विविधा उनतालीस बेचारे, बेरोजगारी ने मारे

उनतालीस बेचारे, बेरोजगारी ने मारे

प्रमोद भार्गव भारत में युवा बेरोजगार किस हद तक जान जोखिम में डालकर रोजगार पाने को उतावले व परेशान हैं, यह इराक में 39 भारतीय…

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विविधा युद्ध और शान्ति के बीच जल

युद्ध और शान्ति के बीच जल

अरुण तिवारी प्रख्यात पानी कार्यकर्ता राजेन्द्र सिंह के वैश्विक जल अनुभवों पर आधारित एक शृंखला विश्व जल दिवस, 22 मार्च 2018 पर विशेष यह दावा…

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राजनीति लोकसभा चुनाव 2019  में  2004 की भांति पराजय से बचें… 

लोकसभा चुनाव 2019  में  2004 की भांति पराजय से बचें… 

क्या ‎गोरखपुर , फूलपुर व अररिया के उपचुनावों में भाजपा की पराजय ने हमको इतना निराश हो जाना चाहिये कि 2019 के चुनावों की सफलता…

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समाज न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धाः॥

न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धाः॥

डॉ. मधुसूदन वृद्ध जनों का योगदान: भा. (१) डॉ. मधुसूदन सूचना: इसआलेख को *वे न दुखडा गाएंगे, न तुम अनुमान कर पाओगे* आलेख के बाद…

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धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज की स्थापना एवं वेद प्रचार एक दैवीय एवं पुण्य कार्य

आर्यसमाज की स्थापना एवं वेद प्रचार एक दैवीय एवं पुण्य कार्य

मनमोहन कुमार आर्य                 हम ऋषि दयानन्द सरस्वती द्वारा चैत्र शुक्ल पंचमी संवत् 1932 को आर्यसमाज की स्थापना…

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राजनीति योगी सरकार के 1 साल :  सही दिशा में सही कदम

योगी सरकार के 1 साल : सही दिशा में सही कदम

शिवशरण त्रिपाठी १९ मार्च दिन सोमवार को मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में उत्तरप्रदेश में भाजपा नीति राजग सरकार के एक साल पूरे…

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महिला-जगत क्या वाकई ब्रह्माण्ड को समझना आसान, पर महिला खुद ही एक रहस्य है?

क्या वाकई ब्रह्माण्ड को समझना आसान, पर महिला खुद ही एक रहस्य है?

हाल ही में हमने एक महान वैज्ञानिक प्रोफेसर स्टीफ़न हाॅकिंग को खो दिया जो कि ब्रह्माण्ड की खोज में लगे हुए थे। स्टीफन हॉकिंग ने…

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समाज जोखिमभरा बचपन सभ्य समाज की त्रासदी

जोखिमभरा बचपन सभ्य समाज की त्रासदी

-ललित गर्ग- इक्कीसवीं सदी का सफर करते हुए तमाम तरह के विकास के वायदें तब खोखले साबित हो रहे हैं जब हम अपने बचपन को…

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जन-जागरण जल की शुद्धता और उपलब्धता पर संकट

जल की शुद्धता और उपलब्धता पर संकट

अरविंद जयतिलक विज्ञान पत्रिका नेचर जियोसाइंस की मानें तो सिंधु और गंगा नदी के मैदानी क्षेत्र का 60 प्रतिशत भूजल पूरी तरह दूषित हो चुका…

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व्यंग्य माफी एप

माफी एप

मैंने बहुत मना किया, पर शर्मा जी चुनाव लड़ ही गये। अब चुनाव में तो कई तरह की झूठी-सच्ची बातें कहनी पड़ती हैं। शर्मा जी…

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पर्यावरण विकास के नाम पर पर्यावरण की उपेक्षा क्यों?

विकास के नाम पर पर्यावरण की उपेक्षा क्यों?

-ललित गर्ग- ‘सबका साथ, सबका विकास’ वर्तमान सरकार का नारा है, यह नारा जितना लुभावना है उतना ही भ्रामक एवं विडम्बनापूर्ण भी है। यह सही…

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कहानी वह सब की सुनता है ओर सबकी मदद करता है

वह सब की सुनता है ओर सबकी मदद करता है

एक मेजर के नेतृत्व में 15 जवानो की एक टुकड़ी हिमालय पर्वत में अपने रास्ते पर थी उन्हे ऊपर कही तीन महीने के लिए दूसरी…

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