कविता अब तो पुराने दिन याद कर लेते है |

अब तो पुराने दिन याद कर लेते है |

अब तो पुराने दिन याद कर लेते है |अपनी ख्वासियो के चराग बुझा देते है || कभी सोलह आने स्वपन सच होते थेअब तो एक…

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मीडिया Default Post Thumbnail

मिस्टर मीडिया: टीवी देखना बंद करने जैसे फ़रमानों से भी कहीं तानाशाही की गंध तो नहीं आ रही

इन दिनों बहस आम है कि टेलिविजन देखना बंद कर दिया जाए। दो महीने के लिए। लोकतंत्र बच जाएगा। तानाशाही का ख़तरा देश पर मंडरा…

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राजनीति लोकतंत्र की बंद गली का विचार मार्ग

लोकतंत्र की बंद गली का विचार मार्ग

अरुण तिवारीएक वकील के घर मिलन के अवसर पर लोकमान्य तिलक द्वारा गुलामी को राजनीतिक समस्या बताने की प्रतिक्रया में स्वामी विवेकानंद ने कहा था…

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प्रवक्ता न्यूज़ “नो मोर पाकिस्तान” विषय पर राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के बैनर तले दिल्ली के हरियाणा भवन में  संगोष्ठी .

“नो मोर पाकिस्तान” विषय पर राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के बैनर तले दिल्ली के हरियाणा भवन में संगोष्ठी .

आतंकवाद के ख़िलाफ़ एक जुट होने का समय आगया है. आतंकवाद के ख़ात्मे के लिए पाकिस्तान की नापाक हरकतों को कुचलना बेहद ज़रूरी है. इसी…

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राजनीति ‘मध्यस्थता‘ के सांकेतिक परिणाम

‘मध्यस्थता‘ के सांकेतिक परिणाम

हिंदुस्तान के सबसे बड़े आंतरिक विवाद ‘मंदिर निर्माण‘ पर अगर मध्यस्थता से कोई हल निकलता है तो मील का पत्थर कहा जाएगा। क्योंकि समूचा हिंदुस्तान…

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कविता इलेक्शन आ गया… !!

इलेक्शन आ गया… !!

चुनावी चकल्लस पर  पेश है खांटी खड़गपुरिया कविता… इलेक्शन आ गया… !! समझा मत मैं समझ गियाइलेक्शन आ गियादामी गाड़ी घूम रहाकैडर लोग झूम रहाअफिसर…

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कहानी मां तुझे सलाम

मां तुझे सलाम

र “इक़बाल भाई! ये देखो अमन की चिट्ठी आई है। ज़रा पढ़कर बताना तो, क्या लिखा है उसने? वह होली पर घर तो आ रहा है…

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राजनीति एक और कसाब

एक और कसाब

 अनिल अनूप एक बार फिर आतंकी हमला हुआ है और इस बार ‘एक और कसाब’ गिरफ्त में आया है, लेकिन एक और विपक्षी ने बदजुबानी की…

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कविता आ गया है बुढ़ापा

आ गया है बुढ़ापा

आ गया है बुढ़ापा,शरीर अब चलता नहीं |चेहरा जो गुलाब था,वह अब खिलता नहीं || हो गयी आँखे कमजोर,अब दिखता नहीं |काँपने लगे है हाथ,अब…

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कहानी अनिका एक पहेली

अनिका एक पहेली

कभी कभी जीवन में कुछ ऐसा घटित होता है जिसका पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता। मैं हॉस्पिटल अपने एक परिचित को देखने गया था, परिचित…

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महिला-जगत साहस ने मुखर बनाया महिला को

साहस ने मुखर बनाया महिला को

-अनिल अनूप महिलाओं के प्रति हिंसा के कई कारण हैं। एक तो महिलाएं मुखर हुई हैं, भली औरत के तमगे से खुद को आज़ाद किया…

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समाज आखिर क्या है शिक्षा?

आखिर क्या है शिक्षा?

नन्ही नन्ही उंगलियां उठीं और मां की हथेली को पकड़ कर सुकून भरी नजरों से देखा फिर इत्मिनान से सो गई वो परी. धीरे धीरे…

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