समाज दलित राजनीति में मनुवाद का सर्वाधिक दुरपयोग November 25, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment मनुवाद व ब्राह्मणवाद दो स्वार्थ-परक शब्द पिछले 100 साल में भारत की राजनीति में बहुत आये। दूसरे शब्द हैं जैसे की 'अल्पसंख्यक", 'बहुसंख्यक", "साम्प्रदायिकता", 'दलित", "महा-दलित", "हरिजन", "सर्वहारा-वर्ग",और भी कुछ शब्द हैं जिनको सभी राजनीतिक दल अपने- अपने फायदे के अनुसार परिभाषित करते हैं। समय आने पर खुद अपने ही दिये "परिभाषा" से मुकर जाते हैं। Read more » Featured ब्राह्मणवाद मनुवाद
समाज दहेज प्रथा – एक सामाजिक अभिशाप November 25, 2016 by ललित गर्ग | 4 Comments on दहेज प्रथा – एक सामाजिक अभिशाप भारतीय समाज में अनेक प्रथाएं प्रचलित हें । पहले इस प्रथा के प्रचलन में भेंट स्वरूप बेटी को उसके विवाह पर उपहारस्वरूप कुछ दिया जाता था परन्तु आज दहेज प्रथा एक बुराई का रूप धारण करती जा रही है । दहेज के अभाव में योग्य कन्याएं अयोग्य वरों को सौंप दी जाती हैं । लोग […] Read more » dowry dowry system एक सामाजिक अभिशाप दहेज प्रथा
समाज बेडरूम में भूलकर भी नहीं लगाएं झरने, तालाब की तस्वीर.. November 24, 2016 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment एक ही गद्दा हो---फेंगशुई के अनुसार पति-पत्नी के बेड पर एक ही गद्दा होना चाहिए। मसलन अगर डबल बेड है तो भी गद्दा एक ही फुल साइज होना चाहिए। दो गद्दों का प्रयोग वैवाहिक जोड़े के भविष्य के लिए हानिकारक माना जाता है। अलगाव नहीं संबंधों को दें जगह। Read more » बेडरूम
समाज निरीह जीवों की निर्मम हत्या से बना भोजन क्यों? November 23, 2016 by ललित गर्ग | Leave a Comment निया के किसी भी धर्म में मांसाहार का उपदेश नहीं दिया गया है। महर्षि दयानन्द सरस्वती ने कहा है कि मांसाहार से मनुष्य का स्वभाव हिंसक हो जाता है, जो लोग मांस भक्षण या मदिरापान करते हैं, उनके शरीर तथा वीर्यादि धातु भी दूषित हो जाते हैं। बौद्ध धर्म में पंचशील अर्थात सदाचार के पाँच नियमों में प्रथम और प्रमुख नियम किसी प्राणी को दुःख न देना है। बौद्ध धर्म के मतानुसार बुद्धिमान व्यक्ति को आपातकाल में भी मांस खाना उचित नहीं है। Read more » Featured पाश्चात्य देशों में शाकाहार आन्दोलन मांस भक्षण मांसाहार विश्व मांसाहार निषेध दिवस
समाज जानिए किन वास्तु दोषों के कारण लोग करते हैं आत्महत्या— November 20, 2016 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment आए दिन अखबार के किसी कोने में देखने को मिल जाता हैं की कभी किसी ने परीक्षा मे फेल होने पर फांसी लगाई तो किसी ने प्यार में नाकाम होने पर किसी ने खुद को आग के हवाले कर दिया।बदलती जीवनशैली के कारण आज युवाओं के भीतर सहनशक्ति में भी अत्याधिक कमी देखी जा रही […] Read more » आत्महत्या किन वास्तु दोषों के कारण लोग करते हैं आत्महत्या
शख्सियत समाज नेहरु और पटेल का संगम थीं इंदिराजी November 20, 2016 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | 2 Comments on नेहरु और पटेल का संगम थीं इंदिराजी डॉ. वेदप्रताप वैदिक श्रीमती इंदिरा गांधी का शताब्दि-वर्ष आज शुरु हो रहा है। केंद्र में कांग्रेस की सरकार नहीं है और बड़े नोटों की भगदड़ मची हुई है। ऐसे बदहवासी के माहौल में इस अवसर पर इंदिराजी को पता नहीं कितना याद किया जाएगा लेकिन इसमें शक नहीं है कि वे बेजोड़ प्रधानमंत्री रही हैं, […] Read more » Featured Indira Gandhi इंदिराजी नेहरु और पटेल का संगम
समाज सामूहिक विवाह सम्मलेन के फायदे(लाभ) और नुकसान — November 18, 2016 by पंडित दयानंद शास्त्री | 1 Comment on सामूहिक विवाह सम्मलेन के फायदे(लाभ) और नुकसान — सामूहिक विवाह के आयोजन से केवल स्वयं का धन ही नहीं बचता, देश की संपदा, के साथ व्यर्थ श्रम ओर बहुत सारी परेशानियों से भी छुटकारा मिल जाता हे। यह सब श्रम पूरा समाज मिलकर कर लेता हे। Read more » benefits of mass marriage Featured mass marriage सामूहिक विवाह सामूहिक विवाह सम्मलेन के फायदे
