आग की लपटें
Updated: November 28, 2018
मैं आज सुबह उठा और देखा रात की बूंदाबांदी से जम गई थी धूल वायुमंडल में व्याप्त रहने वाले धूलकण भी थे नदारद मन हुआ…
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जानिए मनीषा कोइराला की कैंसर से जंग
Updated: November 28, 2018
विवेक कुमार पाठक नामी निर्देशक सुभाष घई की सौदागर फिल्म से हिन्दी सिनेमा में आगाज करने वाली मनीषा कोइराला ने कैंसर से अपनी जंग को…
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ग़ज़ल की दुनिया का मुकम्मल शेर है अज़ीज़ अंसारी
Updated: November 28, 2018
– डॉ अर्पण जैन ‘अविचल‘ जैसा नाम वैसा ही स्वभाव, वैसी ही आत्मीयता, वैसा ही निश्छल स्नेह, वैसी ही शांति और सरलता की प्रतिमूर्ति और सबसे बड़ी बात तो यह की ग़ज़ल के मायने जब तो समझाते है तो लगता है खुद ग़ज़ल बोल रही है कि मुझे इस मीटर में, इस बहर में, इस रदीफ़ और इस काफिये के साथ लिखो। हम बात कर रहे है इंदौर के खान बहादूर कम्पाउंड में रहने वाले अज़ीज़ अंसारी साहब की जो वर्ष २००२ की मार्च में आकाशवाणी इंदौर से केंद्र निदेशक के दायित्व से सेवानिवृत हुए हैं पर उसके बाद भी अनथक, अनवरत और अबाध गति से साहित्य साधना में रत हैं। हिंदी-उर्दू की महफ़िल और अदब की एक शाम कहूँ यदि अंसारी जी को तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। लगभग १० से अधिक किताब और सैकड़ों सम्मान जिनके खाते में हो, कई वामन तो कई विराट कद को सहज स्वीकार करते, नवाचार के पक्षधर, अनम्य को सिरे से ख़ारिज करने के उपरांत हर दिन होते नव प्रयोगों को सार्थकता से अपनी ग़ज़ल, अपनी जबान और अपने लहजे में उसी तरह शामिल करते हैं जैसे पानी में नमक या शक्कर। ७ मार्च १९४२ को मालवा की धरती इंदौर में पिता श्री ईदू अंसारी जी के घर जन्मे अज़ीज़ अंसारी जी वैसे तो एमएससी (कृषि), डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एन्ड रूरल जर्नलिस्म तक अध्ययन कर चुके हैं और बचपन से उर्दू-हिन्दी साहित्य में रूचि रखते हैं। सन १९६४ से साहित्य की जमीन पर गोष्ठियों के माध्यम से सक्रियता की इबारत रच रहे हैं। जहाँ साहित्य के झंडाबरदार साहित्य के गलीचे को जनता के पांव के नीचे से खसकाने वाले बन रहे है और अस्ताचल की तरफ बढ़वाना चाह रहे है पर ऐसे ही दौर में अंसारी जी नए जोश और उमंग के साथ नवाचार का स्वागत करते हैं। साफगोई और किस्सों की एक किताब जो बच्चों को भी उसी ढंग से हौसला देते हैं जैसे तजुर्बेदारों या कहूँ विधा के झंडाबरदारों को टोकते हैं उनकी गलती पर। बात जब हाइकु की हुई तो अंसारी जी कहते है कि ‘सलासी’ जानते हो? उर्दू में सलासी भी तीन लाइन में लिखे शेर हैं जिसमें रदीफ़ भी होता है और काफिया भी मिलता है। बहुत से किस्से और कहानियों के बीच हिन्दी के उत्थान की बात आई तो पेट की भाषा बनाने के लिए उनकी भी चिंता साथ मिल गई। और यही कहा की साथ हूँ, जब चाहो, जैसे चाहो बताना जरूर। एक स्कूल में जगह है अपने पास चाहो तो यहाँ भी कुछ संचालित कर सकते हो। शहर की साहित्यिक जमात में अदावत का एक नाम जो इसलिए भी मशहूर है क्योंकि आकाशवाणी पर कई रचनाकारों को मंच देकर तराशा भी और हीरा भी बनाया। आपके सुपुत्र सईद अंसारी जी जो वर्तमान में आजतक के मशहूर न्यूज एंकर है। इन सब के अतिरिक्त अंसारी जी के पास सैकड़ों किस्से हैं, जिनमे शामिल है शहर की विरासत और ग़ज़ल की बज्म। बहर और मीटर में अपनी बात कहने वाले अज़ीज़ अंसारी जी जीवन में भी मीटर में ही रहते हुए मुकम्मल शेर बनकर जिंदगी की ग़ज़ल गुनगुना रहे हैं।
