धर्म-अध्यात्म “श्रीकृष्ण के चरित्र को दूषित करने वाली भागवत पुराण की मिथ्या बातों को न मानें : आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री”

“श्रीकृष्ण के चरित्र को दूषित करने वाली भागवत पुराण की मिथ्या बातों को न मानें : आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री”

मनमोहन कुमार आर्य,  आर्यसमाज हिण्डोन सिटी में रविवार 2 सितम्बर, 2018 को श्री कृष्ण-जन्माष्टमी पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः चार दम्पत्तियों…

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राजनीति “मदारी” शिवराज के आगे कमजोर पड़ते कमलनाथ ?

“मदारी” शिवराज के आगे कमजोर पड़ते कमलनाथ ?

जावेद अनीस मध्यप्रदेश में पिछले तीन महीने की सरगर्मियों को देखें तो कांग्रेस भाजपा के मुकाबले चुनावी तैयारियों में पीछे नजर आ रही है. कांग्रेस…

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कविता मेरी आँखों के सामने अब कोई अँधेरा नही,

मेरी आँखों के सामने अब कोई अँधेरा नही,

लेखक : बबली सिंह   मेरी आँखों के सामने अब कोई अँधेरा नही, कि हर धूल मैंने झाड़ दी है अब, मुझे अब अपने दर्द की…

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समाज शिकागो संभाषण – भारत के विश्वगुरु बनने का मार्ग

शिकागो संभाषण – भारत के विश्वगुरु बनने का मार्ग

प्रवीण गुणगानी स्वामी विवेकानंद जी ने भारत को व भारतत्व को कितना आत्मसात कर लिया था, यह कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर के इस कथन से समझा…

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राजनीति ऐसे डॉक्टरों की डिग्रियां छीन लें

ऐसे डॉक्टरों की डिग्रियां छीन लें

डॉ. वेदप्रताप वैदिक किसी भी राष्ट्र को संपन्न और शक्तिशाली बनाने के लिए सबसे जरुरी दो चीजें होती हैं। शिक्षा और चिकित्सा। हमारे नेताओं ने…

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कविता कहाँ जाने का समय है आया !

कहाँ जाने का समय है आया !

  (मधुगीति १८०८०१ अ) कहाँ जाने का समय है आया, कहाँ संस्कार भोग हो पाया; सृष्टि में रहना कहाँ है आया, कहाँ सृष्टि  से योग हो पाया ! सहोदर जीव कहाँ हर है हुआ, समाधि सृष्ट कहाँ हर पाया; समादर भाव कहाँ आ पाया, द्वैत से तर है कहाँ हर पाया ! बीज जो बोये दग्ध ना हैं हुए, जीव भय वृत्ति से न मुक्त हुए; भुक्त भव हुआ कहाँ भव्य हुए, मुक्ति रस पिया कहाँ मर्म छुए ! चित्त चितवन में कहाँ है ठहरा, वित्त स्वयमेव कहाँ है बिखरा; विमुक्ति बुद्धि है कहाँ पाई, युक्ति हो यथायथ कहाँ आई ! नयन स्थिर चयन कहाँ कीन्हे, कहाँ मोती हैं हंसा ने बीने; कहाँ ‘मधु’ उनकी शरण आ पाया, पकड़ हर चरण कमल कब पाया ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’

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धर्म-अध्यात्म “भौतिकवाद से हमारी मानवीय संवेदनायें घटती हैं जिन्हें आध्यात्मिकता से सन्तुलित कर जीवन को सुखी बना सकते हैं”

“भौतिकवाद से हमारी मानवीय संवेदनायें घटती हैं जिन्हें आध्यात्मिकता से सन्तुलित कर जीवन को सुखी बना सकते हैं”

मनमोहन कुमार आर्य, भौतिकवाद आध्यात्मवाद का विलोम शब्द है। पृथिवी, अग्नि, जल, वायु और आकाश को भौतिक पदार्थ कहते हैं। इसमें ईश्वर व जीवात्मा सम्मिलित…

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समाज अब “मोमो चैलेंज” गेम बना बच्चों की मौत का सौदागर 

अब “मोमो चैलेंज” गेम बना बच्चों की मौत का सौदागर 

अनिल अनूप  लुधियाना, 9 सितंबर .मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी), उच्च शिक्षा विभाग, ने स्कूल शिक्षा विभाग को सलाह दी है कि ऑनलाइन गेम ‘मोमो…

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कविता ज्वार उठाना होगा, मस्तक कटाना होगा

ज्वार उठाना होगा, मस्तक कटाना होगा

कवि आलोक पाण्डेय समर की बेला है वीरों अब संधान करो, शत्रु को मर्दन करने को, त्वरित अनुसंधान करो | मातृभू की खातिर फिर लहू…

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कविता महीने के चार दिन वो खुद से लड़ती है

महीने के चार दिन वो खुद से लड़ती है

लेखक : आदर्श गौतम महीने के चार दिन वो खुद से लड़ती है, खुद को अकेला समझती है, तकलीफ में रहती है, रोती है, बिलखती…

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राजनीति सर्वोच्च न्यायालय और तुष्टीकरण

सर्वोच्च न्यायालय और तुष्टीकरण

बिपिन किशोर सिन्हा ऐसा लगता है कि जब से कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ अवमानना की नोटिस दी…

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कविता हिंदी भाषा के हृदय का दर्द

हिंदी भाषा के हृदय का दर्द

मैं भारत से हिन्दी बोल रही हूँ अपने ह्रदय की पीड़ा खोल रही हूँ मेरी आवाज कोई नही यहाँ सुनता है अंग्रेजी भाषा का जाल…

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