मृत्यु को महोत्सव बनाने का विलक्षण उपक्रम है संथारा
Updated: September 4, 2018
– ललित गर्ग जैन धर्म में संथारा अर्थात संलेखना- ’संन्यास मरण’ या ’वीर मरण’ कहलाता है। यह आत्महत्या नहीं है और यह किसी प्रकार का…
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जवानी जो आई बचपन की हुड़दंगी चली गई
Updated: September 4, 2018
रूपेश जैन ‘राहत जवानी जो आई बचपन की हुड़दंगी चली गई दफ़्तरी से हुए वाबस्ता तो आवारगी चली गई शौक़ अब रहे न कोई ज़िंदगी…
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पोंपिओ और मेटिस क्या करेंगे ?
Updated: September 4, 2018
डॉ. वेदप्रताप वैदिक अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपिओ और रक्षा मंत्री जिम मेटिस इस सप्ताह भारत और पाकिस्तान आएंगे। यह यात्रा कूटनीतिक दृष्टि से…
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क्यों मौन है आवाम
Updated: September 4, 2018
– डॉ. छन्दा बैनर्जी जाने अख़बार क्या कहता है, पढ़कर, पूरा आवाम क्यों मौन रहता है ? हां, बस्तर का…
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मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है
Updated: September 4, 2018
मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग बदलते देखा है वो जो चलते थे तो शेर के…
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अर्थव्यवस्था की सुनहरी होती तस्वीर
Updated: September 3, 2018
-ललित गर्ग- भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जिसकी विकास गति ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। कृषि क्षेत्र…
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(स्वर्गीय) श्रीलाल शुक्ल के अमर ग्रंथ ‘राग दरबारी’
Updated: December 5, 2018
अनिल सिंह कुछ दिन पहले अखबार में पढ़ा कि (स्वर्गीय) श्रीलाल शुक्ल के अमर ग्रंथ ‘राग दरबारी’ के प्रकाशन के 50 वर्ष पूरे हो गये।…
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कृष्ण जन्माष्टमी की देश में मची धूम
Updated: September 3, 2018
डा- राधेश्याम द्विवेदी श्रीकृष्ण भक्ति में रासलीला एक लोकप्रिय साधन डा. राधेश्याम द्विवेदी श्रीकृष्ण भारत की पुण्य भूमि में अवतरित हुये थे। वे भगवान विष्णु…
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अगर कृष्ण कलयुग में जन्म लेते
Updated: September 3, 2018
अच्छा हुआ कृष्ण ने लिया द्वापर के जमाने में वर्ना दुर्गति हो जाती उनकी इस कलयुगी जमाने में अच्चा हुआ कृष्ण ने जन्म नहीं लिया…
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मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था
Updated: September 3, 2018
डॉ. रूपेश जैन मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था ख़ाहिश-ए-ख़लीक़ इज़हार करना चाहा था धुएँ सी उड़ा दी आरज़ू पल में यार ने मिरि तिरा इस्तिक़बाल शानदार करना चाहा था भले लोगो की बातें समझ न आईं वक़्त पे मैंने तो हर लम्हा जानदार करना चाहा था तिरे काम आ सकूँ इरादा था बस इतना सा तअल्लुक़ आपसे आबदार करना चाहा था इंतिज़ार क्यूँ करें फ़स्ल-ए-बहाराँ सोचकर चमन ये ‘राहत’ खुशबूदार करना चाहा था
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संसार के मार्गदर्शक हैं श्रीकृष्ण
Updated: September 3, 2018
अरविंद जयतिलक श्रीकृष्ण साक्षात परब्रह्म और ईश्वर हैं। संसार के समस्त पदार्थों के बीज उन्हीं में निहित है। वे नित्यों के नित्य और जगत के…
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दास्तां सुन कर क्या करोगे दोस्तों …!!
Updated: September 3, 2018
तारकेश कुमार ओझा ————————- बचपन में कहीं पढ़ा था रोना नहीं तू कभी हार के सचमुच रोना भूल गया मैं बगैर खुशी की उम्मीद के…
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