समाज रक्षक बने भक्षक September 22, 2017 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment आज समाचार पत्रों में मुख्य समाचार है कि लखनऊ के प्राइवेट मेडिकल कालेज में दाखिले से संबन्धित मामलों को रफ़ादफ़ा करने की साज़िश में हाई कोर्ट के पूर्व जज समेत छः लोग गिरफ़्तार। यह डील एक करोड़ की थी। हाई कोर्ट के पूर्व जज हैं — उड़ीसा हाई कोर्ट के पूर्व जज इसरत मसरूर कुद्दुसी। […] Read more » Featured उड़ीसा हाई कोर्ट के पूर्व जज इसरत मसरूर कुद्दुसी नाभा जेल ब्रेक कांड मुख्य आरोपी गोपी घनश्यामपुरिया लखनऊ के प्राइवेट मेडिकल कालेज
समाज हे देवि! अब मृजया रक्ष्यते को लेकर हमारी शर्मिंदगी भी स्वीकार करें September 22, 2017 by अलकनंदा सिंह | 1 Comment on हे देवि! अब मृजया रक्ष्यते को लेकर हमारी शर्मिंदगी भी स्वीकार करें अतिवाद कोई भी हो, वह सदैव संबंधित विषय की उत्सुकता को नष्ट कर देता है। अति की घृणा, प्रमाद, सुंदरता, वैमनस्य, भोजन, भूख, जिस तरह जीवन को प्रभावित करती हैं और स्वाभाविक प्रेम, त्याग, कर्तव्य को खा जाती हैं उसी प्रकार आजकल ”अति धार्मिकता” अपने कुछ ऐसे ही दुष्प्रभावों को हमारे सामने ला रही है। […] Read more » Featured देवी की मृजया रक्ष्यते की सीख शारदीय नवरात्र की स्थापना स्वच्छता
समाज ये क्या कह रहा है अमेरिकी विदेश मंत्रालय September 22, 2017 by शैलेन्द्र सिंह | Leave a Comment शैलेंद्र सिंह भारत में 90 के दशक में शुरू हुए आर्थिक उदारवाद और भूमंडलीकरण के प्रभाव में एक नव्य राजनीतिक धारा का अद्भुत अभिभूतीकरण हुआ. जीडीपी को चमकाने की हड़बड़ी में उदारवाद की खुशफहमियां, अंततः अपने ही लोगों पर अलग अलग ढंग से टूटीं, बेरोजगारी, गरीबी, बेदखली, पलायन, अपराध, अशांति और हिंसा के रूप में. […] Read more » Featured अमेरिकी विदेश मंत्रालय आर्थिक उदारवाद केरल भूमंडलीकरण राजनीतिक हत्याएं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो लव-जेहाद की बर्बरता
समाज क्यों ना हम पहले अपने अन्दर के रावण को मारें September 22, 2017 by डॉ नीलम महेन्द्रा | Leave a Comment “रावण को हराने के लिए पहले खुद राम बनना पड़ता है ।“ विजयादशमी यानी अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि जो कि विजय का प्रतीक है। वो विजय जो श्रीराम ने पाई थी रावण पर, वो रावण जो पर्याय है बुराई का, अधर्म का ,अहम् का, अहंकार का और पाप का, वो जीत […] Read more » Featured रावण
समाज राष्ट्रीय चुनौतियों के मूल में बौद्धिक कारण September 20, 2017 by मनोज ज्वाला | Leave a Comment साहित्य से ही निवारण मनोज ज्वाला आज अपने देश में जितनी भी तरह की समस्यायें और चुनैतियां विद्यमान हैं, उन सबका मूल कारण वस्तुतः बौद्धिक संभ्रम है , जो या तो अज्ञानतावश कायम है या अंग्रेजी मैकाले शिक्षा-पद्धति से निर्मित औपनिवेशिक सोच का परिणाम है अथवा वैश्विक महाशक्तियों के भारत-विरोधी साम्राज्यवादी षड्यंत्र का अंजाम । […] Read more » Featured धर्मनिरपेक्षता पुरातन संस्कृति बौद्धिक कारण राष्ट्रीय अस्मिता साम्प्रदायिकता
समाज रोहिंग्याई मुसलमान : खतरों को आमंत्रण September 20, 2017 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment रोहिंग्या मुसलमान के बारे में अब यह स्पष्ट हो रहा है कि आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इन्होंने म्यांमार में अशांति फैलाने का काम किया है। इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त रहकर काम करने वाले रोहिंग्याई मुसलमान के पक्ष में भारत में वातावरण बनाना निश्चित रुप से एक भीषण खतरे का संकेत है। […] Read more » Featured Rohungya Muslims threat to nation Rohingyas खतरों को आमंत्रण रोहिंग्या मुसलमान रोहिंग्याई मुसलमान
