कविता चन्द्र का प्रतिविम्ब !

चन्द्र का प्रतिविम्ब !

चन्द्र का प्रतिविम्ब, ज्यों जल झिलमिलाए; पुरुष का प्रतिफलन, प्राणों प्रष्फुराए ! विकृति आकृति शशि की, जल-तल भासती कब; सतह हलचल चित्र, सुस्थिर राखती कहँ ! गगन वायु अग्नि जल थल, थिरकते सब; द्रष्टि दृष्टा चित्त पल-पल, विचरते भव ! फलक हर उसकी झलक, क्षण क्षण सुहाए; देख पाए सोंप जो हैं, अहं पाए ! महत में सत्ता डुबाए, बृह्म भाए; ‘मधु’ के प्रभु अहर्निश, हर हिय सुहाए ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु

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कविता अदाकारी

अदाकारी

 डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ ज़िंदगी के रंग मंच पर आदमी है सिर्फ़ एक कठपुतली । कठपुतली अपनी अदाकारी में कितने भी रंग भर ले आख़िर; वह पहचान ही ली जाती है, कि वह मात्र एक कठपुतली है । ऐसे ही आदमी चेहरे पर कितने ही झूठे-सच्चे रंग भरे अंत में, रंगीन चेहरे के पीछे असली चेहरा पहचान ही लिया जाता है |

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राजनीति देश विरोधी विचार रखने वालों के समर्थन में यह कौन लोग है?

देश विरोधी विचार रखने वालों के समर्थन में यह कौन लोग है?

डॉ नीलम महेंद्र भारत शुरू से ही एक उदार प्रकृति का देश रहा है, सहनशीलता इसकी पहचान रही है और आत्म चिंतन इसका स्वभाव। लेकिन जब…

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समाज आरामपसंद भारत ?

आरामपसंद भारत ?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि ‘शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्’ अर्थात धर्म का सबसे पहला साधन शरीर है लेकिन भारतीय लोग अपने…

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राजनीति फोन बैंकिंग से डूबे बैंक

फोन बैंकिंग से डूबे बैंक

प्रमोद भार्गव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘भारतीय डाक भुगतान बैंक‘ का उद्घाटन करते हुए डाॅ मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील  गठबंधन सरकार पर…

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राजनीति कानूनी उत्पीड़त के विरोध में सवर्ण

कानूनी उत्पीड़त के विरोध में सवर्ण

प्रमोद भार्गव बम को चिंगारी से बचाने की दूरद्रष्टि हमारे ज्यादातर नेताओं में नहीं है। यदि द्रष्टि होती तो सर्वोच्च न्यायालय के 20 मार्च 2018…

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कविता भयावह सपना

भयावह सपना

-विनोद सिल्ला सपने में नित देता है दिखाई समाज का उधड़ता ताना-बाना घुलता फिजां में जहर साम्प्रदायिक कहर दलितों की रुकती घुड़चढ़ी खाप-पंचायतों की ललकार…

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समाज मर्द नहीं, औरत ही औरत की सबसे बड़ी दुश्मन?

मर्द नहीं, औरत ही औरत की सबसे बड़ी दुश्मन?

निर्मल रानी  प्राचीन समय में मुहावरों तथा कहावतों की रचना निश्चित रूप से हमारे पुर्वजों द्वारा  पूरे चिंतन-मंथन,शोध तथा अनुभवों के आधार पर की गई…

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समाज किस्मत बदल देता इस मण्डी से खरीदा गया हर माल

किस्मत बदल देता इस मण्डी से खरीदा गया हर माल

अनिल अनूप  चौक गये न आप!! अब सेक्स की मंडी में ग्राहकों की भीड़ केवल मौज मस्ती या शारीरिक सुख के लिए ही नहीं लगती।…

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राजनीति           लोकतांत्रिक मूल्यों की सरकार ही देश समाज से डरती है

          लोकतांत्रिक मूल्यों की सरकार ही देश समाज से डरती है

प्रवीण गुणगानी एक प्रसिद्द शेर याद आया – गिरते हैं शह सवार ही मैदाने जंग में  ,वो तिफ्ल (सैनिक) क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल…

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प्रवक्ता न्यूज़ ख़लिश

ख़लिश

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ जिस सहर पे यकीं था वो ख़ुशगवार न हुयी देखो ये कैसी अदा है नसीब की समझा था जिसे बेकार, वो बेकार न हुयी मांगी थी जब तड़प रूह बेक़रार न हुयी कहूँ अब क्या किसी से देखकर माल-ओ-ज़र भी मिरि चाहतें तलबगार न हुयीं सोचा था जिन्हे अपना वो साँसें मददगार न हुयीं है अजीब अशआर क़ुदरत की भूल से छोड़ा था जिसे हमने वो निगाहें शिकबागार न हुयीं

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कविता हिंदुस्तान में हिंदी का हाल व भविष्य

हिंदुस्तान में हिंदी का हाल व भविष्य

मेरे देश में मेरा ही बुरा हाल है विदेशी भाषा पर ठोकते  ताल है मेरे देश में मेरा ही सम्मान नहीं फिर विदेशो में मेरा…

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