समाज सामाजिक भेदभाव बढ़ा रहे हैं पर्सनल कानून January 24, 2017 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment सुरेश हिंदुस्थानी भारत में सम्प्रदाय के बने लिए निजी कानूनों को लेकर हमेशा बहस होती रही है। इस बहस में हमारे देश के राजनीतिक दल भी शामिल हो जाते हैं। प्राय: कहा जाता है कि भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है, लेकिन यह धर्मनिरपेक्षता कहीं भी दिखाई नहीं देती। सरकार ने कुछ किया तो दूसरा […] Read more » Featured तीन तलाक की प्रथा पर्सनल कानून भारत में मुस्लिम पर्सनल क़ानून महिलाओं को समानता मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुसलिम समुदाय सामाजिक भेदभाव
समाज कश्मीरी विस्थापित हिंदुओं का पुनर्वास मुश्किल January 24, 2017 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on कश्मीरी विस्थापित हिंदुओं का पुनर्वास मुश्किल प्रमोद भार्गव कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन के 27 साल बाद उनकी वापसी के लिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जो प्रस्ताव पारित किया गया है, वह स्वागत योग्य है, लेकिन यहां सवाल उठता है कि क्या इस प्रस्ताव के अनुकूल ऐसा माहौल बनाया जाएगा, जिससे विस्थापितों की वापसी संभव हो सके ? क्योंकि इस प्रस्ताव […] Read more » Featured कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन कश्मीरी विस्थापित हिंदुओं का पुनर्वास कश्मीरी हिंदु कश्मीरी हिंदुओं का पुनर्वास
समाज पुरूषों को भी “स्त्री मुक्ति” का गीत गाना होगा January 23, 2017 by जावेद अनीस | Leave a Comment जावेद अनीस तकनीकी रूप से बेंगलुरु को भारत सबसे आधुनिक शहर मना जाता है लेकिन बीते साल की आखिरी रात में भारत की “सिलिकॉन वैली” कहे जाने वाले इस शहर ने खुद को शर्मशार किया है. रोशनी से चमचमाते और नए साल के जश्न में डूबे इस शहर की गलियाँ उस रात लड़िकयों के लिए […] Read more » Featured respect women stop rape stop sexual harrassment राष्ट्रीय बालिका दिवस स्त्री मुक्ति
समाज वीआईपी बनने की चाह में January 21, 2017 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी हमारे देश के संविधान निर्माताओं द्वारा कुछ ऐसी व्यवस्था की गई है कि यहां विधायक,सांसद, मंत्री,मुख्यमंत्री,प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति जैसे किसी भी पद के लिए किसी निर्धारित डिग्री या डिप्लोमा का होना कोई ज़रूरी नहीं है। इन पदों पर पहुंचने वाला व्यक्ति जनप्रतिनिधि है अर्थात् जनता ने उसे निर्वाचित कर देश की विधायिका का […] Read more » वीआईपी
समाज अव्यवस्थित आंगनबाड़ी व्यवस्था January 17, 2017 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment आंगनबाड़ी में आने वाले कुछ बच्चों से बात हुई जिनके अनुसार “यहां पर बैठने की जगह अच्छी नही है। और रोज-रोज खिचड़ी या दाल चावल ही मिलता है। 26 जनवरी, 15 अगस्त के समय जलेबी, हलवा मिलता है"। Read more » अव्यवस्थित आंगनबाड़ी व्यवस्था आंगनबाड़ी व्यवस्था
जन-जागरण समाज भारत के विरूद्ध सक्रिय संगठनों का वैश्विक तंत्र – ०२ January 16, 2017 / January 16, 2017 by मनोज ज्वाला | Leave a Comment यह विडम्बना ही नहीं धूर्त्तता भी है कि जिन लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान का ककहरा-मात्रा भी नहीं मालूम है वे दलितों को आध्यात्मिक लाभ देने में लगे हुए हैं और इस तथाकथित लाभ के नाम पर उनके गले में गुलामी का फंदा डालने वाले वे लोग उस फंदे को ही मुक्ति का माध्यम व स्वयं को मुक्तिदाता भी बता रहे हैं । इतना ही नहीं, इसकी पूरी अनुकूलता नहीं मिल पाने के कारण वे भारत के कानून-व्यवस्था को धार्मिक स्वतंत्रता का उत्पीडक बताते हुए इसके विरूद्ध अमेरिका से हस्तक्षेप की मांग भी कर रहे हैं । Read more » Featured religious freedom द राइजिंग आफ हिन्दू एक्सट्रीमिज्म दलित फ्रीडम नेटवर्क फ्रीडम हाऊस