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हिंसा से जख्मी होती राष्ट्रीय अस्मिता
Updated: November 28, 2018
ललित गर्ग- दिल्ली के द्वारका में नरभक्षी होने की अफवाह के चलते लोगों ने अफ्रीकी नागरिकों पर हमला कर दिया था। एक अन्य घटना में…
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दिन ब दिन टूटते रिश्ते
Updated: November 26, 2018
डॉ नीलम महेंद्र हाल ही में जापान की राजकुमारी ने अपने दिल की आवाज सुनी और एक साधारण युवक से शादी की। अपने प्रेम की खातिर…
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जलती चिताओं के पास पूरी रात नाचती हैं सेक्स वर्कर
Updated: November 26, 2018
अनिल अनूप काशी के उस श्मशान पर जिसके बारे में ये मशहूर है कि यहां चिता पर लेटने वाले को सीधे मोक्ष मिलता है। दुनिया…
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भारत-पाक-चीनः तू-तू—मैं-मैं नहीं
Updated: November 26, 2018
डॉ. वेदप्रताप वैदिक मुझे थोड़ा अचरज हुआ और खुशी भी कि इस बार पाकिस्तान की सरकार ने अपना संतुलन नहीं खोया। कराची स्थित चीनी वाणिज्य…
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“पं. देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय संग्रहीत बंगला सामग्री के आधार पर ऋषि जीवन का अनुवाद व सम्पादन करने वाले विद्वान पं. घासीराम”
Updated: November 26, 2018
मनमोहन कुमार आर्य, आर्यसमाज के संस्थापक ऋषि दयानन्द के जीवन विषयक इतिहास सामग्री के संग्रह में पं. लेखराम एवं पं. देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय का स्थान सर्वोपरि…
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फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ जिनके अंदर अपने देश का बोध सदा बना रहा
Updated: November 26, 2018
अनिल अनूप फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, महमूद दरवेश और नाज़िम हिक़मत साहित्यिक और राजनीतिक व्यक्तित्वों की उस कड़ी का निर्माण करते हैं जो अपने देश से…
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प्रकृति एवं पर्यावरण की उपेक्षा क्यों?
Updated: November 26, 2018
ललित गर्ग- विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस प्रति वर्ष पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने एवं लोगों को जागरूक करने के सन्दर्भ में सकारात्मक कदम उठाने के…
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महिलाओं की हिंसा और उत्पीड़न से जुड़े प्रश्न
Updated: November 24, 2018
ललित गर्ग – दुुनियाभर में महिलाओं के प्रति हिंसा, शोषण एवं उत्पीड़न की बढ़ती घटनाएं संयुक्त राष्ट्र संघ के लिए गंभीर चिन्ता का विषय बना…
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कुछ चीजें हैं जो हमारे देश के युवाओं को जानना आवश्यक है
Updated: November 24, 2018
अनिल अनूप ‘ सेक्स ‘ एक शब्द है जिसमें भारत की बात आती है जब इसके साथ एक वर्जित जुड़ा हुआ है. हम में से…
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