बल्कि युवाओं के मामले में हम विश्व में सबसे समृद्ध देश हैं। यानि दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा युवा हमारे देश में हैं। भारत सरकार की यूथ इन इंडिया,2017 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 1971 से 2011 के बीच युवाओं […] Read more » Featured किताबों देश बदलना है तो देना होगा देश बदलेगा भविष्य भ्रष्टाचार युवओ को सम्मान युवाओं
राजनीति समाज परम्परागत खेलों को मिले प्रोत्साहन May 29, 2018 by देवेंद्रराज सुथार | Leave a Comment देवेंद्रराज सुथार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ”मन की बात” के 44वें संस्करण में परम्परागत खेलों को प्रोत्साहन देने की बात कही है। हमारे देश में बरसों से खेलें जाने वाले पारंपरिक खेलों की कम होती लोकप्रियता और आधुनिक युग के बच्चों का मोबाइल व कंप्यूटर के खेलों के प्रति बढ़ते रूझान को देखते हुए प्रधानमंत्री […] Read more » Featured कबड्डी को मिले प्रोत्साहन खो-खो डिब्बा स्पाइस परम्परागत खेलों ब्लू व्हेल लगंड़ी लुका छिपी सतोलिया
समाज डॉ॰ भीमराव आंबेडकर और उनकी धर्म विषयक अवधारणा May 29, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment विवेकानंद तिवारी डॉ॰ भीमराव आंबेडकर को हम संविधान निर्माता के रूप में जानते हैं,हालांकि विधि विशेषज्ञ होने के साथ-साथ डॉ॰ भीमराव आंबेडकर एक प्रख्यात अर्थशास्त्री ,शिक्षा शास्त्री और सबसे बढ़कर मानवतावाद की पोषक थे. भारतीय समाज व्यवस्था में सामाजिक न्याय के योद्धा के रूप में भीमराव अंबेडकर का योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण है. डॉ॰ भीमराव आंबेडकर का एक […] Read more » Featured उनकी धर्म विषयक अवधारणा जमीदारों डॉ॰ भीमराव आंबेडकर पंडा- पुरोहितों बुद्धत्व और साम्यवाद बौद्ध सामाजिक साम्यवाद साहूकारों
राजनीति समाज उत्तराखंड के जलते जंगल May 29, 2018 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव मनुष्य का जन्म प्रकृति में हुआ और उसका विकास भी प्रकृति के सानिध्य में हुआ। इसीलिए प्रकृति और मनुष्य के बीच हजारों साल से सह-अस्तित्व की भूमिका बनी चली आई। गोया,मनुष्य ने सभ्यता के विकासक्रम में मनुष्येतर प्राणियों और पेड़-पौधों के महत्व को समझा तो कई जीवों और पेड़ों को देव-तुल्य मानकर उनके […] Read more » Featured अखरोट और काफल उत्तराखंड जंगली जीव जन्म प्रकृति देवदार पत्तियां पतझड़ पीपल पेड़़ पौधों बर्फीली पहाड़ियों मनुष्य