शख्सियत समाज डा. अम्बेदकर को पूर्व जन्म के महान् संस्कारों ने उच्च स्थान प्राप्त कराया April 18, 2017 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on डा. अम्बेदकर को पूर्व जन्म के महान् संस्कारों ने उच्च स्थान प्राप्त कराया मनमोहन कुमार आर्य डा. अम्बेदकर जी के जन्म दिवस 14 अप्रैल को 4 दिन व्यतीत हो चुके हैं। उस दिन हम उन पर कुछ लिखना चाहते थे परन्तु लिख नहीं सके। हमारा मानना है कि किसी महापुरुष के जीवन पर चिन्तन करना केवल जन्म दिन व पुण्य तिथि पर ही उचित नहीं होता अपितु […] Read more » डा. अम्बेदकर
समाज हमारे मुसलमान भी क्या मुसलमान हैं? April 18, 2017 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment तीन तलाक, निकाह हलाला, बहुपत्नीवाद, पशु-बलि, बुर्का, मांसाहार, ताबीज, आदि ये सब बातें किसी भी धर्म के शाश्वत और सार्वदेशिक लक्षण नहीं हो सकते। इन्हें देश-काल के मुताबिक बदलते रहना चाहिए। यही बात शरिया, रोमन और ग्रीक लॉ पर भी लागू होती है। आज स्त्री-पुरुष समानता का युग है। इसमें यदि आदमी तीन बार बोलकर औरत को तलाक दे सकता है तो औरत भी तीन बार बोलकर आदमी को Read more » ताबीज तीन तलाक निकाह हलाला पशु बलि बहुपत्नीवाद बुर्का मांसाहार मुसलमान हमारे मुसलमान
महिला-जगत समाज नारी मुक्ति की यन्त्रणा April 17, 2017 by गंगानन्द झा | Leave a Comment औद्योगिक समाज में पुरुष और नारी के बीच का समीकरण बदला। औरत और मर्द के बीच समानता की अवधारणा उभड़ी। लिंग आधारित श्रम-विभाजन की अवधारणा पर सवाल उठने लगे। और नारी पुरुष का सम्पर्क पूरक होने के बजाय योगात्मक होने लग गया। स्त्रियों का कर्मक्षेत्र घर की चाहरदीवारी से बाहर भी प्रतिष्ठित हुआ और पारस्परिक निर्भरशीलता की बाध्यता में कमी आई। औरतों के हाथ में आर्थिक क्षमता आने के साथ परम्परा से सम्मानित पितृसत्ता में दरारें पड़ने लगीं। Read more » Featured नारी मुक्ति
समाज स्वास्थ्य-योग जानलेवा फ्लोराइड और उसके चिकित्सीय उपाय April 17, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी फ्लोराइड क्या है:-कई देशों जैसे सं. रा. अमेरिका आदि में पीने के पानी के फ्लोरिडेशन की नीति इतने लंबे समय से प्रभावी है कि अधिकांश लोग इसपर ध्यान ही नहीं देते. लेकिन अब बहुत से वैज्ञानिक और जनस्वास्थ्य अधिकारी यह प्रश्न उठा रहे हैं कि राष्ट्रव्यापी फ्लोरिडेशन का क्या औचित्य है और […] Read more » fatal floride Featured Floride जानलेवा फ्लोराइड फ्लोराइड फ्लोराइड चिकित्सीय उपाय
समाज घर-घर शौचालय पर बहस ज़रूरी April 17, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment समझने की बात है कि एकल होते परिवारों के कारण मवेशियों की घटती संख्या और परिणामस्वरूप घटते गोबर की मात्रा के कारण जैविक खेती पहले ही कठिन हो गई है। कचरे से कंपोस्ट का चलन अभी घर-घर अपनाया नहीं जा सका है। अतः गांधी जयंती पर स्वच्छता, सेहत, पर्यावरण, गो, गंगा और ग्राम रक्षा से लेकर आर्थिकी की रक्षा के चाहने वालों को पहला संदेश यही है कि गांवों में 'घर-घर शौचालय' की बजाय, 'घर-घर पानी निकासी गड्ढा' और 'घर-घर कंपोस्ट' के लक्ष्य पर काम करें। Read more » घर-घर शौचालय स्वच्छाग्रह स्वच्छाग्रह का सच