समाज मध्यप्रदेश- बच्चों के साथ त्रासदियों का पुराना सिलसिला September 19, 2017 by जावेद अनीस | Leave a Comment जावेद अनीस दुर्भाग्य से गोरखपुर की घटना कोई इकलौती घटना नहीं है इससे पहले भी देश के अनेक हिस्सों में इस तरह की घटनायें होती रही हैं . पूर्व में हुई घटनाओं से हम सीख हासिल सकते थे लेकिन हमने कभी भी ऐसा नहीं किया है. हमने तो जवाबदेही को एक दुसरे पर थोपने और […] Read more » Featured इंदौर इंदौर के शासकीय महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय एमवाय हॉस्पिटल गोरखपुर भोपाल
समाज शक्ति की उपासना और कन्याओं पर बढ़ते जुल्म September 19, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग – शताब्दियों से हम साल में दो बार नवरात्र महोत्सव मनाते हुए कन्याओं को पूजते हैं। पूरे नौ दिन शक्ति की उपासना होती है। दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना करके लोग उनसे अपने घर पधारने का अनुरोध करते हैं। लेकिन विडम्बना देखिये कि सदियों की पूजा के बाद भी हमने कन्याओं को […] Read more » Featured आरुषि मर्डर मिस्ट्री कन्याओं पर बढ़ते जुल्म जेसिका लाल हत्याकांड नितीश कटारा हत्याकांड निर्भया कांड प्रियदर्शनी मट्टू बलात्कार व हत्याकांड रुचिका मेहरोत्रा आत्महत्या कांड शक्ति की उपासना
समाज क्यों जिन्दगी का सच नहीं ढूंढ़ पाये? September 17, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग जिन्दगी के सवालों से घिरा वक्त जीवन के सच को ढूंढ़ने की कोशिश कर रहा है। यह कोशिश अतीत से वर्तमान तक होती रही है। अनेक महापुरुषों ने इसके लिये अपना जीवन होम कर दिया। इसी जीवन के सच की सांसों की बांसुरी में सिमटे हैं कितने ही अनजाने-अनसुने सुर जो बुला रहे […] Read more » Featured जिन्दगी का सच
शख्सियत समाज ऋषि दयानन्द ने अपने विद्या गुरू स्वामी विरजानन्द सरस्वती की शिक्षा एवं प्रेरणा से देश में धार्मिक एवं सामाजिक क्रान्ति की September 15, 2017 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment आज स्वामी विरजानन्द सरस्वती जी की पुण्य तिथि पर मनमोहन कुमार आर्य आज ऋषि दयानन्द के विद्या गुरु प्रज्ञाचक्षु दण्डी स्वामी विरजानन्द सरस्वती जी की पुण्य तिथि है। 14 सितम्बर, सन् 1868 (सोमवार) को मथुरा में उनका देहान्त हुआ था। उस दिन हिन्दी तिथि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी थी। विक्रमी संवत् 1925 […] Read more » स्वामी विरजानन्द सरस्वती जी की पुण्य तिथि
समाज विश्वगुरू के रूप में भारत-26 September 15, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य यदि अस्पृश्यता आदि विकृतियां भारत की संस्कृति होतीं तो अलग-अलग कालखण्डों में आये अनेकों समाज सुधारकों को उनके विरूद्घ आवाज उठाने की ही आवश्यकता नहीं पड़ती, और ना ही उनके सत्कार्यों का इतिहास वन्दन करता। राष्ट्र सर्वप्रथम भारत में विद्यार्थियों के भीतर राष्ट्र सेवा का भाव जागृत करने के लिए राजा और […] Read more » India India as world leader भारत विश्वगुरू विश्वगुरू के रूप में भारत विश्वगुरू भारत
आर्थिकी समाज अर्थ एवं विकास के असन्तुलन से उपजी समस्याएं September 12, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग- पैसे के बढ़ते प्रवाह में दो तरह की स्थितियां देखने को मिल रही है। एक स्थिति में अर्थ के सर्वोच्च शिखरों पर पहुंचे कुछ लोगों ने जनसेवा एवं जन-कल्याण के लिये अपनी तिजोरियां खोल रहे हैं तो दूसरी स्थिति में जरूरत से ज्यादा अर्जित धन का बेहूदा एवं भोंडा प्रदर्शन कर रहे हैं। […] Read more » Featured New India असन्तुलन आतंकवाद आर्थिक अपराध आर्थिक तंगी जन-कल्याण जनसेवा नक्सलवाद नया इंडिया भ्रष्टाचार माओवाद