शख्सियत समाज अमर शहीद लाला लाजपत राय जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलिं November 18, 2016 / November 18, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment भारत का पंजाब नैशनल बैंक और लक्ष्मी इंश्योरेंस कम्पनी के संस्थापक भी लाला लाजपत राय जी ही हैं। आपने अपनी माता जी की स्मृति में एक अस्पताल भी स्थापित किया था जो विभाजन होने के कारण पाकिस्तान में चला गया। लाला जी में क्रान्ति के विचार उत्पन्न करने का श्रेय लाला साईंदास, ऋषि दयानन्द के सत्यार्थप्रकाश और आर्याभिविनय आदि ग्रन्थों को मुख्य है। वह आर्यसमाज को अपनी माता और ऋषि दयानन्द जी को अपना पिता मानते थे। Read more » Featured अमर शहीद लाला लाजपत राय जी बलिदान दिवस श्रद्धांजलि
समाज वर्ण पर आधारित जन्मना जाति व्यवस्था या मरण व्यवस्था November 18, 2016 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य महाभारत काल तक वेदों का प्रचार प्रसार रहा और देश व भूमण्डल पर यत्र-तत्र ऋषियों के होने की सम्भावना भी प्रतीत होती है। महाभारत काल के बाद वैदिक धर्म व संस्कृति का सूर्य का प्रकाश कुछ कम हो गया जिसके परिणामस्वरुप, एक ओर जहां देश में अविद्या व अन्धविश्वासों का प्रसार हुआ […] Read more » जाति व्यवस्था मरण व्यवस्था वर्ण पर आधारित जन्मना वर्ण पर आधारित जन्मना जाति व्यवस्था वर्ण पर आधारित जन्मना मरण व्यवस्था
समाज ताकि जीवन का हर क्षण निर्माण का सन्देश बन जाये November 18, 2016 by ललित गर्ग | Leave a Comment एक नये समाज एवं राष्ट्र का निर्माण करने के लिये नये मनुष्यों की जरूरत है। ऐसे मनुष्यों का जीवन वह दुर्लभ क्षण है, जिसमें हम जो चाहें पा सकते हैं। जो चाहें कर सकते हैं। यह वह अवस्था है, जहां से हम अपने जीवन को सही समझ दे सकते हैं। इसके लिये जरूरी है हम श्रेष्ठताओं से जुड़े, अपने उद्देश्य के प्रति जागरूक रहे। अपनी विकास यात्रा में कभी किसी गलती को प्रश्रय न दें। Read more » Featured जीवन का हर क्षण निर्माण का सन्देश
बच्चों का पन्ना समाज एक चुनौती:-बच्चों को ‘ना’ कैसे कहें November 13, 2016 / November 13, 2016 by विकास मित्तल | Leave a Comment बच्चा आपके बराबर नहीं है। इसलिए यह ज़रूरी नहीं कि माँ बाप ने जिस बात के लिए ‘ना’ कहा है, उस बारे में बच्चे से बहस करें, मानो उनको यह साबित करना है कि उनका ‘ना’ कहना सही है। यह सही है कि जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसे “अपनी सोचने-समझने की शक्ति का प्रयोग करके सही-गलत में फर्क करना आना चाहिए।माँ बाप बच्चे के साथ तर्क तो करे मगर उससे लंबी-चौड़ी बहस मत कीजिए कि आपने उसको ‘ना’ क्यों कहा। Read more » Featured बच्चों को ‘ना’ कैसे कहें
जन-जागरण बच्चों का पन्ना समाज बिना बाल शिक्षा के देश के उज्जवल भविष्य की कल्पना करना निरर्थक November 13, 2016 / November 14, 2016 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment वर्तमान में भारत देश में कई जगहों पर आर्थिक तंगी के कारण माँ-बाप ही थोड़े पैसों के लिए अपने बच्चों को ऐसे ठेकेदारों के हाथ बेच देते हैं, जो अपनी सुविधानुसारउनको होटलों, कोठियों तथा अन्य कारखानों आदि में काम पर लगा देते हैं। और उन्हीं होटलों, कोठियों और कारखानों के मालिक बच्चों को थोड़ा बहुत खाना देकरमनमाना काम कराते हैं। और घंटों बच्चों की क्षमता के विपरीत या उससे भी अधिक काम कराना, भर पेट भोजन न देना और मन के अनुसार कार्य न होने पर पिटाईयही बाल मजदूरों का जीवन बन जाता है। Read more » Children day Featured बाल दिवस