समाज हिंसक होती महानगरीय संस्कृति की त्रासदी April 15, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment दिल्ली में बढ़ती हिंसा की घटनाओं को लेकर व्यक्ति और समाज को लेकर कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। इसका एक बड़ा कारण है संयुक्त परिवारों का बिखरना। इसके कारण महानगरों में न्यूक्लियर फेमिली यानी एकल परिवार की अवधारणा को बल मिलता चला गया है। मैं, मेरी पत्नी और मेरे बच्चे तक सिमटी नई सामाजिक और शहरी अवधारणा ने परिवार के बाकी बचे लोगों को एक-दूसरे अलग-थलग कर दिया है। Read more » महानगरीय संस्कृति
समाज अमरिका में प्रवासी भारतीय सद्भाव कैसे बढाएँ ? April 14, 2017 by डॉ. मधुसूदन | 3 Comments on अमरिका में प्रवासी भारतीय सद्भाव कैसे बढाएँ ? आपको बडा योगदान करने की आवश्यकता नहीं है।जहाँ आप रहते हैं, उस आस पडोस के परिवारों को किसी न किसी रूपमें सहायता करने का काम होना चाहिए। यदि, हमारे विषय में भ्रांत धारणा है, कि, हमारे कारण देश में समस्याएँ हैं, तो उसका निर्मूलन यथा संभव हो जाना चाहिए, तो जो छुट पुट हत्त्याओं की घटनाएँ हो रही है; उनकी मात्रा में कमी की संभावना बढ जाएगी। कुछ अज्ञानियों की ईर्ष्या भी ऐसी घटनाओं के पीछे काम करती है।ध्यान अवश्य रहे; बिल्कुल भूले नहीं।अपने हक की लडाई शत्रुता जगाती है। संघर्ष समाधान नहीं है। समन्वयता, सहकार, भाईचारा, ॥कृण्वन्तोऽविश्वमार्यम्॥ Read more » Featured live with communal harmony abroad अमरिका प्रवासी भारतीय सद्भाव
समाज देश का शराब मुक्त होना ज़रूरी April 14, 2017 by निर्मल रानी | Leave a Comment देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बिहार इस समय शराबबंदी को लेकर पूरे देश के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत करने की स्थिति में पहुंच चुका है। गत् वर्ष 21 जनवरी को नितीश सरकार ने शराबबंदी के समर्थन में लगभग 12 हज़ार किलोमीटर की विश्व कीर्तिमान स्थापित करने वाली एक अद्भुत मानव श्रृंखला बनाई। इस मानव श्रृंखला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लंबाई नहीं बल्कि शराब के विरोध में एक-दूसरे का हाथ थामे हर आयु-वर्ग के सभी धर्मों व जातियों के तथा सभी प्रकार की आर्थिक हैसियत रखने वाले वह लोग शामिल थे जो वास्तव में भारतीय समाज का दर्पण कहे जाते हैं। Read more » शराब बंदी
शख्सियत समाज समाज को नई दिशा देने वाले डॉ. आम्बेडकर April 13, 2017 by मनोज कुमार | Leave a Comment 14 अप्रेल 1891 जन्में डॉ. अम्बेडकर ने अपने कार्यों से भारत का इतिहास लिख दिया. यह वह समय था छुआ-छूत का मसला शीर्ष पर था और ऐसे में बाबा साहेब जैसे लोगों को आगे बढऩा बेहद कठिन था लेकिन कभी ‘कभी हार नहीं मानूगां’ के संकल्प के साथ उन्होंने सारे कंटक भरे रास्ते को सुगम बना लिया. कहते हैं, जहाँ चाह है वहाँ राह है। प्रगतिशील विचारक एवं पूर्णरूप से मानवतावादी बङौदा के महाराज सयाजी गायकवाङ़ ने भीमराव जी को उच्च शिक्षा हेतु तीन साल तक छात्रवृत्ति प्रदान की, किन्तु उनकी शर्त थी की अमेरिका से वापस आने पर दस वर्ष तक बङौदा राज्य की सेवा करनी होगी। भीमराव ने कोलम्बिया विश्वविद्यालय से पहले एम. ए. तथा बाद में पी.एच.डी. की डिग्री प्राप्त की। Read more » Dr. Ambedkar डॉ. आम्बेडकर समाज को नई दिशा देने वाले डॉ. आम्बेडकर
