धर्म-अध्यात्म * सनातन धर्म की दुंदभी बजाती वनवासी बहनें*

* सनातन धर्म की दुंदभी बजाती वनवासी बहनें*

अजय खेमरिया

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चुनाव यह समय ईवीएम पर सवाल का नहीं बल्कि जनादेश के सम्मान का है

यह समय ईवीएम पर सवाल का नहीं बल्कि जनादेश के सम्मान का है

जगदीश वर्मा ‘समन्दर’ 19 मई को आये मीडिया चैनल्स के एक्जिट पोल्स में एनडीए को पिछले लोकसभा चुनावों से भी ज्यादा बहुमत के आंकड़े दिये…

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धर्म-अध्यात्म ‘एकजुटता’ के मार्ग में मजहबी  कट्टरता

‘एकजुटता’ के मार्ग में मजहबी कट्टरता

इ. राजेश पाठक भारत में बोद्ध-धर्म के प्रभाव के समाप्त हो जाने के कारण पर प्रकाश डालते हुए डॉ.भीमराव अम्बेडकर कहते हैं- ‘जब मुस्लिम शासक…

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राजनीति नरेन्द्र मोदी की ताजपोशी की तैयारी

नरेन्द्र मोदी की ताजपोशी की तैयारी

–ललित गर्ग– नरेन्द्र मोदी के सरकार बनाने एवं एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलने के संकेत विभिन्न स्तरों से मिल रहे हैं। ऐसे भी संकेत सामने…

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कविता हम तुम

हम तुम

चट्टान थे तुम हम लहर से , तुम से टकराते रहे, चोट खा खा के फिर वापिस आते रहे। तुम क्षितिज थे, हम थे राही,…

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कविता उनके प्यार की धुप आने लगी है

उनके प्यार की धुप आने लगी है

आर के रस्तोगी उनके प्यार की धूप आने लगी है सुबह से ही मुझको गर्माने लगी है देखता हूँ वे पिघलती है न पिघलती पर…

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कविता आखिर वो मेरी पत्नी है

आखिर वो मेरी पत्नी है

वो विरह वेदना सहती है, फिर भी न वो कुछ कहती है चाहें दिल में हो दर्द भरा, पर सदा प्रेम में बहती है वो…

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समाज प्याऊ पर बोतल का पानी भारी

प्याऊ पर बोतल का पानी भारी

मनोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया विश्लेषक भारतीय परम्परा में दान का सबसे ऊंचा स्थान रहा है. जन्म से लेकर मृत्यु तक हमारी परम्परा में…

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कविता इधर-उधर की मिट्टी

इधर-उधर की मिट्टी

विनोद सिल्ला ऐ! हवा ये मिट्टी जो तुम साथ लाई हो ये यहाँ की प्रतीत नहीं होती तुम चाहती हो मिलाना उधर की मिट्टी इधर…

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व्यंग्य इ वी एम पर कुंडली

इ वी एम पर कुंडली

हार हो जाये ,तब इवीएम में है दोष जीत जाये तो वह बिल्कुल है निर्दोष बिल्कुल है निर्दोष किस पर ठीकरा फोड़े मिला नहीं कोई…

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कविता नवगीत-हिटलर दिनमान

नवगीत-हिटलर दिनमान

क्या गर्मी पड़ती जेठ में वैशाख में! लू हैं लपटें हैं मचा हाहाकार है! इन दिनों धूप की सख्ती बरकार है! चिन्गारी है दबी बुझी…

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राजनीति बताओ जम्हूरे !  ईवीएम का जिन्न फ़िर कब पिटारे से निकलेगा  ?

बताओ जम्हूरे ! ईवीएम का जिन्न फ़िर कब पिटारे से निकलेगा ?

प्रभुनाथ शुक्ल लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम चुनाव की निष्पक्षता एंव पारदर्शिता एक बार फिर कटघरे में हैं। यह सवाल आम मतदाता की तरफ से नहीं…

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