टॉप स्टोरी विविधा जब योग का कहीं कोई विरोध है ही नहीं तो उसे करवाने की आक्रामक नाटकीयता क्यों ? June 20, 2015 by श्रीराम तिवारी | 10 Comments on जब योग का कहीं कोई विरोध है ही नहीं तो उसे करवाने की आक्रामक नाटकीयता क्यों ? आजकल शुद्ध सरकारी और उसका पिछलग्गू व्यभिचारी प्रचार तंत्र नाटकीय ढंग से योगाभ्यास के बरक्स आक्रामक और असहिष्णु हो चला है। दृश्य,श्रव्य ,पश्य, छप्य,डिजिटल,इलक्ट्रॉनिक ,मोबाइल और तमाम ‘प्रवचनीय’ माध्यमों दवरा बार -बार कहा जा रहा है कि दुनिया में भारतीय योग का झंडा पहली बार बुलंदियों को छूने वाला है। बड़े ही आक्रामक तरीके से यह भी सावित करने की कोशिश की जा रही है कि जो […] Read more » Featured आक्रामक नाटकीयता क्यों ? जब योग का कहीं कोई विरोध है ही नहीं
धर्म-अध्यात्म विविधा ‘समाज में बढ़ता पाखण्ड व ठगी और अन्धकारनाशक वेदविद्या’ June 20, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment हमारे देश के पतन के कारणों में मुख्य कारण था विद्या का ह्रास तथा अन्धविश्वासों व पाखण्डों की वृद्धि। वर्तमान में देश में जो उन्नति देखी जा रही है वह विद्या की कुछ उन्नति व अन्धविश्वासों व पाखण्डों में कुछ कमी के कारण है। महर्षि दयानन्द (1825-1883) ने देश की अवनति के कारणों को […] Read more » ‘समाज में बढ़ता पाखण्ड व ठगी और Featured अन्धकारनाशक वेदविद्या’ वेदविद्या समाज में बढ़ता ठगी समाज में बढ़ता पाखण्ड
विविधा स्वास्थ्य-योग शारीरिक व्यायाम की प्राचीन कला है योग June 20, 2015 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on शारीरिक व्यायाम की प्राचीन कला है योग प्रमोद भार्गव यह विडंबना ही है कि जब योग को पूरी दुनिया ने स्वीकार कर लिया है तब चंद धार्मिक समूह इसे धर्म और संप्रदाय विशेष का रंग देने की कलाबाजी का राजनैतिक खेल खेल रहे हैं। जबकि वास्तव में योग शारीरिक और मानसिक व्यायाम की प्राचीन भारतीय कला है। कला का यह खजाना अब […] Read more » Featured Yoga प्राचीन कला योग प्राचीन कला है योग योग शारीरिक व्यायाम
विविधा समाज संतान को देकर जाएं June 20, 2015 / July 20, 2015 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment श्री राम कृष्ण श्रीवास्तव 1 हम अपने माता पिता होने का दायित्व बड़ी कुशलता से निभाते हैं। अपने बच्चे को योग्यतम शिक्षा और ज्ञान देकर समाज में सम्मान के साथ रहने के लिए उसे उचित मार्ग दर्शन देते हैं। जिसके आधार पर वह अपनी योग्यता से वो सब कुछ अर्जित करने की क्षमता और सामर्थ्य […] Read more » ’’एक संतान’’ Featured give your child relationships इकलौती संतान को सम्पूर्ण पारिवारिक सम्बन्ध संतान को देकर जाएं
जन-जागरण धर्म-अध्यात्म विविधा एक ईश्वर के अनेक नामों का आधार June 19, 2015 by मनमोहन आर्य | 1 Comment on एक ईश्वर के अनेक नामों का आधार मनमोहन कुमार आर्य जिस प्रकार से नेत्रहीन मनुष्य संसार के दृश्यों के बारे में कल्पनायें करता है उसी प्रकार लगता है कि हमारे अल्पज्ञानी लोगों ने ईश्वर व धर्म के बारे में कल्पायें कीं और अपने ज्ञान के अनुरूप ही ईश्वर का स्वरूप भी निर्धारित किया। ज्ञान की वृद्धि के लिए ज्ञान चर्चा, शंका-समाधान, अनुसंधान […] Read more » Featured अनेक नामों का आधार ईश्वर के अनेक नाम एक ईश्वर
विविधा समाज माता-पिता सावधान ! June 19, 2015 by बी.आर.कौंडल | 1 Comment on माता-पिता सावधान ! जीवधारियों में शायद मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जिसके बच्चे की परवरिश सबसे अलग व संघर्षपूर्ण है | पहले माता बच्चे को नौ महीने अपनी कोख में पालती है उसके उपरान्त जब बच्चा सूर्य की रोशनी देखता है तो माता-पिता के लिए उसका सरंक्षण व पालन-पोषण चुनौती भरा होता है | पहले माता-पिता के आमतौर […] Read more » new generation the defect in uppbringing of new generation माता पिता
