काम ने मुझे जीते जी अमर बना दिया
Updated: September 11, 2018
अनिल अनूप कृष्णा न्यूड मॉडल हैं. बिना कपड़ों के मॉडलिंग करती हैं. या फिर महीने के चंद रोज़ निचले हिस्से में बित्ताभर कपड़े के साथ.…
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सबको सिर्फ सेक्स चाहिए, प्यार नहीं
Updated: September 11, 2018
अनिल अनूप .. मैं एक ट्रांसजेंडर सेक्स वर्कर हूं. ये है मेरी कहानी. 12 जून, 1992 को आजमगढ़ के एक मध्यवर्गीय परिवार में मेरा जन्म…
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केवल ”भारत बंद“ समाधान नहीं है
Updated: September 10, 2018
-ललित गर्ग – पेट्रोल और डीजल के बढ़ते मूल्यों को लेकर आम जनता परेशान है, उसका दम-खम सांसें भरने लगा है, जीवन दुश्वार हो गया…
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“श्रीकृष्ण के चरित्र को दूषित करने वाली भागवत पुराण की मिथ्या बातों को न मानें : आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री”
Updated: September 10, 2018
मनमोहन कुमार आर्य, आर्यसमाज हिण्डोन सिटी में रविवार 2 सितम्बर, 2018 को श्री कृष्ण-जन्माष्टमी पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः चार दम्पत्तियों…
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“मदारी” शिवराज के आगे कमजोर पड़ते कमलनाथ ?
Updated: September 10, 2018
जावेद अनीस मध्यप्रदेश में पिछले तीन महीने की सरगर्मियों को देखें तो कांग्रेस भाजपा के मुकाबले चुनावी तैयारियों में पीछे नजर आ रही है. कांग्रेस…
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मेरी आँखों के सामने अब कोई अँधेरा नही,
Updated: September 10, 2018
लेखक : बबली सिंह मेरी आँखों के सामने अब कोई अँधेरा नही, कि हर धूल मैंने झाड़ दी है अब, मुझे अब अपने दर्द की…
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शिकागो संभाषण – भारत के विश्वगुरु बनने का मार्ग
Updated: September 10, 2018
प्रवीण गुणगानी स्वामी विवेकानंद जी ने भारत को व भारतत्व को कितना आत्मसात कर लिया था, यह कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर के इस कथन से समझा…
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ऐसे डॉक्टरों की डिग्रियां छीन लें
Updated: September 10, 2018
डॉ. वेदप्रताप वैदिक किसी भी राष्ट्र को संपन्न और शक्तिशाली बनाने के लिए सबसे जरुरी दो चीजें होती हैं। शिक्षा और चिकित्सा। हमारे नेताओं ने…
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कहाँ जाने का समय है आया !
Updated: September 10, 2018
(मधुगीति १८०८०१ अ) कहाँ जाने का समय है आया, कहाँ संस्कार भोग हो पाया; सृष्टि में रहना कहाँ है आया, कहाँ सृष्टि से योग हो पाया ! सहोदर जीव कहाँ हर है हुआ, समाधि सृष्ट कहाँ हर पाया; समादर भाव कहाँ आ पाया, द्वैत से तर है कहाँ हर पाया ! बीज जो बोये दग्ध ना हैं हुए, जीव भय वृत्ति से न मुक्त हुए; भुक्त भव हुआ कहाँ भव्य हुए, मुक्ति रस पिया कहाँ मर्म छुए ! चित्त चितवन में कहाँ है ठहरा, वित्त स्वयमेव कहाँ है बिखरा; विमुक्ति बुद्धि है कहाँ पाई, युक्ति हो यथायथ कहाँ आई ! नयन स्थिर चयन कहाँ कीन्हे, कहाँ मोती हैं हंसा ने बीने; कहाँ ‘मधु’ उनकी शरण आ पाया, पकड़ हर चरण कमल कब पाया ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’
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“भौतिकवाद से हमारी मानवीय संवेदनायें घटती हैं जिन्हें आध्यात्मिकता से सन्तुलित कर जीवन को सुखी बना सकते हैं”
Updated: September 10, 2018
मनमोहन कुमार आर्य, भौतिकवाद आध्यात्मवाद का विलोम शब्द है। पृथिवी, अग्नि, जल, वायु और आकाश को भौतिक पदार्थ कहते हैं। इसमें ईश्वर व जीवात्मा सम्मिलित…
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अब “मोमो चैलेंज” गेम बना बच्चों की मौत का सौदागर
Updated: September 10, 2018
अनिल अनूप लुधियाना, 9 सितंबर .मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी), उच्च शिक्षा विभाग, ने स्कूल शिक्षा विभाग को सलाह दी है कि ऑनलाइन गेम ‘मोमो…
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ज्वार उठाना होगा, मस्तक कटाना होगा
Updated: September 10, 2018
कवि आलोक पाण्डेय समर की बेला है वीरों अब संधान करो, शत्रु को मर्दन करने को, त्वरित अनुसंधान करो | मातृभू की खातिर फिर लहू…
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