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वाइब्रेंट गुजरात के माध्यम से हिमाचल को पेश करने की कोशिश

 -अनिल अनूप हिमाचल की जयराम सरकार प्रदेश के नक्शे और नैन-नक्श बदलने की जिस मुहिम को गुजरात के परिप्रेक्ष्य में देख रही है, वहां इन्वेस्टर मीट के…

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मनोरंजन हिमाचल की फिल्मी संस्कृति

हिमाचल की फिल्मी संस्कृति

अनिल अनूप  अगल मैं आठ साल पहले की सिनेमाई फिज़ा में लौटूं तो सही मायने में हिमाचल में लघु फिल्मों के कल्चर को विकसित करने…

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कविता Default Post Thumbnail

मैं अध्यापिका कहलाती हूँ

      क्यों कहूँ मैं कि सुबह का अलार्म मुझे सोने नहीं देता ? जबकि वह तो सूर्य देव के स्वागत में मुझसे गुस्ताखी होने नहीं…

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साहित्‍य Default Post Thumbnail

इन्सान ही बनना ।

सबका ही सम्मान तू करना ,नहीं कभी अपमान तू करना हिंदू मुस्लिम बाद में बनना ,पहले तू इन्सान ही बनना ।तकलीफ़े न देना किसी को,कभी किसी…

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राजनीति भा.ज.पा. की जीत से गूंजेगी “भारत माता की जय”…

भा.ज.पा. की जीत से गूंजेगी “भारत माता की जय”…

अभी भी समय है भारत माता की जय बोलने वालों कुछ ठोस करो अन्यथा घोटालेबाज, चालबाज व विभिन्न विचारधाराओं के नेताओं का गठबंधन राष्ट्रीय राजनीति…

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कविता जीवन बस इक धोखा है।

जीवन बस इक धोखा है।

दुनिया की उलझन में पड़कर, सब ताने बाने बदल गये हम तो वैसे के वैसे रहे, पर दोस्त पुराने बदल गये। ये बात नही परिवर्तन…

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राजनीति आरक्षण का अगला चरण, आर्थिक आरक्षण

आरक्षण का अगला चरण, आर्थिक आरक्षण

लोकसभा के पिछले सत्र में अचानक मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों के लिए दस प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव रख दिया। अपवाद में दो-चार वोटों को…

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समाज “मांसाहार मनुष्य के स्वभाव व प्रकृति के अनुरूप नहीं है”

“मांसाहार मनुष्य के स्वभाव व प्रकृति के अनुरूप नहीं है”

ओ –मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।                परमात्मा ने इस सृष्टि व ब्रह्माण्ड को बनाया है और इसमें अनेक प्रकार के प्राणियों व वनस्पति जगत को…

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महत्वपूर्ण लेख सांस्कृतिक संवेदनहीनता के समय में ‘लोक’

सांस्कृतिक संवेदनहीनता के समय में ‘लोक’

-प्रो. संजय द्विवेदी   जब समाज में गहरी सांस्कृतिक संवेदनहीनता जड़ें जमा चुकी हो और राजनीति अपने सर्वग्रासी चरित्र में सबसे हिंसक रूप से सामने हो,…

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कविता वो बैठे फेसबुक खोले

वो बैठे फेसबुक खोले

नभ चाहें धरती डोले, वो बैठें फेसबुक खोलेउंगली करें होले होले,वो बैठें फेसबुक खोले!दुनिया भर के दोस्त बना दे, ये इण्टरनेट साइट, गीदड़ भी है…

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धर्म-अध्यात्म हमें पता नहीं इस जन्म में हम कहां से आये और इसके बाद कहां जाना है ?

हमें पता नहीं इस जन्म में हम कहां से आये और इसके बाद कहां जाना है ?

–मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।                हम मनुष्यों ने वर्तमान आधुनिक ज्ञान विज्ञान के युग में जो जानना चाहा वह जान लिया और विज्ञान विषयक जिस…

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धर्म-अध्यात्म यह बृहद् ब्रह्माण्ड किसने बनाया है?”

यह बृहद् ब्रह्माण्ड किसने बनाया है?”

–मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।                हम अर्थात् हमारी आत्मा हमारे शरीर में रहती है और हम व हमारा शरीर दोनों इस संसार में रहते हैं।…

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