समाज मृत्यु को महोत्सव बनाने का विलक्षण उपक्रम है संथारा

मृत्यु को महोत्सव बनाने का विलक्षण उपक्रम है संथारा

– ललित गर्ग जैन धर्म में संथारा अर्थात संलेखना- ’संन्यास मरण’ या ’वीर मरण’ कहलाता है। यह आत्महत्या नहीं है और यह किसी प्रकार का…

Read more
गजल जवानी जो आई बचपन की हुड़दंगी चली गई

जवानी जो आई बचपन की हुड़दंगी चली गई

 रूपेश जैन ‘राहत  जवानी जो आई बचपन की हुड़दंगी चली गई दफ़्तरी से हुए वाबस्ता तो आवारगी चली गई शौक़ अब रहे न कोई ज़िंदगी…

Read more
विश्ववार्ता पोंपिओ और मेटिस क्या करेंगे ?

पोंपिओ और मेटिस क्या करेंगे ?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपिओ और रक्षा मंत्री जिम मेटिस इस सप्ताह भारत और पाकिस्तान आएंगे। यह यात्रा कूटनीतिक दृष्टि से…

Read more
कविता क्यों मौन है आवाम

क्यों मौन है आवाम

      – डॉ. छन्दा बैनर्जी   जाने अख़बार क्या कहता है, पढ़कर, पूरा आवाम क्यों मौन रहता है ?   हां, बस्तर का…

Read more
गजल मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है

मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है

मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग बदलते देखा है वो जो चलते थे तो शेर के…

Read more
राजनीति अर्थव्यवस्था की सुनहरी होती तस्वीर 

अर्थव्यवस्था की सुनहरी होती तस्वीर 

-ललित गर्ग- भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जिसकी विकास गति ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। कृषि क्षेत्र…

Read more
विविधा (स्वर्गीय) श्रीलाल शुक्ल के अमर ग्रंथ ‘राग दरबारी’

(स्वर्गीय) श्रीलाल शुक्ल के अमर ग्रंथ ‘राग दरबारी’

अनिल सिंह कुछ दिन पहले अखबार में पढ़ा कि (स्वर्गीय) श्रीलाल शुक्ल के अमर ग्रंथ ‘राग दरबारी’ के प्रकाशन के 50 वर्ष पूरे हो गये।…

Read more
धर्म-अध्यात्म कृष्ण  जन्माष्टमी की देश में मची धूम

कृष्ण जन्माष्टमी की देश में मची धूम

डा- राधेश्याम द्विवेदी श्रीकृष्ण भक्ति में रासलीला एक लोकप्रिय साधन डा. राधेश्याम द्विवेदी श्रीकृष्ण भारत की पुण्य भूमि में अवतरित हुये थे। वे भगवान विष्णु…

Read more
कविता अगर कृष्ण कलयुग में जन्म लेते

अगर कृष्ण कलयुग में जन्म लेते

अच्छा हुआ कृष्ण ने लिया द्वापर के जमाने में वर्ना दुर्गति हो जाती उनकी इस कलयुगी जमाने में अच्चा हुआ कृष्ण ने जन्म नहीं लिया…

Read more
गजल मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था 

मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था 

डॉ. रूपेश जैन  मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था ख़ाहिश-ए-ख़लीक़ इज़हार करना चाहा था धुएँ सी उड़ा दी आरज़ू पल में यार ने मिरि तिरा इस्तिक़बाल शानदार करना चाहा था भले लोगो की बातें समझ न आईं वक़्त पे मैंने तो हर लम्हा जानदार करना चाहा था तिरे काम आ सकूँ इरादा था बस इतना सा तअल्लुक़ आपसे आबदार करना चाहा था इंतिज़ार क्यूँ करें फ़स्ल-ए-बहाराँ सोचकर चमन ये ‘राहत’ खुशबूदार करना चाहा था

Read more
धर्म-अध्यात्म संसार के मार्गदर्शक हैं श्रीकृष्ण

संसार के मार्गदर्शक हैं श्रीकृष्ण

अरविंद जयतिलक श्रीकृष्ण साक्षात परब्रह्म और ईश्वर हैं। संसार के समस्त पदार्थों के बीज उन्हीं में निहित है। वे नित्यों के नित्य और जगत के…

Read more
कविता दास्तां सुन कर क्या करोगे दोस्तों …!!

दास्तां सुन कर क्या करोगे दोस्तों …!!

तारकेश कुमार ओझा ————————- बचपन में कहीं पढ़ा था रोना नहीं तू कभी हार के सचमुच रोना भूल गया मैं बगैर खुशी की उम्मीद के…

Read more