प्रवक्ता न्यूज़ पाकिस्तान की महान बेटी असमा जहांगीर

पाकिस्तान की महान बेटी असमा जहांगीर

डॉ. वेदप्रताप वैदिक असमा जहांगीर के आकस्मिक निधन की खबर सुनकर पाकिस्तान ही नहीं, सारे दक्षिण एशिया के देशों में समझदार लोगों को बहुत धक्का…

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विविधा पूर्ण विकसित भारत बनाने की चुनौतियां

पूर्ण विकसित भारत बनाने की चुनौतियां

ललित गर्ग:- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नया भारत निर्मित हो रहा है। मोदी के शासनकाल में यह संकेत बार-बार मिलता रहा है कि हम विकसित…

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गजल जब मैं तुम्हारे संग हूँ !

जब मैं तुम्हारे संग हूँ !

जब मैं तुम्हारे संग हूँ, तब भी मैं कहाँ तुम्हारे साथ हूँ; तुम्हारी संस्थागत सत्ता में रहते हुए भी, मैं विश्व व्यापी व्यवस्था का परिद्रष्टा…

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गजल वत्स ! क्या अब तुम वह नहीं, जो पहले थे !

वत्स ! क्या अब तुम वह नहीं, जो पहले थे !

वत्स ! क्या अब तुम वह नहीं, जो पहले थे? निर्गुण की पहेली, अहसास की अठखेली; गुणों का धीरे धीरे प्रविष्ट होना सुमिष्ट लगना, पल…

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विविधा  ‘‘वेलेनटाइन-डे’’ :  पश्चिम का बयार

 ‘‘वेलेनटाइन-डे’’ : पश्चिम का बयार

संजय चाणक्य ‘‘बहुत धोखा देते हैं मोहब्बत में हुस्न वाले ! इन हसीनो पर भूल कर भी ऐतबार न कर !!’’ यह कैसा र्दुभाग्य है,हम…

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राजनीति वर्णसंकर

वर्णसंकर

महाराज शान्तनु भीष्म पितामह के पिता थे। वे हस्तिनापुर के सम्राट थे। उनकी पहली पत्नी गंगा से देवव्रत पैदा हुए जो अपनी भीष्म प्रतिज्ञा के…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-56

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-56

राकेश कुमार आर्य   गीता का नौवां अध्याय और विश्व समाज इस प्रकार ईश्वर को एक देशीय न मानना स्वयं अपने बौद्घिक विकास के…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-55

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-55

राकेश कुमार आर्य   गीता का नौवां अध्याय और विश्व समाज इससे अगले श्लोक में श्रीकृष्णजी कहते हैं कि इस संसार में लोग किसी…

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राजनीति अंतिमजन के हितचिंतक पंडित दीनदयाल

अंतिमजन के हितचिंतक पंडित दीनदयाल

-मनोज कुमार एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय सही अर्थों में अंतिमजन के हितचिंतक थे. उनका मानना था कि न्याय और समाजवाद तभी सार्थक…

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धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द ने आर्यसमाज की स्थापना क्यों की?

ऋषि दयानन्द ने आर्यसमाज की स्थापना क्यों की?

मनमोहन कुमार आर्य आर्यसमाज एक सामाजिक एवं धार्मिक आन्दोलन है। यह वैदिक सिद्धान्तों से देश की राजनीति को भी दिशा देने में समर्थ है। वेद,…

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कविता अब मैं आता हूँ मात्र !

अब मैं आता हूँ मात्र !

अब मैं आता हूँ मात्र, अपनी विश्व वाटिका को झाँकने; अतीत में आयोजित रोपित कल्पित, भाव की डालियों की भंगिमा देखने ! उनके स्वरूपों की छटा निहारने, कलियों के आत्मीय अट्टहास की झलक पाने; प्राप्ति के आयामों से परे तरने, स्वप्निल वादियों की वहारों में विहरने ! अपना कोई उद्देश्य ध्येय अब कहाँ बचा, आत्म संतति की उमंगें तरंगें देखना; उनके वर्तमान की वेलों की लहर ताकना, कुछ न कहना चाहना पाना द्रष्टा बन रहना ! मेरे मन का जग जगमग हुए मग बन जाता है, जीवित रह जिजीविषा जाग्रत रखता है; पल पल बिखरता निखरता सँभलता चलता है, श्वाँस की भाँति काया में मेहमान बन रहता है ! मेरी सृष्टि मेरी द्रष्टि का अहसास लगती है, और मैं अपने सुमधुर सृष्टा का आश्वास; दोनों ‘मधु’ सम्बंधों में जकड़े, आत्म-अंक में मिले सिहरे समर्पण में सने ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’

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महिला-जगत मातृत्व स्वास्थ्य का लक्ष्य और चुनौतियां

मातृत्व स्वास्थ्य का लक्ष्य और चुनौतियां

उपासना बेहार न्यूयार्क में 24 सितम्बर 2015 को 193 देशों के नेताओं की बैठक हुई जिसे यू. एन. सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट कहा गया।  समिट में 2030 तक के लिए एजेंडा तय किया गया है. ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (सतत विकास लक्ष्य) में 17 मुख्य विकास लक्ष्यों तथा 169 सहायकलक्ष्यों को निर्धारित किया गया है. जो P5 (People, Planet, Peace, Prosperous और Partnership पर जोर देता है, इसे ग्लोबल गोल भी कहा जाता है। इसे “हमारी दुनिया का रूपांतरण : सतत विकास के लिए 2030 का एजेंडा” (Transforming Our World : The 2030 Agenda for Sustainable Development) नाम दिया गया है, जिसका आधार सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य(Millinum Development Goal)  है और इसकी समयसीमा 2015-30 तक है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल के 17 गोल में से गोल 3 का उद्देश्य सभी आयु के लोगों में स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देना है  ‎जिसमें मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना प्रमुख लक्ष्य हैं। ‎…

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