विविधा राष्ट्र के कामकाज और व्यवहार की भाषा ही देश की भाषा हो June 19, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” जातीय अर्थात राष्ट्रीय उत्थान और सुरक्षा के लिये किसी भी देश की भाषा वही होना श्रेयस्कर होता है,जो जाति अर्थात राष्ट्र के कामकाज और व्यवहार की भाषा होl समाज की बोल-चाल की भाषा का प्रश्न पृथक् हैlजातीय सुरक्षा हेतु व्यक्तियों के नामों में समानता अर्थात उनके स्त्रोत में समानता होने या यों कहें […] Read more » Featured देश की भाषा राष्ट्र के कामकाज और व्यवहार की भाषा
कविता विविधा उड़ान June 19, 2015 / June 19, 2015 by श्रद्धा सुमन | Leave a Comment कोई बता दे मुझे मेरी पहचान क्या है हूँ दीया कि बाती, या फिर उसकी पेंदी का अंधकार, हूँ तिलक उनकी ललाट पर या बस म्यान में औंधी तलवार… है आज द्वंद उठी, आंधी सवालों की एक हूक थी दबी जो अब मार रही चित्कार… हूँ कलश पल्लव से ढ़की, या बस चरणोदक या फिर […] Read more » Featured उड़ान
जन-जागरण विविधा पुनर्जागरण में हिन्दी लोक जागरण की स्थिति June 18, 2015 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment डॉ. मयंक चतुर्वेदी पुनर्जागरण का तात्पर्य है फिर से जागना। सचेत एवं चेतन्य होना। व्यक्ति, समाज या देश जो पहले जागा हुआ था, जो प्रत्येक क्षेत्र में अपना सर्वांगीण विकास कर रहा था, परंतु किन्हीं कारणों से वह सुषुप्ति की अवस्था में पहुंच गया है, उसका पुन: पहले की भांति सचेत एवं जाग्रत होना। डॉ. […] Read more » Featured पुनर्जागरण में हिन्दी लोक जागरण की स्थिति
जन-जागरण विविधा हास्यास्पद है वैश्विक स्वीकृति प्राप्त योग का विरोध June 18, 2015 / June 18, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment -अशोक “प्रवृद्ध” एक ओर जहाँ केन्द्र सरकार ने इक्कीस जून को आहूत अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में से कई मुस्लिम संगठनो के विरोध के बाद सूर्य नमस्कार को हटाने का निर्णय कर लिया है वहीँ दूसरी ओर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आनुसंगिक संस्था संस्कार भारती ने केन्द्र सरकार […] Read more » Featured योग योग का विरोध वैश्विक स्वीकृति प्राप्त योग का विरोध
पर्यावरण विविधा पहाड़ी क्षेत्र में फोरलेन सड़क निर्माण-प्रकृति से खिलवाड़ June 18, 2015 by बी.आर.कौंडल | 1 Comment on पहाड़ी क्षेत्र में फोरलेन सड़क निर्माण-प्रकृति से खिलवाड़ मुख्यमंत्री हि.प्र. ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान कहा था कि वृक्ष काटना न केवल एक कानूनन अपराध है बल्कि मानवता के खिलाफ़ कुठाराघात भी है | किरतपुर से मनाली तक बन रहे फोरलेन उच्चमार्ग के निर्माण के दौरान हजारों पेड़ों की बलि देकर मानवता के साथ कुठाराघात किया जा रहा है | डा. […] Read more » -प्रकृति से खिलवाड़ Featured पहाड़ी क्षेत्र में फोरलेन सड़क निर्माण फोरलेन सड़क निर्माण फोरलेन सड़क निर्माण-प्रकृति से खिलवाड़
धर्म-अध्यात्म विविधा व्रत-उपवास एवं महर्षि दयानन्द June 18, 2015 / June 18, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य आजकल हमारे देश के बहुत से लोग नाना दिवसों पर व्रत व उपवास आदि रखते और आशा करते हैं कि उससे उनको लाभ होगा। महर्षि दयानन्द चारों वेदों व सम्पूर्ण वैदिक व अवैदिक ग्रन्थों के अपूर्व विद्वान थे। उन्होंने समाधि अवस्था में ईश्वर का साक्षात्कार भी किया था और अपने विवेक से […] Read more » Featured महर्षि दयानन्द व्रत-उपवास