शख्सियत समाज भारत में सामाजिक क्रांति के संवाहक :- डा. अंबेडकर April 13, 2017 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment 1941 से 1945 के बीच उन्होंने अत्यधिक संख्या में विवादास्पद पुस्तकें लिखीं और पर्चे प्रकाशित किये। जिसमें थाट आफ पाकिस्तान भी शामिल है। यह डा. अम्बेडकर ही थे जिन्होनें मुस्लिम लीग द्वारा की जा रही अलग पाकिस्तान की मांग की कड़ी आलोचना व विरोध किया। उन्होनें मुस्लिम महिला समाज में व्याप्त दमनकारी पर्दा प्रथा की भी निंदा की। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वे रक्षा सलाहकार समिति और वाइसराय की कार्यकारी परिषद के लिए श्रममंत्री के रूप में भी कार्यरत रहे। भीमराव को विधिमंत्री भी बनाया गया। Read more » अंबेडकर डा. अंबेडकर भारत भारत में सामाजिक क्रांति के संवाहक सामाजिक क्रांति के संवाहक
शख्सियत समाज आज़ाद भारत के वैचारिक समन्वयक बाबा साहब April 13, 2017 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment बाबा साहब भारत के टुकड़े होने पर सहमत भी नहीं थे, दरअसल, अंबेडकर का भारत को देखने का बिल्कुल ही अलग नजरिया था। वे पूरे राष्ट्र को अखंड देखना चाहते थे, इसलिए वे भारत के टुकड़े करने वालों की नीतियों के आलोचक रहे। भारत को दो टुकड़ों में बांटने की ब्रिटिश हुकूमत की साजिश और अंग्रेजों की हाँ में हाँ मिला रहे इन तीनों ही भारतीय नेताओं से वे इतने नाराज थे कि उन्होंने बाकायदा पाकिस्तान के विभाजन को लेकर एक पुस्तक ‘थॉट्स ऑन पाकिस्तान’ लिखी थी जो बहुत ही चर्चा में आई। Read more » Featured बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जयंती
समाज तीन तलाक आखिर क्या है April 13, 2017 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment अब चौथी बार उनकी आपस में निकाह करने की कोई गुंजाइश नहीं, लेकिन सिर्फ ऐसे कि अपनी आज़ाद मर्ज़ी से वो औरत किसी दूसरे मर्द से शादी करे और इत्तिफाक़ से उनका भी निभा ना हो सके और वो दूसरा शौहर भी उसे तलाक दे दे या मर जाए तो ही वो औरत पहले मर्द से निकाह कर सकती है, इसी को कानून में ”हलाला” कहते हैं। लेकिन याद रहे यह इत्तिफ़ाक से हो तो जायज़ है, जान बूझकर या प्लान बना कर किसी और मर्द से शादी करना और फिर उससे सिर्फ इसलिए तलाक लेना ताकि पहले शौहर से निकाह जायज़ हो सके यह साजिश सरासर नाजायज़ है और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने ऐसी साजिश करने वालों पर लानत फरमाई है। Read more » Featured triple talak in muslims triple talaq what is triple talaq? तीन तलाक आखिर क्या है पवित्र कुरान में तलाक के असल मायने रुजू हलाला