समाज सकारात्मकता के लिए आनंद मंत्रालय January 15, 2017 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on सकारात्मकता के लिए आनंद मंत्रालय प्रमोद भार्गव आज पूरे देश में आत्महत्याएं बढ़ रही हैं। हर वर्ग, जाति उम्र और धर्म का व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है। इसके कारणों में पढ़ाई, होड़, भविष्य निर्माण, एकाकीपन, ईश्र्या व विद्वेष माने जा रहे हैं। व्यक्ति आत्महंता न बने, इस दृष्टि से मध्य-प्रदेश सरकार ने एक अनूठी पहल कर दी है। आनंद उत्सव […] Read more » Anand Mantralaya Featured आनंद मंत्रालय ख़ुशी मंत्रालय सकारात्मकता
विविधा समाज सार्वभौमिक-समन्वित भारतीय हिन्दू संस्कृति January 14, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 3 Comments on सार्वभौमिक-समन्वित भारतीय हिन्दू संस्कृति दूसरों को दुख देना सबसे बड़ा अधर्म है एवं दूसरों को सुख देना सबसे बड़ा धर्म है । यही हिन्दू की भी परिभाषा है। कोई व्यक्ति किसी भी भगवान को मानते हुए एवं न मानते हुए हिन्दू बना रह सकता है। हिन्दू की परिभाषा को धर्म से अलग नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि भारत में हिन्दू की परिभाषा में सिख, बौद्ध, जैन, आर्यसमाजी व सनातनी इत्यादि आते हैं। हिन्दू की संताने यदि इनमें से कोई भी अन्य पंथ अपना भी लेती हैं तो उसमें कोई बुराई नहीं समझी जाती एवं इनमें रोटी बेटी का व्यवहार सामान्य माना जाता है। Read more » Featured भारत में धर्म भारतीय धार्मिक समुदाय भारतीय हिन्दू संस्कृति हिन्दू धर्म का इतिहास
समाज युवा, रफ्तार और सड़क दुर्घटनाएं January 14, 2017 by महेश तिवारी | Leave a Comment दीपक तले अंधेरे की तर्ज पर प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देष्य से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा सम्पूर्ण भारत में का बुलावा होता है, इस बार भी हो रहा है, लेकिन समझने योग्य और विमर्श का मुद्वा यह है, कि इन कोशिशों के बावजूद सड़क दुर्घटनाएं है, कि कम होने का […] Read more » youth speed and road accidents नेशनल क्राइम व्यूरों की रिपोर्ट यातायात नियमों की जानकारी सड़क दुर्घटना सड़क सुरक्षा कानून सड़क सुरक्षा सप्ताह
समाज प्राचीन सेक्स परम्पराओं से जन्मी फ्री सेक्स ट्रेडिशन January 13, 2017 by अनिल अनूप | 4 Comments on प्राचीन सेक्स परम्पराओं से जन्मी फ्री सेक्स ट्रेडिशन -अनिल अनूप सेक्स शब्द सुनते ही आम आदमी थोड़ा शर्मा जाता है, क्यों शर्मा जाता है? क्योंकि हमारे समाज ने हमें यही सिखाया है। सेक्स शब्द से शादी और पति-पत्नी जुड़ चुके हैं और इससे इतर हटकर शायद आप नहीं सोच पाते। अगर सोचते भी हैं तो कहीं न कहीं आपके मन में एक अपराधबोध […] Read more » इंडोनेशिया में पोन सेलिब्रेशन छत्तीसगढ़ की मूरिया जनजाति फ्री सेक्स मेरिटल रेप वेस्ट अफ्रीका के वूडाबी जनजाति
समाज ग़लती किसकी? January 12, 2017 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment निकहत प्रवीन नए साल के अवसर पर बैंगलोर में होने वाली रेप की घटना ने एक बार फिर देश के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। निश्चित रुप से ये सवाल स्वाभाविक हैं क्योंकि इस बार घटना एक ऐसे शहर में हुई हैं जों महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है। कारणवश चर्चा […] Read more » increasing rape cases in India insecure women in India rape cases ग़लती किसकी
समाज युवा भारत हेतु प्रेरणा स्त्रोत: शिकागो संभाषण January 12, 2017 / January 12, 2017 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment सम्पूर्ण विश्व भर की अपेक्षा हम भारतीय युवाओं हेतु ईश्वर कितना कृपालु है यह केवल इस बात से समझा जा सकता है कि ईश्वर ने हमें प्रेरणा देनें हेतु भारत भू पर स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष को जन्म दिया !! आज जबकि एतिहासिक दृष्टि से और वैश्विक दृष्टि से देखने पर हमें पता चलता है […] Read more » Featured प्रेरणा स्त्रोत युवा भारत शिकागो संभाषण स्वामी विवेकानंद