विविधा *प्रकाशित पुस्तकें ही है लेखक की पहचान*

*प्रकाशित पुस्तकें ही है लेखक की पहचान*

*डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’* पुस्तक सर्वदा बहुत अच्छी मित्र होती है, इसके पीछे एक कारण यह है कि पुस्तक ही किसी सृजक के उपलब्ध ज्ञान का…

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महिला-जगत शाहजहांपुर की शेरनी के जज्बे को सलाम

शाहजहांपुर की शेरनी के जज्बे को सलाम

अनिल अनूप एक पंक्ति गुनगुना कर लिखना पड़ रहा है ये पंक्तियां शाहजहांपुर की बहादुर बिटिया पर बिल्कुल सटीक बैठती है “अंबे है मेरी मां…

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धर्म-अध्यात्म मनुष्य के कुछ आवश्यक कर्तव्य

मनुष्य के कुछ आवश्यक कर्तव्य

मनमोहन कुमार आर्य हम मनुष्य कहलाते हैं। इसका कारण यह है कि परमात्मा ने हमें सत्य व असत्य का विचार करने के लिए बुद्धि दी…

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धर्म-अध्यात्म स्त्री व शूद्र शिक्षा के सन्दर्भ में सत्यार्थप्रकाश का मत

स्त्री व शूद्र शिक्षा के सन्दर्भ में सत्यार्थप्रकाश का मत

शिवदेव आर्य स्वामी दयानन्द सरस्वती जी अनिवार्य शिक्षा का समर्थन करते हैं और इसके लिए स्वामी जी यह दायित्व माता-पिता को सौंपते हैं। वे चाणक्य…

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धर्म-अध्यात्म सत्संग क्या और इससे लाभ

सत्संग क्या और इससे लाभ

मनमोहन कुमार आर्य सत्संग एक प्रचलित शब्द है जिसका प्रायः सभी लोग बातचीत व परस्पर व्यवहार में प्रयोग करते है। आजकल किसी धार्मिक कथा आदि…

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राजनीति क्या हैं सलमान खुर्शीद के बयानों के मायने ??

क्या हैं सलमान खुर्शीद के बयानों के मायने ??

विनोद विधुरी अपने दामन पर मुसलमानों के खून के धब्बे होने की बात कहकर सलमान खुर्शीद ने कांग्रेस समेत भारत के राजनीति में हड़कंप मचा…

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महिला-जगत कानून नहीं है श्रीदेवी के रास्ते की बाधा

कानून नहीं है श्रीदेवी के रास्ते की बाधा

अन्नापूर्णा यह कहानी है धारवाड़ जिले के धारवाड़ तालुका में बसे बेलुरु ग्राम पंचायत की श्रीदेवी भिमप्पा तलवाड़ा की। श्रीदेवी बेलुरु पंचायत में पंचायत सदस्य…

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समाज आसाराम को सजा बहुत कम है

आसाराम को सजा बहुत कम है

आसाराम को सजा बहुत कम है डॉ. वेद प्रताप वैदिक आसाराम को उम्र—कैद की सजा और उसके दो साथियों को 20—20 साल की सजा हुई।…

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कविता संत से बना है शैतान आसाराम

संत से बना है शैतान आसाराम

त से बना है शैतान आसाराम हजारो गलत किये इसने काम उन काली करतूतों के ही कारण काल कोठरी में बंद हुआ आसाराम जज ने…

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दोहे धेनु चरन न तृणउ पात !

धेनु चरन न तृणउ पात !

धेनु चरन न तृणउ पात, त्रास अति रहत; राजा न राज करउ पात, दुष्ट द्रुत फिरत ! बहु कष्ट पात लोक, त्रिलोकी कूँ हैं वे तकत; शोषण औ अनाचारी प्रवृति, ना है जग थमत ! ना कर्म करनौ वे हैं चहत, धर्म ना चलत; वे लूटनों लपकनों मात्र, गुप्त मन चहत ! झकझोरि डारौ सृष्टि, द्रष्टि बदलौ प्रभु अब; भरि परा-द्रष्टि जग में, परा-भक्ति भरौ तव ! विचरहिं यथायथ सबहि विश्व, तथागत सुभग; मधु क्षरा पाएँ सुहृद ‘मधु’, करि देउ प्रणिपात ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’

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राजनीति मगर ‘राक्षसी कृत्य’ समर्थक इस भीड़ का क्या करेंगे?

मगर ‘राक्षसी कृत्य’ समर्थक इस भीड़ का क्या करेंगे?

निर्मल रानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों मध्यप्रदेश में ग्राम पंचायतों के एक सम्मेलन  को संबोधित करते हुए देश में महिलाओं व बेटियों के…

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राजनीति बलात्कार के लिए पोर्न फिल्में जिम्मेबार

बलात्कार के लिए पोर्न फिल्में जिम्मेबार

संदर्भः पोर्न साइट्स भी है बलात्कार के लिए जिम्मेबार-भूपेंद्र सिंह, गृहमंत्री मप्र सरकार प्रमोद भार्गव देश  में इस समय बालिकाओं से बलात्कार की बाढ़ सी…

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